खड़े-खड़े कपड़ों में निकल जाता है पेशाब? 50 प्लस महिलाएं इन 5 संकेतों को न करें नजरअंदाज

जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, शरीर कई ऐसे बदलावों से गुजरता है जिनकी हमने कल्पना भी नहीं की होती। 50 की उम्र के बाद कई महिलाओं को एक ऐसी समस्या का सामना करना पड़ता है, जो न सिफ्र शारीरिक बल्कि मानसिक और सामाजिक रूप से परेशान कर देती है और वह समस्या यूरिन इनकॉन्टिनेंस (Urinary Incontinence) यानी पेशाब का अपने आप लीक हो जाना है।
50 के बाद यूरिन लीकेज के कारण
कई महिलाएं शर्मिंदगी के कारण यूरिन लिकेज की समस्या को चुपचाप सहती रहती हैं और मान लेती हैं कि यह बुढ़ापे का अनिवार्य हिस्सा है। लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि यह कोई नॉर्मल बात नहीं है और सही जानकारी के साथ इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। आइए हैदराबाद की फेमस यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर दीप्ति सुरेखा से इसके कारण जानते हैं, ताकि समय रहते बचाव के उपाय किए जा सकें।

मेनोपॉज और हार्मोनल बदलाव
मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल गिर जाता है। इससे ब्लैडर और यूरिन मार्ग की परत पतली और कम लचीली हो जाती है, जिससे लीकेज की समस्या बढ़ती है।
पेल्विक फ्लोर की मसल्स का कमजोर होना
उम्र के साथ पेल्विक फ्लोर (ब्लैडर को सपोर्ट देने वाली मसल्स) कमजोर हो जाती हैं। इस कमजोरी को महिलाओं में डिलिवरी और मेनोपॉज और बढ़ा देते हैं।
न्यूरोलॉजिकल समस्याएं
स्ट्रोक, पार्किंसंस या डायबिटीज के कारण नसें डैमेज हो जाती हैं, जिससे ब्रेन और ब्लैडर के बीच का संपर्क कमजोर पड़ जाता है।
मोटापा और लाइफस्टाइल
बढ़ता वजन ब्लैडर ज्यादा प्रेशर डालता है। इसके अलावा, पुरानी खांसी या कब्ज (जिसमें जोर लगाना पड़ता है) भी ब्लैडर के वाल्व को कमजोर कर देती है। स्मोंकिग और पर्याप्त पानी न पीना भी इस समस्या को गंभीर बना देता है।
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दवाइयां और संक्रमण (UTI)
ब्लड प्रेशर की कुछ दवाइयां या बार-बार होने वाला यूरिन इंफेक्शन (UTI) ब्लैडर में जलन पैदा करता है, जिससे पेशाब को रोक पाना मुश्किल हो जाता है।

लीकेज के प्रकार जिन्हें पहचानना है जरूरी
- स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस- हंसने, खांसने, छींकने या वजन उठाने पर लीक होना।
- अर्जेंसी इनकॉन्टिनेंस- अचानक और इतनी तेज पेशाब महसूस होना कि टॉयलेट पहुंचने से पहले ही निकल जाए।
- ओवरफ्लो इनकॉन्टिनेंस- ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं होता और पेशाब की बूंदें टपकती रहती हैं।
डॉक्टर की सलाह: कब जाएं यूरोलॉजिस्ट के पास?
डॉ. दीप्ति सुरेखा का कहना है कि अगर यूरिन लीकेज आपकी नींद, रोजाना के काम या मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है, तो संकोच छोड़कर डॉक्टर से मिलें।
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"यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस सिर्फ मेडिकल समस्या नहीं है, यह आपके जीवन की गुणवत्ता से जुड़ी बात है। आज के समय में आधुनिक इलाज उपलब्ध हैं, इसलिए चुपचाप सहने की जरूरत नहीं है।"
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