मां बनना कितना सुखद अहसास है, यह मां बनकर ही पता चला।
जब पहली बार वो अपके सामने आता है तो जैसे शरीर में एक सिहरन सी उठ जाती है। सारा दर्द, सारी पीड़ा बस उसके प्यारे से चेहरे को देख कर दूर हो जाती है। मैंने भी अपने जीवन मे इस सुख को पाया है, सच कहूं तो मां बनकर अपना जीवन सजाया है।

पहली बार मां बनने का अहसास हर महिला के लिए बेहद ही खास होता है। क्‍योंकि कहा जाता है कि मां बनने का अर्थ केवल बच्‍चे का जन्‍म ही नहीं होता है बल्कि महिला का भी नया जन्‍म होता हैं। लेकिन प्रेग्‍नेंसी के दौरान महिलाओं को बहुत सी परेशानियों से गुजरना पड़ता है। प्रेग्‍नेंसी में महिलाओं की बॉडी में कई हॉर्मोनल बदलाव होते हैं। बॉडी पेन और मूड स्विंग की समस्या भी आम होती है। लेकिन अगर अपनी प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाएं योग करें तो उन्हें न सिर्फ इन परेशानियों से राहत मिलेगी बल्कि डिलीवरी में भी आसानी होगी और गर्भ में बच्चे का विकास भी सही होगा। आइए स्‍वामी परमानंद प्राकृतिक चिकित्‍सालय योग एवं अनुसंधान केन्‍द्र की आयुर्वेदिक Dr. Durga Arod (RMO) से जानें कि प्रेग्‍नेंसी में महिलाओं को कौन से योग करने चाहिए।

तितली आसन

तितली आसन आप प्रेग्‍नेंसी में आप कर सकती हैं। इसे करने से बॉडी की flexibility बढ़ती है और बॉडी के निचले हिस्‍से का तनाव खुलता है। इससे डिलीवरी के समय महिलाओं को तकलीफ कम होती है। तितली आसन करने के लिए दोनों पैरों को सामने की ओर मोड़कर, तलवे मिला लें, यानि पैरों से नमस्ते की मुद्रा में कर लें। इसके बाद दोनों हाथों की मदद से पैरों के पंजे को पकड़ें और टांगों को ऊपर-नीचे करें। आपकी पीठ और बाजू बिल्कुल सीधी होनी चाहिए। इस क्रिया को 15 से अधिक बार ना करें। इस आसन को तितली आसन का नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इस आसन में आप अपनी टांगें को तितली के पंख की तरह फड़फड़ाती है।

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कटि चक्रासन

इस आसन में दोनों बाजुओं, गर्दन तथा कमर की एक्‍सरसाइज होती है इसीलिए इसे कटि चक्रासन कहते हैं। यह आसन खड़े होकर किया जाता है। इसे करने के लिए सबसे पहले सीधे हो जाएं। इस तरह से खड़े हो कि दोनों पैरों के बीच थोड़ी सी दूरी हो। अब अपने कंधों की सीध में दोनों हाथों को फैलाएं। इसके बाद बाएं हाथ को दाएं कंधे पर रखें और दाएं हाथ को पीछे से बाईं ओर लेकर आएं। सांस नॉर्मल करते हुए मुंह को घुमाकर बाएं कंधों की सीध में ले आएं। अब इस स्थिति में कुछ समय तक खड़ी रहें और फिर दाईं तरफ से भी इस क्रिया को इसी प्रकार से करें। इस क्रिया को दोनों हाथों से 4-4- बार करें। इस आसन को करने से पेट दुरुस्‍त रहता है, कब्‍ज की समस्‍या नहीं होती और तनाव भी दूर होता है।

अनुलोम विलोम

प्रेग्‍नेंसी में अनुलोम विलोम करने से बॉडी में ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ता है। जिससे ब्‍लड प्रेशर कंट्रोल होता है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले तो सुखासन में बैठ जाएं। फिर दाएं हाथ के अंगूठे से नाक का दाया छिद्र बंद करें और अपनी सांस अंदर की ओर खींचे। फिर उसी हाथ की दो उंगलियों से बाईं ओर का छिद्र बंद कर दें और अंगूठे को हटाकर दाई ओर से सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया को फिर नाक के दूसरे छिद्र से दोहराएं। प्रेग्‍नेंसी में स्‍ट्रेस फ्री रहने के लिए इस आसन को जरूर करना चाहिए।

योग को लेकर महिलाओं के मन में कई तरह की गलतफहमियां हेाती है। शायद आपके मन में भी कुछ हो। जानने के लिए इस वीडियो को जरूर देंखे।

ताड़ासन

हालांकि ताड़ासन प्रेग्‍नेंसी में शुरू के छह महीने तक ही करना चाहिए। लेकिन इसे करने से ब्रेन के साथ-साथ मसल्‍स मजबूत होती हैं। ताड़ासन करने के लिए सीधे खड़ी हो जायें, आपके पैर पास होने चाहिए, फिर सांस लेते हुए दोनों हाथों को उठाइये। फिर हथेलियों को आसमान की तरफ कीजिए, फिर सांस लेते हुए दोनों हाथों को ऊपर की तरफ ले जाकर इनको उंगलियों के जरिये लॉक कर दीजिए। फिर पैरों के पंजों पर खड़ी हो जायें, ध्‍यान रहे आपका संतुलन सही होना चाहिए। फिर सामने किसी एक बिंदु पर अपना ध्‍यान केंद्रित कीजिए। कुछ समय तक इसी स्थ्‍िाति में रहें। फिर सांस बाहर निकालते हुए सामान्‍य स्थिति में वापिस आ जाएं। अगर आपको प्रेग्‍नेंसी के दौरान पेट संबंधी समस्याएं होती हैं तो आपको ताड़ासन करना चाहिए इससे आप हेल्‍दी रहेगी।

शवासन

प्रेग्‍नेंसी में शवासन करने से ना सिर्फ महिलाओं को मानसिक शांति मिलती है बल्कि यह गर्भ में पल रहे शिशु के विकास भी अच्‍छी तरह होता है। साथ ही प्रेग्‍नेंसी में महिलाएं बहुत तनाव महसूस करती है। ऐसे में शवासन करने से उन्हें फायदा मिलता है। शवासन करने के लिए बिस्तर पर सीधा लेट जाएं और अपने हाथ-पैर को खुला छोड़ दें। आपको अपने शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ना है। दिमाग को भी शांति दे और पूरी तरह तनावमुक्त हो जाएं और फिर धीरे-धीरे लंबी सांस ले और छोड़ें।

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