योग को हमेशा से शरीर को लोचदार और मजबूत करने वाला माना गया है; लेकिन मानसिक फायदों के बारे में अक्सर बात नहीं की जाती है। यह एक बहुत पुरानी तकनीक है, योग का प्रभाव और हमारे दिमाग पर पड़ने वाले उसके प्रभाव और दिमाग सब विज्ञान का कार्य हैं, जिन्‍हें प्रमुख संस्थानों द्वारा किये गये अध्ययनों और शोध का समर्थन मिला है। योग आपकी आत्‍मखोज की यात्रा के दौरान आपके अंदर छुपे साहसी व्‍यक्ति की हेल्‍प करता है।

रोमांच आपके जीवन में अनापेक्षित घटनायें लेकर आता है।---रिचर्ड एल्डिंगटन
क्या उपर्युक्त वाक्य को पढ़ने के बाद आपका ध्यान उन तमाम इच्छाओं की ओर जाता है जो अधूरी रह गई हैं? क्या एक दुस्साहसी बनने के लिए आपकी कोई ऐसी इच्‍छा है जिसे सोच कर आप उत्साहित होते हों और कहानियों से भरपूर जीवन जीना चाहते हैं? नया जीवन शुरू करना चाहते हैं? वह यात्रा करना चाहते हैं जिसकी आपको हमेशा से चाहत थी?

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Lo Yoga è eseguire ogni azione come un opera d’arte. #sarvayoga #yogapertutti #yogavaldarno #yogaitalia #montevarchi #yogatoscana

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क्या होगा अगर उपर्युक्त वाक्य के अर्थ को मैं एक पूरे अलग ढंग से बताउं? हालांकि यह आपके हर विचारों पर ठीक बैठता है, लेकिन इसे नए परिपेक्ष्य में देखे जाने की जरूरत है। हम सभी जीवन की एक यात्रा पर हैं-यह जीवन की यात्रा है। हम दुनिया के हर कोने में घूमना चाहते हैं मगर क्या हमनें अपने भीतर की यात्रा की ओर सोचा? भूगोल को समझना अच्छा है, लेकिन क्या यह भी सोचा कि इंसान का अन्तःकरण क्या है? अब यही एक यात्रा है जिसके विषय में कोई नहीं सोचता। जटिल लग रहा होगा मगर हमारे पूर्वजों ने जागरण की महत्ता को समझा था और इसलिए उन्होंने हमें अपने बारे में जानने की शिक्षा दी न कि कोई अन्य उपकरण और यह शिक्षा थी--योग।

शरीर में 7 चक्र को करता है बैलेंस

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सर्वा योगा, माइंडफुलनेस एंड बियोंड के को फाउंडर श्री सर्वेश शशि का कहना हैं कि यह सर्विदित है कि हमारे शरीर में 7 चक्र होते हैं, और जब इनका परस्पर तारतम्य हो जाता है तो व्‍यक्ति को बहुत ज्‍यादा फायदा होता है। एक तरफ तो मूलाधार (मूल), स्वाधिस्ठान (सेक्रल), अनाहत (ह्रदय), विशुद्ध(गला), अजना(तीसरे नेत्र), सहस्र(मुकुट) चक्र के अपने उद्देश्‍य होते हैं, लेकिन मणिपुर या सोलर प्लेक्सस चक्र आपकी शारीरिक, मानसिक और अध्‍यात्मिक ऊर्जा को नियमित करने के लिए जिम्‍मेदार होते हैं। इससे आपकी आंतरिक शक्ति, मान्यताएं, और विचार निर्देशित होते हैं।

एक मजबूत और संतुलित सोलर प्लेक्सस से स्वाभिमान, आत्मज्ञान की उच्स्तरीय जानकारी, चिंतन में स्पष्टता, और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है। योग के रेगुलर अभ्‍यास से आपके शरीर और दिमाग में लचीलता आती है। इसका अभ्यास प्रारम्भ करने से जो चीजें बंधी होती हैं वह खुल जाती हैं। उदाहरण के तौर पर आप एक साधारण शीर्षासन से शुरुआत करते हैं,जैसे-जैसे आप इसका अभ्यास करते जाते हैं तो कुछ महीनों में आप पाएंगे कि आपने शीर्षासन में महारत हासिल कर ली है। क्या यह एक उपलब्धि नहीं है? अभ्यास के हर स्‍टेज में आप पाएंगे कि कैसे चमत्कार हो रहे हैं। आपको अनुभूति होगी कि जो शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बाधाएं आपको रोक रही थीं, वह दूर हो रही हैं। इससे आपका विश्वास और मजबूत होगा, आप ज्‍यादा शांतचित्‍त होंगे। और धीरे-धीरे, इस नई स्पष्टता और दृढ़निश्चय से आप परिस्थितियों से ठीक ढंग से निपटने में कामयाब होंगे और अपने विचारों एवं कार्यों को एक के बाद एक प्रस्‍तुत करेंगे।

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नियमित अभ्‍यास से आता है बदलाव

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मनुष्य होने के नाते हमारी कुछ मान्यताएं होती हैं। हमारा दिमाग एक प्लास्टिक की तरह असीमित है। इसके बावजूद हम अक्सर सोच लेते हैं कि हमारा काम असंभव है और हम हार मान लेते हैं। हम भय, असुरक्षा, और शंकाओं के कारण अपनी सीमाएं निर्धारित कर लेते हैं। इसी जगह पर योग आपके लिए सहायक होता है। नियमित अभ्यास से, आप परिवर्तन देखना आरंभ करेंगे, आपका शरीर स्वाभाविक तौर पर हरकत करेगा और दिमाग आपके कार्यों को सहयोग देगा। उदाहरण के तौर पर प्रारम्भ में आपको किसी एक आसन में बैठने के लिए 30 सेकंड के लिए संघर्ष करना पड़े और आप हार कर इसे करना छोड़ दें लेकिन अभ्यास करने पर आप देखेंगे कि आप इसी आसन को आसानी से करने लगे हैं और वह भी बहुत आसानी से। 



अब आपका दिमाग यह नहीं सोचता कि यह कठिन है या आपका संतुलन बिगड़ जायेगा। जैसे ही आप भंगिमा में आते हैं आपका दिमाग कुछ संकेत भेजता है जो निश्चित करता है कि भय को किस प्रकार योग्यता में बदला जाये। योग आपको खुलने की क्षमता देता है, भावनाओं को संतुलित और स्वस्थ करता है। जब भी आप तनाव की स्थिति में हों जिससे शांत रहने में दिक्कत हो तो लंबी श्‍वास काफी असरकारक हो सकती है। ऐसा माना जाता है कि योग से ऊर्जा का अवरोध निर्बाधित होता है, जिसे संस्कृत में ग्रंथि कहते हैं। यह अवरोध अधिकतर पीछे नीचे की ओर होते हैं, ह्रदय चक्र, गर्दन /ग्रीवा चक्र, और नाभि क्षेत्र में होता है। योग के अंतर्गत ऐसी विधियां विकसित की गयी हैं जो अवरोधों को हटाने में सहायक होती हैं। इससे एक मजबूत आधार का निर्माण होता है जिससे हमारी भावनाओं और विचारों को मजबूती मिलती है।

योग से शरीर को जानने लगते हैं आप 

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अगर, आप मुझसे पूछेंगे कि क्या योग तब मदद करेगा जब आप “वास्‍तविक रोमांच” पर हैं, तो मेरा उत्तर हां होगा। योग मजबूती देता है, इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं और संतुलन मिलता है जो कठिन दुर्गम यात्राओं जैसे ट्रेकिंग और दूसरी खोजी यात्राओं जैसे सर्फिंग, स्काइडाइविंग, पैरासेलिंग आदि के लिए आवश्‍यक होता है। लेकिन योग की सबसे अच्‍छी भूमिका यह है कि इससे हमारी इम्‍यूनिटी बढ़ती है। कोई भी व्यक्ति बीमार नहीं पड़ना चाहता है, क्या यह सही नहीं?


संक्षेप में कहें, तो योग से आप अपने शरीर को जानना शुरू कर देते हैं। चीजों के आप मालिक हो सकते हैं और क्या करना है, इसका ज्ञान आपको हो जाता है। दिमाग आपके शरीर की यात्रा करना शुरू कर देता है और वह दिमाग के गहनतम भाग में पहुंचकर ऊर्जा का जागरण प्रारम्भ कर देता है, आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, आपको उस प्रकार का प्रकाश एवं ऊर्जा मिलने लगती है जिसकी कल्पना आपने की थी। और यही सच्चाई भी है जो अनुभव बताते हैं। एक ऐसी एक ऐसी यात्रा जिस पर सब नहीं निकलते, लेकिन उन्ह जरूर निकलना।

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