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प्रेग्‍नेंसी में योग करने से नॉर्मल डिलीवरी के बढ़ते है चांस, लेबर पेन भी होता है कम

प्रेग्‍नेंसी में योग करके आप अपनी बॉडी और ब्रेन को लेबर पेन और डिलीवरी के लिए आसानी से तैयार कर सकती हैं।
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Published -06 Dec 2018, 20:12 ISTUpdated -07 Dec 2018, 12:41 IST
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प्रेग्‍नेंसी किसी भी महिला के जीवन का एक अद्भुत अहसास है। लेकिन इस समय महिला को अपने और अपने होने वाले शिशु की हेल्‍थ के बारे में सोचना चाहिए। इसके लिए प्रीनेटल योग से बेहतर कुछ और हो ही नहीं सकता है। इससे आपको प्रेग्‍नेंसी में हार्मोस बदलाव के कारण होने वाली परेशानियों जैसे जी मिचलाना, कब्‍ज, कमर दर्द, थकान आदि के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। इसके अलावा प्रेग्‍नेंसी में योग करके आप अपनी बॉडी और ब्रेन को लेबर पेन और डिलीवरी के लिए आसानी से तैयार कर सकती हैं।

लेकिन इसके लिए सबसे महत्‍वपूर्ण है कि आप योग का सही अभ्‍यास करें। शुरुआत में आपको योग एक्‍सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए। इसके बाद आप योग के लिए योग स्‍टूडियो जा सकती है या घर पर खुद से इसे कर सकती है। जी हां ऐसे में अपने शरीर को सुनो और जो आपको सही लगता है उसे ही करें। आइए जानें प्रेग्‍नेंसी के दौरान योग करने से आपको क्‍या-क्‍या फायदे हो सकते हैं।

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स्‍टैमिना और स्‍ट्रेंथ बढ़ाए

क्‍योंकि शिशु आपकी बॉडी के अंदर बढ़ता है, इसलिए आपको ज्‍यादा वजन संभालने के लिए आपको ज्‍यादा एनर्जी और स्‍ट्रेंथ की आवश्‍यकता होती है। योग हमारे हिप्‍स, पीठ, आर्म्‍स और शोल्‍डर को म‍जबूती देता है।

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नॉर्मल डिलीवरी के बढ़ते है चांस 

योग करने से सीजेरियन डिलीवरी का खतरा काफी हद तक टल जाता है और नॉर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ने लगते हैं। लेकिन डॉक्‍टर की सलाह से ही योग करना चाहिए अगर आपको डॉक्‍टर योग करने से मना करे तो इसे न करें। आप हर योग मुद्रा के दौरान सांसों पर काम करती हैं, जो कभी-कभी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। लेकिन लेबर के समय, हम सांसों के माध्‍यम से "असहज के साथ सहज" महसूस करती है।

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बच्चे के साथ कनेक्शन

प्रीनेटल योग करने से हमारे अंदर होने वाला प्रोसेस स्‍लो हो जाता है और हम अपनी बॉडी में होने वाले बदलाव पर अच्‍छे से फोकस कर सकती हैं। हर एक योग मुद्रा में सांस लेने के माध्‍यम से आप अपने अंदर क्‍या हो रहा है इसके बारे में अधिक जागरूक हो जाती है।

दर्द होता है कम

जैसे-जैसे शिशु बढ़ता है, प्रेग्‍नेंट की बॉडी की विशेष मसल्‍स में स्‍ट्रेस बढ़ने लगता है। पेट के साइज बढ़ने से निचले हिस्‍से में दर्द बढ़ने लगता है। शिशु का वजन बढ़ने से ज्‍यादा प्रेशर के कारण हिप्‍स टाइट होने लगते हैं। जैसे-जैस ब्रेस्‍ट का साइज बढ़ता है, प्रेग्‍नेंट महिलाओं की ऊपरी हिस्‍से यानि की ब्रेस्‍ट, गर्दन और कंधो  में ज्‍यादा स्‍ट्रेस होने लगता है। लेकिन प्रेग्‍नेंसी में योग करने से आप इन सभी तरह के दर्द से निजात पा सकती हैं।

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बढ़ाता है सर्कुलेशन

योग के माध्‍यम से जोड़ों में सर्कुलेशन को बढ़ाकर मसल्‍स को बढ़ाया जा सकता है। हमारी बॉडी के अंदर ब्‍लड सर्कुलेशन को बढ़ाकर सूजन को कम और इम्‍यूनिटी को बढ़ाया जा सकता है, जिससे बढ़ते शिशु को एक हेल्‍थ वातावरण मिल सकता है।

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योग से आप न केवल खुद को, बल्कि आने वाले शिशु की देखभाल भी आसानी से कर सकती हैं। इसके अलावा इससे आपके नॉर्मल डिलीवरी के चांस और लेबर पेन भी कम हो जाता है।

 

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