काम के मामले में आप बेशक बेहतरीन हों, लेकिन अगर दूसरों के सामने खुद को सही तरीके से प्रजेंट नहीं कर पातीं, तो आपके काम की अहमियत कम हो जाती है। प्रोफेशनल्स और वर्कर्स के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण स्किल्स हैं, उन्हें क्लास में सिखाया नहीं जा सकता। ये स्किल्स सॉफ्ट स्किल्स कहलाती हैं और किसी भी जॉब को पाने के लिए होने वाले इंटरव्यू में इनकी भूमिका बेहद अहम हो जाती है। सॉफ्ट स्किल्स को इसलिए इतनी अहमियत दी जाती है क्योंकि इनके बलबूते किसी भी व्यक्ति से अच्छी तरह से कनेक्ट किया जा सकता है। सॉफ्ट स्किल्स रिलेशनशिप बनाने के लिए, लाइमलाइट में बने रहने के लिए और करियर में आगे बढ़ने के लिए बेहद जरूरी है। आइए जानें ऐसी ही कुछ सॉफ्ट स्किल्स के बारे में, जिन्हें हासिल करने पर आपको ध्यान देना चाहिए-

स्ट्रॉन्ग कम्यूनिकेशन बनाए रखें

आप चाहें किसी भी वर्कप्लेस में हों, बातचीत और लेखन दोनों में ही आपको मुखर होना चाहिए, क्योंकि इसी पर निर्भर करता है कि लोग आपको किस तरह से लेते हैं। इससे आपके को-वर्कर्स के साथ अच्छे रिलेशनशिप विकसित होने के आसार भी बढ़ जाते हैं। बातचीत से आपका प्रदर्शन और भी बेहतर हो जाता है क्योंकि इससे आपके मैनेजर को भी स्पष्टता होती है कि आप उससे किन चीजों की उम्मीद कर रही हैं। कम्यूनिकेशन बेहतर बनाने के लिए आप टोस्टमास्टर या इसी तरह के दूसरे पब्लिक स्पीकिंग प्लेटफॉर्म जॉइन कर सकती हैं, जहां आप खुद को सही तरीके से पेश करने की कला सीखती हैं। 

SOFT SKILLS inside

टीम के साथ मिलकर करें काम

इम्प्लॉयर्स हमेशा ऐसे लोगों को पसंद करते हैं जो टीम के साथ मिलकर काम करने में यकीन रखते हों। इससे कंपनी लंबे समय तक अपने एम्प्लॉईज को साथ बनाए रखने में कामयाब होती है, साथ ही अलग-अलग मिजाज के लोगों का साथ काम कर लेने पर आपकी योग्यता भी जाहिर होती है। अपने टीम मेंबर्स के साथ अच्छा तालमेल बनाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप उनके काम आएं। आप उनसे कभी भी पूछ सकती हैं कि उन्हें किसी तरह की हेल्प चाहिए। दूसरों के साथ मिलकर काम करने से आपके वर्क की क्वालिटी अपने आप बढ़ जाती है। 

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समय की मांग के हिसाब से खुद को ढालें

चीजें हमेशा आपकी योजना के अनुसार नहीं चलतीं। कई बार आपकी राह में रोड़े भी आ जाते हैं और तब आपको अपने टास्क पूरे करने के लिए अल्ट्रानेटिव्स पर भी विचार करना पड़ता है। कामयाब प्रोफेशनल्स वही होते हैं जो किसी भी समस्या के खड़े होने पर लचीला रुख अपनाते हैं। कंपनी ऐसे लोगों को प्रायोरिटी देती है जो उसकी जरूरत के हिसाब से डिलीवरी दे सकें। इसके लिए आपको अपने वर्कप्लेस में आने वाले छोटे से लेकर बड़े बदलाव को स्वीकार करने की आदत डालनी चाहिए। ट्रेनिंग सेशन में ज्यादा से ज्यादा सीखने की कोशिश करें और जो आपने सीखा वह अपने को-वर्कर्स को भी सिखाएं। 

निकालें मुश्किलों का हल

जब कोई मुश्किल खड़ी होती है तो आप या तो शिकायत कर सकती हैं या फिर अपनी सूझबूझ से उस समस्या को हल सकते हैं। दूसरा विकल्प अपनाने पर आपको अटेंशन मिलती है। अगर आप अपने वर्कप्लेस पर आने वाली प्रॉब्लम्स को अपनी यूनीक थिकिंग से खुद ही सेटल कर लेते हैं या फिर अपने सीनियर्स को इनोवेटिव आइडिया सुझाकर कंपनी के पैसे बचाने में मदद करते हैं तो कंपनी के लिए आप सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट बन जाते हैं। इसमें खुद को बेहतर करने के लिए अपने बॉस के पास हमेशा सुझाव लेकर जाएं ना कि शिकायत। 

हर चीज पर बारीक नजर 

इम्प्लॉयर्स को ऐसे लोग चाहिए होते हैं, जो अपने स्तर पर बारीकी से हर पहलू पर विचार कर सकें। वे ऐसे लोगों को तरजीह देते हैं, जिनका अपना नजरिया होता है और जो कंपनी को आगे बढ़ने के लिए खुद से आइडिया सुझाते हैं। इसमें खुद को बेहतर बनाने के लिए आप सारी इन्फॉर्मेशन पर गौर करें और उससे निष्कर्ष निकालें। मसलन आपसे बात करते हुए आपके बॉस की बॉडी लैंग्वेज कैसी है। आपकी बातों पर वह किस तरह से रेसपॉन्ड कर रहा है, इसकी एनालिसिस करने पर आप यह बखूबी समझ सकती हैं कि बॉस के मन में आपकी छवि कैसी है। इसी तरह लोग आपके फ्लो ऑफ इन्फॉर्मेशन को किस तरह से ले रहे हैं, इस बारे में एनालिसिस कर आप बिजनेस ऑपरेशन्स को बेहतर बना सकती हैं। 

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