जब शरीर में हार्मोन गड़बड़ा जाते हैं तो कुछ भी सही नहीं चलता है। ऐसे में बॉडी को वापिस ट्रैक पर लाने के लिए क्या किया जाए, यह समझ ही नहीं आता है। अमूमन महिलाओं को कई तरह की हार्मोनल समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन्हीं में से एक है पीसीओडी। यह एक ऐसी समस्या है, जिसकी वजह से आपको वजन बढ़ने से लेकर पीरियड्स रेग्युलर ना होना, बाल झड़ना या मूड स्विंग्स आदि कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में पीसीओडी को मैनेज करने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है, अपने लाइफस्टाइल और खान-पान में बदलाव करना। यही वजह है कि पीसीओडी से जूझ रही महिलाएं तरह-तरह की डाइट्स को फॉलो करके देखती हैं, लेकिन उन्हें वह रिज़ल्ट नहीं मिल पाता है, जिसकी उन्होंने उम्मीद की होती है। ऐसे में इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से आपको यकीनन लाभ मिलने वाला है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग सिर्फ एक वेट लॉस डाइट नहीं है, बल्कि यह आपके लाइफस्टाइल को भी बदलती है, जिससे आपको पीसीओडी को मैनेज करना काफी आसान हो जाता है। इस बात में कोई दोराय नहीं है कि पीसीओडी में इंटरमिटेंट फास्टिंग गेम-चेंजर साबित हो सकती है, लेकिन इसे फॉलो करते समय आपको कुछ छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखना होता है। तो चलिए आज इस लेख में सेंट्रल गवर्नमेंट हॉस्पिटल के ईएसआईसी अस्पताल की डाइटीशियन रितु पुरी आपको कुछ ऐसे ही टिप्स के बारे में बता रही हैं-
धीरे-धीरे करें शुरुआत
अगर आप इंटरमिटेंट फास्टिंग कर रही हैं तो ऐसे में एकदम से 16:8 फॉलो करना शुरू ना करें। इससे आपकी बॉडी स्ट्रेस में आ जाती है, जिससे कोर्टिसोल बढ़ सकता है। यह पीसीओडी में आपकी समस्या को और बढ़ा सकता है। इसलिए, पहले 12:12 से शुरू करो। फिर धीरे-धीरे 14:10 पर आओ और जब आपको कंफर्टेबल लगे, तभी आप 16:8 पर स्विच करें।
हेल्दी फैट्स को ना करें नजरअंदाज
इंटरमिटेंट फास्टिंग करते हुए आप क्या खा रही हैं, यह बहुत अधिक मायने रखता है। आपको अपनी डाइट में हेल्दी फैट्स को जरूर शामिल करना चाहिए, क्योंकि इससे हार्मोन को बैलेंस करने में मदद मिलती है। साथ ही साथ, इससे फास्टिंग पीरियड्स में आपको लो एनर्जी की शिकायत नहीं होती है। इसलिए, अपनी डाइट में मेवे, सीड्स या एक चम्मच घी को ज़रूर शामिल करें।
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यह है एक्सपर्ट की राय
पहला मील समझदारी से लें
जब आप लंबे समय तक फास्टिंग करती हैं तो उसके बाद क्या खाती हैं, यह बहुत अधिक मायने रखता है। जब आप फास्टिंग ब्रेक कर रही हैं तो चाय-बिस्कुट या पराठा खाने से बचें। इसकी जगह आपका पहला मील प्रोटीन व फाइबर रिच होना चाहिए। बेहतर होगा कि आप उबले अंडे, पनीर या मूंग चीला आदि खाएं। ध्यान रखें कि अगर आपका मील कार्ब्स रिच होगा तो शुगर स्पाइक होने की वजह से फैट जमा होने की संभावना बढ़ जाएगी। वहीं, प्रोटीन व फाइबर रिच फूड शुगर को स्टेबल रखने के साथ-साथ क्रेविंग कम होती है।
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मिताली जैन
Image Credit- freepik
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