सुपर मार्केट और स्टोरेज की आधुनिक तकनीक के कारण सभी कच्चे फूड्स साल भर उपलब्ध रहते हैं। लगातार सभी तरह की फूड्स की उपलब्धता के कारण हम मौसमी फूड्स का महत्व भूलने लगी हैं। अगर हम मौसम के अनुसार फूड्स को खाते हैं तो इसके अपने फायदे होते हैं। सर्दियों में खाए जाने वाले फल और सब्जियां स्वाद में अच्छी लगती है। उनका स्वाद जबरदस्त होता है और वह पौष्टिकता के लिहाज से बेहतर होती है। जब कोई उत्पाद प्राकृतिक ढंग से पकता है तो उसके पोषक तत्व और एंटी ऑक्सिडेंट्स संरक्षित रहते हैं। अगर इन्हें पकने से पहले ही कृत्रिम ढंग से पकाया जाता है तो पोषक तत्व कुछ दिन के भीतर ही नष्ट हो जाते हैं।

सर्दियों का मौसम अपने साथ सांस लेने में परेशानी भी लाता है। इससे बॉडी की इम्‍यूनिटी भी कम होती है। सर्दियों में आमतौर पर वजन बढ़ता है क्योंकि भूख ज्यादा लगती है और इन दिनों फिजीकल एक्टिविटी बेहद कम होता है और हम लगातार कुछ न कुछ खाती रहती हैं, जिससे भोजन धीरे-धीरे पचता है। आपको सर्दियों में मौसमी फूड्स को आजमाना चाहिए। सर्दियों में मौसमी फूड्स ताजगी से भरपूर रहते है, जिससे उनमें पाए जाने वाले विटामिन, मिनरल और फाइटो-केमिकल अपने ताजे रूप में मौजूद रहते हैं। पौष्टिकता से भरपूर सर्दियों में खाए जाने वाले फूड्स बीमारी को दूर रखने में हेल्‍प करते है और इससे एक खास लेवल की फिटनेस हमें मिलती है

अनाज और दानेदार फूड्स
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सर्दियों में मक्के की रोटी खाइए क्योंकि इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट एनर्जी प्रदान करते हैं, जिससे पूरे दिन हम एक्टिव रहते है। यह सर्दियों में बहुत जरूरी है क्योंकि सर्दियों में हम बहुत जल्दी सुस्ती महसूस करते हैं। मक्के की रोटी में मौजूद फाइबर हमारे आंतों की कार्यप्रणाली रेगलुर करता है, भोजन को धीरे-धीरे पचाता है, जिससे ब्लड शुगर और ब्लड कोलेस्ट्रोल स्थिर रखने में मदद मिलती है। खाने में प्रयोग किया जाने वाला फाइबर बॉडी में एक्‍सट्रा फैट कम करके वजन घटाता है और इससे पेट भरा हुआ महसूस होता है।

आप राजगीरा भी खा सकती हैं, जिससे कार्बोडाइड्रेट और प्रोटीन दोनों मिलता है, जिसे पचाने के लिए और एनर्जी की जरूरत पड़ती है, जिससे शरीर में ज्यादा गर्मी पैदा होती है और हमारी पाचन क्रिया में सुधार आता है। राजगीरा के स्वास्थ्य संबंधी लाभ का श्रेय उच्च मात्रा में कैल्शियम मौजूद होने को भी दिया जाता है, जो हड्डी का घनत्व बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। इससे ओस्टियोपोरोसिस का खतरा भी कम होता है। इसमें संपूर्ण हेल्‍थ के लिए जरूरी मैगनिशियम, फास्फोरस, पौटेशियम और सोलिनियम मौजूद रहते हैं। इसमें आयरन तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद रहता है। यह होमोग्लोबिन के लेवल को बढ़ाने में भी मदद करता है।

राजगीरा में भरपूर मात्रा में लाइसिन भी मौजूद रहता है। यह एक जरूरी एमिनो एसिड है, जिसका निर्माण हमारी बॉडी नहीं कर पाती है। लाइसिन बेचैनी को कम करता है। त्वचा और बालों की सेहत को निखारता है। यह बॉडी में कैल्शियम पहुंचाने, आंतों की अच्छी हेल्‍थ और फैट से युक्त फूड्स को पचाने में मदद करता है। किसी भी अन्य अनाज के मुकाबले इसमें फैट भरपूर रहता है। इसमें से कई फैट्स अच्छे फैट्स होते हैं, जो शरीर को आवश्यक गर्मी प्रदान करते हैं। ओट्स खाने के लिए सर्दियों का समय काफी परफेक्ट है क्योंकि शरीर को तत्काल गर्मी मिलती है और हमारी भूख भी शांत हो जाती है। इसमें पाया जाने वाला घुलनशील फाइबर  वजन के प्रबंधन के अलावा इम्‍यूनिटी को सुधारने में हमारी मदद करता है।

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नट्स और तिलहन
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नट्स और तिलहन छोटे-छोटे डोज में एनर्जी प्रदान कर हमें चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने में मदद करते हैं। बादाम और अखरोट फास्फोरस, मैग्नीशियम, कैल्शियम और पोटेशियम के अच्छे स्रोत है। बादाम में मौजूद विटामिन ई और फ्लेवोनॉयड्स त्वचा को पोषण प्रदान करते है। इससे जल्दी बुढ़ापा नहीं आता। ये दिल, हड्डियों, आंख और दिमाग की सेहत को सुधारते हैं। अखरोट में मौजूद विटामिन बी-7 हमारी स्किन, हाथों के नाखूनों और बालों को हेल्‍दी रखता है। तिल, अलसी और जवास प्रोटीन, अच्छे फैट्स, आयरन, खाने में फाइबर, जिंक, सेलिनियम, मैग्निशियम, फास्फोरस, पोटैशियम और कैल्शियम मुहैया कराते है। अलसी, जवास और अखरोट में मौजूद ओमेगा 3 फैट्स में दिल की बीमारी, डायबिटीज, आर्थराइटिस और कैंसर से लोगों को बचाने और इसके इलाज की क्षमता है।

ये आवश्यक फैटी एसिड ट्रिगलीसेराइड के लेवल में कमी लाते है। ब्लड प्रेशर कंट्रोल करते हैं और इम्‍यूनिटी को बढ़ावा देते हैं। यह खराब मूड को ठीक करते हैं। व्यवहार अच्छा रखते हैं और इससे एकाग्रता में बढ़ोतरी होती है। सेलेनियम और जिंक वायरल संक्रमण से अपने आप को बचाते हैं। डेढ़ या एक चम्मच भुने हुए अलसी और तिल के बीज और मुट्ठी भर बादाम और अखरोट आप अनाज, दही, सलाद. स्नैक्स, सूप, बेक्ड फूड और अन्य खाद्य पदार्थों में मिला सकते हैं।

मसाले
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एंटी ऑक्सीडेंट, जिसे जिंजरओल्स कहा जाता है, कि कारण अदरक हमारी बॉडी को गर्म रख सकता है। जिंजरओल्स गर्म होने पर जिंजरओन में बदल जाता है, जो सेल्‍स का मोटापा घटाने में मदद करता है। यह डिहाइड्रेशन होने पर शोगाओल्स में बदल जाता है। सूखी अदरक ताजा अदरक से दुगुनी मसालेदार होती है और इसमें ज्यादा गर्मी होती है।

अगर आप अत्यधिक हेल्‍थ बेनिफिट्स हासिल करना चाहते हैं तो हल्दी और कालीमिर्च बेहतरीन कॉम्बिनेशन है। ये दोनों मसाले मिलकर आपके शरीर से कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करने में आपकी मदद करती है। लीवर को हानिकारक  विषाक्त पदार्थों से बचाते हैं। जोड़ों के दर्द या शरीर के किसी हिस्से के सख्त होने से मुक्ति दिलाते है और डायबिटीज को नियंत्रण में रखते हैं, जिससे मोटापे और कैंसर के रोग से व्यक्ति का बचाव होता है।

आप सर्दियों में अजवाइन, दालचीनी, जायफल और लौंग का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो मिनरल देने वाला बेहतरीन स्रोत हैं। इससे भोजन को पचाने में भी मदद मिलती है। इन मसालों की गंध काफी तेज होती है। इसमें कई एंटी ऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो शरीर की पाचन क्रिया को बढ़ाते हैं और गर्मी पैदा करते है। गर्म पेय पदार्थों में इन मसालों को अगर हल्का सा डाल दिया जाए तो यह शरीर की पाचन क्रिया को बढ़ाते हैं और प्रतिरक्षक तंत्र को मजबूत बनाते हैं। आप भी और ज्यादा क्रिएटिव होकर तरह-तरह के खाद्य पदार्थों में अपने तरीके से इन सुगंधित मसालों को डाल सकते हैं।

फल और सब्जियां
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सर्दियों की मौसमी फलों और सब्जियों में सूक्ष्म पोषक तत्व और फाइटोकेमिकल पदार्थ होते हैं, जो शरीर के हिस्से में हुई सूजन को ठीक करने, तनाव और बीमारियों को दूर रखने में मदद करती है। आप ऐसी सब्जियों का चुनाव कर सकते है, जिसमें सल्फर होता है, जैसे ब्रोकोली, पत्ता गोभी, फूल गोभी, मूली, शलगम। ये सब्जियां शरीर में ग्लूटाथियोम बनाने में हमारी मदद करती है। यह एक ताकतवर एंटी ऑक्सिडेंट है और यह लीवर को हानिकारक पदार्थों से बचाए रखने में मदद करता है। गाजर और हरे प्याज से आप बीटा कोरेटीन हासिल कर सकते हैं, जिससे इंफेक्‍शन से लड़ने वाली सेल्‍स की संख्या बढ़ती है। ये सभी एंटी-ऑक्सिडेंट्स हानिकारक पदार्थों को कम करते हैं और लीवर से फैट कम करते हैं। एक बार लीवर से हानिकारक पदार्थों के दूर हो जाने के बाद हमारी बॉडी ब्लड कोलेस्ट्रोल लेवल को निश्चित लेवल तक बनाए रखने में हमारी हेल्‍प करते हैं। 

विटामिन सी और पोटेशियम के लाभ को एक साथ हासिल करने के लिए आप अमरूद (पेरू), आंवला, संतरा, चकोतरा, सीताफल, अनार, कलरख या आमरख, स्ट्रॉबेरी, फूलगोभी, पत्ता गोभी, चौलाई का साग, मेथी, बीत पत्ता, सरसों का साग,बथुआ, मूली का पत्ता, हरापत्ता, गाजर, चुकुंदर, मूली, मटर, लीची, वाल पापड़ी, सेम की फली, सिंघाड़ा और ब्रकोली प्रयोग कर सकते हैं। विटामिन सी, जो एक मजबूत एंटी ऑक्सिडेंट है, शरीर को वाइट ब्लड सेल्स को संश्लेषित करने में सक्षम बनाता है, जिससे संक्रमण से निजात पाने में मदद मिलती है। यह सर्दी, खांसी, जुकाम की अवधि को कम करता है और सर्दी के प्रभाव से बचाता है। इससे सांस लेने में दिक्कत नहीं होती। यह सांस लेने से जुड़े संक्रमण को नष्ट करता है। यह हड्डियों और मांसपोशियों में कोलोजन बनाता है। इससे घाव बहुत जल्दी ठीक होते हैं और दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं। अगर किसी का शुगर लेवल ज्यादा है तो उसे एक दिन में 200 या 250 ग्राम फल ही खाने चाहिए।

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पोटैशियम, फोलेट और मैग्नीशियम हमारे ब्लडप्रेशर को कंट्रोल रखने वाले प्रमुख पोषक तत्व होते हैं और इससे हमारा हार्ट भी सुरक्षित रहता है। मूली के पत्ते का चयन कर आप प्रचुर मात्रा में सेलेनियम हासिल कर सकती है। इसके अलावा चौलाई के साग, मथ या बीत पत्ता से आपको प्रचुर मात्रा में मैग्नीशियम और सेलिनियम मिलते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों, मटर, वाल पापड़ी या सेम की फली  बायोटिन (विटामिन बी-7) और फोलेट होते हैं। फोलेट की कमी से लगातार आदमी बीमार रह सकता है। उसका प्रतिरोधी तंत्र कमजोर हो सकता है। उसका एनर्जी लेवल कम हो सकरता है। खाना पचने का सिस्टम खराब हो सकता है। त्वचा पीली पड़ सकती है और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है।  मटर में मौजूद कोलीन लीवर और दिमाग की सेहत के लिए बहुत जरूरी है। सभी गहरी हरी पत्तेदार सब्जियों से आप कैल्शियम प्राप्त कर सकते है, जो आपके जोड़ों की सेहत के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। इससे जोड़ों में लचीलापन आता है और हडिड्यों की सेहत भी सुधरती है।



विटामिन के को ब्लड क्लॉटिंग विटामिन के नाम से भी जाना जाता है। यह हरी पत्तेदार सब्जियों में मौजूद रहता है, जो हड्डियों की सेहत के लिए लाभदायक है। अगर यह विटामिन शरीर में कम हो जाता है तो हड्डियां टूट सकती हैं। पत्तेदार सब्जियों में थाइलाक्वाइड्स होती है, जो भोजन करने से तृप्ति के अनुभव को बढ़ाता है। भूख और स्वादिष्ट भोजन के प्रति हमारे आकर्षण को कम करता है। अध्ययन में पाया गया है कि थाइलाकॉड्स से भरपूर खाद्य पदार्थों के सेवन से  रक्त से संतुष्टि प्रदान करने वाले हारमोन्स जारी होते हैं। यह भूख को मिटाने या दबाने का काम करते हैं। इससे वसा युक्त खाद्य पदार्थों के पचने में कम समय लगता है। भूख को मिटाने वाले हारमोन्स का लेवल बढ़ाते हैं। सर्दियों में अक्सर खाई जाने वाली मिठाइयों, नमकीन और मीठे, मगर शरीर में फैट बढ़ने वाले पदार्थों को लेने की इच्छा कम होती है। सर्दियों के मौसम  हरी पत्तेदार सब्जियां नियमित रूप से खाने से वजन कम रख सकते हैं।
यह आर्टिकल मिस स्वाति भूषण, चीफ क्लिनिकल न्यूाट्रीशनिस्टन, हीरानंदानी हॉस्पिटल, वाशी ए फोर्टिस नेटवर्क हॉस्पिटल से बातचीत पर आधारित है।

  • Pooja Sinha
  • Her Zindagi Editorial