कई बार हमारे सामने ऐसी इमारतें आ जाती हैं जो ऐतिहासिक न होते हुए भी बहुत खूबसूरत और अलग लगती हैं और यही कारण है कि उदयपुर के लेक पिचोला पर खड़ा ताज लेक पैलेस होटल आकर्षण का केंद्र बना रहता है। ये राजा-महाराजाओं के जमाने से ही मौजूद है और इस खूबसूरत महल को अब होटल बना दिया गया है। ये होटल कुछ खास इसलिए है क्योंकि इसकी लोकेशन तालाब के बीचों-बीच है और कई टूरिस्ट्स इस होटल को देखने आते हैं।

अगर कोई इस होटल में न भी रहना चाहे तो भी सिर्फ इसे देखने के लिए ही बोट राइड्स को अरेंज किया जाता है। ताज लेक पैलेस होटल असल में उदयपुर का जल महल है जिसे 18वीं सदी में बनाया गया था। 

65 कमरों से सजा हुआ है ये भव्य होटल-

ताज लेक पैलेस होटल 65 कमरों और 18 ग्रैंड स्वीट्स के साथ लेक पिचोला पर खड़ा हुआ है। यहां पर आपको 18वीं सदी का आर्किटेक्चर मिलेगा और कई सारे इंस्टाग्राम पिक्चर परफेक्ट स्पॉट्स भी दिखेंगे।

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किसने बनाया था ये महल?

ताज लेक पैलेस होटल असल में उदयपुर की शान जल महल हुआ करता था जिसे 1746 में महाराजा जगत सिंह द्वितीय ने बनाया था। इसे खासतौर पर लेक पिचोला पर बनाया गया था जो जगह खूबसूरत नज़ारों से घिरी हुई थी। आपको बताते चलें कि लेक पिचोला आर्टिफीशियल लेक है जिसे 1362 में बंजारा जनजाति के सदस्य पिच्चू बंजारा ने बनाया था। 

महाराणा लाखा के राज में पिच्चू अनाज को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम किया करता था। इसी दौरान उसने इस तालाब को बनाया जिसके बाद लेक पिचोला नाम से इसे जाना जाने लगा। 

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ताज लेक पैलेस के बारे में कुछ खास बातें-

ताज लेक पैलेस में मार्बल से बना हुआ है और आप नाव के जरिए ही यहां तक पहुंच सकते हैं। उदयपुर के सिटी पैलेस के पास से आपको लेक पिचोला जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट मिल जाएंगे और ताज पैलेस देखने के लिए आपको लकड़ी की नाव पर चलना होगा। 

क्या है इस महल के बनने की कहानी?

एक कहानी जो इस महल के बारे में कही जाती है वो ये है कि जब महाराजा जगत सिंह (1709-1751) में अपने पिता महाराणा संग्राम सिंह के पास एक फरियाद लेकर पहुंचे थे कि उन्हें उनकी महिला मित्रों के साथ उदयपुर के ही एक और लेक के बीच में बनाए गए महल जगमंदिर में रहने दिया जाए तो महाराणा ने मना कर दिया था। साथ ही साथ उन्होंने ये भी कहा था कि अगर राजकुमार को ऐसे काम के लिए किसी आइलैंड जैसी जगह पर रहना है तो वो खुद के लिए ही क्यों नहीं एक महल बना लेते। ये ताना जगत सिंह को चुभ गया और उन्होंने पिचोला लेक पर ये महल बना लिया। 

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1955 तक महाराणा परिवार के सदस्यों के लिए ये गर्मियों की आरामगाह हुआ करता था और 1959 में इसे होटल बनाने का काम शुरू हुआ। 

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इस महल के अंदर है एक शानदार स्वीट- 

इस महल के अंदर एक और महल है। असल में इस होटल के एक स्वीट का नाम है मयूर महल जो यहां के सबसे खूबसूरत कमरों में से एक है। इस स्वीट के अंदर एक एंट्रेंस हॉल है, सिटिंग एरिया है, एक बड़ा बेडरूम है, टॉयलेट क्यूबिकल्स हैं। मार्बल फ्लोर और राजस्थानी आर्ट से सजा ये महल अलग-अलग तरह से मोर की डिजाइन्स से भरा हुआ है और शीश महल जैसा लुक देता है जहां बहुत सारे कांच के आर्टिफैक्ट्स और खिड़कियां हैं।  

इस होटल में हर वो सुविधा है जो सभी 5 स्टार होटलों में होती है। यहां आने वाले मेहमानों को बहुत ज्यादा सुविधाएं दी जाती हैं और यहां का स्टाफ उन्हें राजा-महाराजा की तरह ही ट्रीट करता है। 

 

यहां हुई है कई सारी फिल्मों की शूटिंग- 

ताज लेक पैलेस होटल में कई फिल्मों की शूटिंग हुई है। जेम्स बॉन्ड की फिल्म 'Octopussy' के साथ-साथ कई हिंदी फिल्में जैसे 'धड़क, ये जवानी है दीवानी, मिर्जिया, गोलियों की रासलीला राम-लीला, धमाल' आदि की शूटिंग इस होटल में हुई है। ये होटल वाकई तारीफ के काबिल है और बहुत ही यूनीक है।  

हालांकि, इसे देखने के लिए हमेशा आपको नाव से जाना होगा, लेकिन अगर आप इसके अंदर जाना चाहें तो वो सिर्फ गेस्ट्स के लिए ही उपलब्ध है।  

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