सिंधुदुर्ग किला: अरब सागर के टापू पर मौजूद एक ऐतिहासिक फोर्ट

प्राचीन काल से लेकर मध्यकाल तक भारत में कुछ ऐसे फोर्ट्स, पैलेस, भवन और स्मारक आदि के निर्माण हुए, जो आज भी भारतीय इतिहास में बेहद ही खास माने जाते हैं। राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में आज भी प्राचीन और मध्यकाल के हजारों फोर्ट्स मौजूद हैं, जहां घूमने और उस फोर्ट को देखने के लिए हर महीने लाखों की संख्या में सैलानी पहुंचते हैं।
इन्हीं हजारों फोर्ट्स में से एक है सिंधुदुर्ग किला। महाराष्ट्र राज्य के मालवण में समुद्र तट पर मौजूद यानि अरब सागर के एक टापू पर मौजूद यह किला विशाल दीवारों से घिरा हुआ है। कई ऐतिहासिक तथ्यों के लिए प्रसिद्ध यह फोर्ट महाराष्ट्र के इतिहास में भी बेहद खास मायने रखता है। समुद्र के किनारे होने के चलते सिंधुदुर्ग किला मनमोहक नज़ारा भी प्रस्तुत करता है। इस लेख में हम आपको इस फोर्ट के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं और यहां मौजूद आसपास घूमने की जगहों के बारे में भी, तो आइए जानते हैं।
सिंधुदुर्ग फोर्ट का इतिहास

महाराष्ट्र के साथ-साथ मराठा शक्ति के लिए भी सिंधुदुर्ग फोर्ट बेहद ही खास रहा है। जब इस किला के इतिहास के पन्नों को पलटकर देखते हैं, तो यह ज्ञात होता है कि इसका निर्माण छत्रपति शिवाजी द्वारा लगभग 1664 के आसपास किया गया था। इतिहास के पन्नों में कई जगह यह उल्लेख है कि इसका निर्माण उस समय अंग्रेज, डच, फ्रेंच और पुर्तगाली व्यापारियों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए समुद्र किनारे इसका निर्माण किया गया था क्योंकि, उस समय ज्यादातर व्यापार समुद्र के रास्ते से ही किया जाता था।
किला निर्माण होने के बाद कुछ सालों तक मराठा शक्ति ने इसपर राज किया। यह फोर्ट लगभग 1765 तक मराठा शक्ति के अधीन था लेकिन, लगभग 1792 ब्रिटिश संधि के अनुसार यह फोर्ट ब्रिटिश शासन के अधीन चला गया।
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सिंधुदुर्ग फोर्ट की वास्तुकला

समुद्र किनारे होने के चलते इस किले की वास्तुकला भी बेहद मायने रखती थी। कहा जाता है कि उस समय इस किले को बनाने के लिए मुख्य सामग्री गुजरात के लाई गई रेत थी। लगभग 48 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ यह किला लगभग 3 किलोमीटर लंबा है। हालांकि, आज कई दीवार और भवन खंडहर के रूप में तब्दील हो चुके हैं लेकिन, दीवार की बनावट इस कदर विशाल मानी जाती थी कि कोई भी इसे आसानी से तोड़ नहीं सकता था। सिंधुदुर्ग किले की दीवारें लगभग 30 फीट ऊंची और 12 फीट मोटी मानी जाती है।(महाराष्ट्र के बेहतरीन हिल स्टेशन)
सिंधुदुर्ग फोर्ट घूमने का समय और टिकट की कीमत

वैसे तो यहां हर समय सैलानी घूमने के लिए जाते रहते हैं लेकिन, सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फ़रवरी तक का माना जाता है। क्योंकि, इस समय मौसम सुहावना होता है। खासकर सर्दियों के मौसम को सबसे अच्छा समय माना जाता है। जुलाई से सितंबर के महीने में अधिक बारिश होने की वजह यह जगह घूमने के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती है। सिंधुदुर्ग फोर्ट में आप सुबह 8 बजे से लेकर शाम 6 बजे के बीच कभी भी घूमने के लिए जा सकते हैं। इस फोर्ट में घूमने के लिए कोई भी प्रवेश शुल्क नहीं है।
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आसपास घूमने की जगह

ऐसा नहीं है कि मालवण में मौजूद सिंधुदुर्ग फोर्ट के अलावा कुछ बेहतरीन जगह घूमने के लिए नहीं है। समुद्र किनारे होने के चलते यहां हजारों पर्यटक आते हैं। मालवण में मौजूद रॉक गार्डन, खूबसूरत वेंगुर्ला बीच, मालवन समुद्री अभयारण्य और श्री देवी सातेरी जैसी कई बेहतरीन जगहों पर घूमने के लिए आप जा सकते हैं। इसके अलावा आप बीच पर मछली पकड़े का भी लुत्फ़ उठा सकते हैं। (मध्य प्रदेश के 10 फेमस फोर्ट)
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