एक कप कॉफ़ी मिल जाती, तो दिन बन जाता है। मिल तो जाएगी लेकिन, उससे पहले एक सवाल है आपके लिए। जी बोलिए, क्या आप बता सकते हैं कि कॉफ़ी की खेती सबसे पहले की जगह हुई थी? या फिर आप ये बता सकते हैं कि किस देश में सबसे पहले लोगों के कॉफ़ी पीना स्टार्ट किया था? यार! ये सब तो नहीं मालूम, बस पीना आता है। खैर, इस सवाल-जवाब को पूर्णविराम देते हैं। विदेश ही नहीं बल्कि भारतीय लोग भी कॉफ़ी को बड़े भी प्रेम के साथ पीना पसंद करते हैं। कोई सिंपल, कोई कोल्ड तो कोई अन्य कॉफ़ी पीना पसंद करते हैं। दक्षिण भारत को तो कॉफ़ी का घर भी कहा जाता है लेकिन, इसके इतिहास के बारे में बहुत कम ही लोगों की जानकारी होगी। इसलिए आज इस लेख में हम आपको कॉफ़ी के दिलचस्प इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं, तो आइए जानते हैं।
कॉफ़ी का इतिहास
कॉफ़ी के इतिहास की बात की जाए तो लगभग सभी लोग अलग-अलग तर्क देते हैं। कई लोगों का माना है कि कॉफ़ी अफ्रीका, वियतनाम, इंडोनेशिया और अमेरिका जैसे देशों में प्राचीन काल से ही लोग पसंद करते थे। एक तर्क के अनुसार यूरोप में 16वीं शताब्दी और 17वीं के बीच कॉफ़ी काफी मशहूर थी। वहीं एक अन्य तर्क के अनुसार कॉफ़ी की सबसे पहले शुरुआत 850 ईस्वी के आसपास इथियोपिया देश में हुई थी। मुख्य रूप से लाल सागर के दक्षिण छोर पर मौजूद इथियोपिया को जन्मस्थल के रूप में जाना जाता है।
जब परिंदे ने कॉफ़ी की फलियां खाई
जी हां, कॉफ़ी और एक परिंदे से संबंधित कहानी भी बेहद प्रचलित है। दरअसल, कहा जाता है कि इथियोपिया का एक व्यक्ति किसी जंगल में सफ़र कर रहा था तभी देखा कि कुछ परिंदे एक पेड़ पर बैठकर फलियां खा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने देखा कि फलियां खाने के बाद परिंदे में अलग-अलग का बदलाव हो रहा है। जब उस व्यक्ति ने कॉफ़ी की फलियां को तोड़कर टेस्ट किया तो उसे ये चीज बहुत अच्छी लगी और खाने से उनको उर्जा महसूस हुई। इसके बाद इसे कॉफ़ी के रूप में जाने जाना लगा।(फ्रेंच फ्राइज का इतिहास)
जब कॉफ़ी 'कहवा' के नाम से प्रचलित थी
जी हां, कॉफ़ी को लेकर एक अन्य दिलचस्प इतिहास यह है कि इसे पहले लोग 'कहवा' के नाम से जानते थे। शुरुआत में यमन के लोग इसे इसी नाम से जानते थे। बाद में इसे कॉफ़ी और कैफे बोला जाने लगा। इधर मक्का और इस्तांबुल जैसे देशों में कॉफ़ी के नाम से ही जानते थे। इधर एक अन्य कहानी ये है कि लगभग 1511 के आसपास में मक्का के इमामों ने कॉफी को पीने से मना कर दिया था, उन्होंने सोचा कि शायद इसमें शराब जैसी कुछ चीज होती है। इसी समय टर्किश कॉफी भी बेहद फेमस हुई थी।
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18वीं और 19वीं शताब्दी में कॉफ़ी
हालांकि, भारत में विदेशी लोगों का आना जाना 16वीं शताब्दी से ही शुरू था लेकिन, कॉफ़ी को 17वीं और 18वीं शताब्दी में पहचान मिली। कुछ वर्षों बाद यह मालूम चला कि दक्षिण भारत में इसकी खेती बड़े पैमाने पर होती है। 18वीं और 19वीं आते-आते दक्षिण भारत से लेकर समूचे भारत में कॉफ़ी प्रसिद्ध हो गई। एक अनुमान के मुताबिक भारत में कॉफ़ी का उत्पादन दुनिया के मुकाबले लगभग 7 से 8 प्रतिशत दक्षिण भारत में ही होती है।
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