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लोहे के पुराने यमुना ब्रिज से जुड़े ये फैक्ट्स नहीं जानते होंगे आप

आप यकीनन कई बार यमुना के पुल से गुजरे होंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि इसका इतिहास क्या है? इस पुल को बनाने का ख्याल सबसे पहले किसके आया था? आइए विस्तार से जानते हैं इंटरेस्टिंग फैक्ट्स।&nbsp; <div>&nbsp;</div>
Updated:- 2023-05-17, 18:00 IST
old yamuna bridge in delhi in hindi

यमुना नदी उत्तर भारत की प्रमुख नदी है यह मुख्यतः उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश राज्यों में बहती है। गंगा नदी के साथ यह भी देश की सबसे पवित्र नदियों में से एक है। यमुना नदी को जमुना नदी के नाम से भी जाना जाता है। भारत की राजधानी दिल्ली को चारों तरफ से घेरे हुए यमुना नदी न सिर्फ दिल्ली बल्कि पूरे देश के कोने-कोने में रची बसी है।

यमुना का उद्गम स्थान पश्चिमी उत्तराखंड में यमुनोत्री के पास महान हिमालय में बंदर पंच मासिफ की ढलानों से होता है। पूर्वी और पश्चिमी नहरों को भी यमुना के जल से सींचा जाता है। वहीं, एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए बना यातायात का साधन लोहे का पुल है। यह दिल्ली का सबसे पुराने पुल में से एक है, जिसे अंग्रेजों के जमाने में बनाया गया था। तो चलिए इससे जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में जानते हैं।

क्या है इतिहास?

interesting facts about old yamuna bridge

इस पुल का निर्माण दिल्ली को कोलकाता से जोड़ने के लिए किया गया था। इसे अंग्रेजी हुकूमत ने ईस्ट इंडिया रेलवे द्वारा वर्ष 1866 में 16,16,335 पौंड की लागत से इस पुल को बनवाया था। इस समय एक पौंड की कीमत 90.13 रुपया है।

इस हिसाब से इसकी लागत भारतीय मुद्रा में करीब साढ़े 14 करोड़ रुपये होगी। उस समय सिर्फ एक लाइन बनी थी। इसके बाद 1913 में 14,24,900 पौंड मूल्य की लागत से दूसरी लाइन बनाई गई। इसमें 202.5 फीट के 12 स्पैन तथा अंतिम दो स्पैन 34.5 फीट के हैं। इसकी लंबाई 700 मीटर है।

इसकी क्षमता बढ़ाने के लिए कंपनी लिमिटेड ने वर्ष 1933-34 में 23,31,396 पौंड की लागत से इस पुल के स्टील गार्डर को बदला था। पुल का ढांचा ब्रिटेन में तैयार करने के बाद इसे यहां लाकर स्थापित किया गया था।

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क्या है खासियत?

old yamuna bridge

इस पुल का डिजाइन यमुना नदीमें आने वाली बाढ़ को ध्यान में रखकर तैयार की गई थी। उस समय खतरे के निशान का स्तर 672 फीट माना गया था। इसमें कुल 11 पिलर हैं तथा इन सभी के फाउंडेशन का स्तर अलग-अलग है। सबसे निचला फाउंडेशन 615 फीट पर है।

कितनी रफ्तार से गुजरती है ट्रेन?

पुराना होने के कारण इस पुल से ईएमयू 15 किलोमीटर प्रति घंटे, मेल व एक्सप्रेस ट्रेनें 20 किलोमीटर प्रति घंटे और मालगाड़ी 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरती है। दिल्ली के मंडल रेल प्रबंधक आरएन सिंह का कहना है कि नया पुल तैयार होने के बाद इस पुल को विरासत के रूप में संरक्षित किया जाएगा।

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3500 टन लगा है लोहा

Old iron yamuna bridge

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस पुल में कुल 3500 टन लोहा लगा हुआ है। हालांकि, साल 2011-12 में पुल का लगभग 240 टन लोहा बदला गया था। 11 करोड़ रुपये की लागत से इसके जर्जर हिस्से को बदलने का फिर से काम चल रहा है अब तक लगभग 900 टन लोहा बदला जा चुका है। काम पूरा होने के बाद ट्रेन की रफ्तार कम नहीं करनी पड़ेगी।

हालांकि, अब इस पुल के समानांतर दूसरा पुल बनाया जा रहा है। अगर आपको इससे जुड़े कुछ और फैक्ट मालूम है, तो हमें नीचे कमेंट करके जरूर बताएं।

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Image Credit- (@Freepik and shutterstock)

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