यमुना नदी को जमुना नदी के नाम से भी जाना जाता है। भारत की राजधानी दिल्ली को चारों तरफ से घेरे हुए यमुना नदी न सिर्फ दिल्ली बल्कि पूरे देश के कोने-कोने में रची बसी है।  यमुना नदी उत्तर भारत की प्रमुख नदी है यह मुख्यतः उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश राज्यों में बहती है। गंगा नदी के साथ यह भी  देश की सबसे पवित्र नदियों में से एक है।

यमुना का उद्गम स्थान पश्चिमी उत्तराखंड में यमुनोत्री के पास महान हिमालय में बंदर पंच मासिफ की ढलानों से होता है। यह हिमालय की तलहटी से होते हुए दक्षिण दिशा में तेजी से बहती है और उत्तराखंड से निकलकर, भारत-गंगा के मैदान में, उत्तर प्रदेश और हरियाणा राज्य के बीच की सीमा के साथ पश्चिम में बहती है। पूर्वी और पश्चिमी नहरों को भी यमुना के जल से सींचा जाता है। आइए जानें यमुना के उद्गम के साथ इससे जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में। 

कहां से होता है यमुना नदी का उद्गम 

river yamuna origin

यमुना नदी का उद्गम स्थान यमुनोत्री से है। ऐसा कहा जाता है कि यमुनोत्री दर्शन के बिना तीर्थयात्रियों की यात्रा अधूरी होती है। समानांतर बहते हुए यह नदी प्रयाग में गंगा में मिल जाती है। हिमालय पर इसके उद्गम के पास एक चोटी का नाम बन्दरपुच्छ है। गढ़वाल क्षेत्र की यह सबसे बड़ी चो़टी है यह करीब 6500 मीटर ऊंची है। अपने उद्गम स्थान से आगे बढ़कर कई मील तक विशाल हिमगारों में यह नदी बहती हुई पहाड़ी ढलानों से अत्यन्त तीव्रतापूर्वक उतरती हुई इसकी धारा दूर तक बहती चली जाती है। 

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सबसे पवित्र नदियों में से एक है यमुना 

यमुना नदी भारत की सबसे बड़ी सहायक नदी है, गंगा नदी बेसिन की दूसरी सबसे बड़ी सहायक नदी है। यमुना का उद्गम यमुनोत्री ग्लेशियर से 20955 फीट की ऊंचाई पर होता है, जो बंदरपंच में स्थित है, जो उत्तराखंड में निचले हिमालय की चोटी है। प्रयागराज में त्रिवेणी संगम में यमुना नदी गंगा नदी में विलीन हो जाती है, जो हिंदुओं के लिए एक पवित्र स्थान है। यमुना नदी का नाम भारतीय भाषा संस्कृत से लिया गया है, जिसका अर्थ है जुड़वां। हिंदू धार्मिक ग्रंथों ऋग्वेद और अथर्ववेद में यमुना नदी का उल्लेख मिलता है। यमुना नदी का संबंध हिंदू भगवान कृष्ण के जन्म से भी है। इसलिए यह भारत की सबसे पवित्र नदियों (भारत की 7 सबसे पवित्र नदियां ) में से एक मानी जाती है। 

दिल्ली से लेकर आगरा तक बहती है यमुना 

agra river yamuna

यमुना नदी दिल्ली से गुजरती है और यह आगरा शहर की खूबसूरती को भी बढ़ाती है। दिल्ली के दक्षिण में और अब पूरी तरह उत्तर प्रदेश के भीतर, यह मथुरा के पास दक्षिण-पूर्व की ओर मुड़ती है और आगरा, फिरोजाबाद और इटावा से होकर गुजरती है। इटावा के नीचे इसे कई दक्षिणी सहायक नदियां मिलती हैं, जिनमें से सबसे बड़ी चंबल, सिंध, बेतवा और केन नदियां हैं। इलाहाबाद के पास, लगभग 855 मील के एक कोर्स के बाद, यमुना नदी गंगा में मिलती है।  दो नदियों का संगम हिंदुओं के लिए एक विशेष रूप से पवित्र स्थान माना जाता है और वार्षिक उत्सवों के साथ-साथ यहां कुंभ मेला भी लगता है, जो हर 12 साल में आयोजित किया जाता है और इसमें लाखों भक्त शामिल होते हैं।

यमुना नदी का श्री कृष्ण से है गहरा नाता 

धार्मिक मान्यताओं की बात की जाए तो यमुना नदी से होकर ही कृष्ण के पिता वासुदेव ने नवजात श्री कृष्ण को एक टोकरी में रखकर मथुरा से गोकुल तक उनके पालक पिता नंदराज तक पहुंचाया था। एक धार्मिक मान्यता के अनुसार कृष्ण के बचपन के दिनों में यमुना नदी जहरीली थी, क्योंकि यमुना नदी के नीचे कालिया नाम का एक पांच सिर वाला सांप रहता था, जो नहीं चाहता था कि मनुष्य यमुना के पानी का सेवन करें। श्रीकृष्ण ने बचपन में ही जहरीली नदियों में छलांग लगा दी थी और कालिया सर्प से युद्ध कर युद्ध जीत लिया था। कृष्ण ने बाद में यमुना नदी के जहर को दूर करके इसके पानी को साफ़ और पीने योग्य बनाया था। 

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यमुना नदी में गर्म पानी का कुंड 

यमुना नदी में यमुनोत्री में एक गर्म पानी का कुंड भी है। इस कुंड को सूर्य कुंड के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि यह कुंड सूर्य देवता सूर्य की संतान को समर्पित है। सूर्य कुंड में पानी इतना गर्म होता है कि लोग इसमें चाय और चावल भी आसानी से बना सकते हैं और इस पानी का उपयोग करके आलू उबालते हैं। सूर्य कुंड के पानी का तापमान लगभग 88 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। सूर्य कुंड में तैयार चावल और आलू यमुनोत्री मंदिर में देवता को चढ़ाए जाते हैं।

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क्यों प्रदूषित होती है यमुना नदी 

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यमुना नदी उत्तराखंड के एक ग्लेशियर से निकलती है। उत्तराखंड से यह पवित्र नदी हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में बहती है। आंकड़े बताते हैं कि यह नदी अपने जन्म स्थान से  शुद्ध होकर निकलती है और आगे आते-आते प्रदूषित हो जाती है क्योंकि यह दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पहुंचती है जो इसके प्रदूष्ण का मुख्य कारण बनते हैं। हालांकि साल 1984 में, भारत सरकार ने यमुना को साफ करने का मिशन भी शुरू किया था लेकिन उसमें सफल नहीं हो सके। दिल्ली-एनसीआर में औद्योगीकरण और औद्योगिक कचरे को नदी में फेंकना प्रदूषण का प्रमुख कारण रहा है।

इस प्रकार विभिन्न तथ्यों को खुद में समेटे हुए यमुना नदी भारत की कई अन्य पवित्र नदियों में से एक है जो अपने उद्गम स्थान के साथ जहां से भी गुजरती है उन स्थानों को भी पवित्र बनाती है। 

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Image Credit: freepik and unsplash