आज भी भारत के कई प्रांतो में ऐसे कई खूबसूरत और रहस्यमय फोर्ट मौजूद है, जिसे देखने के बाद यकीन नहीं होता है कि क्या इस महल का निर्माण प्राचीन समय में संभव था। कई प्राचीन किले को देखकर ये भी लगता है कि क्या आज के समय में ऐसी इमारत का निर्माण करना संभव है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात आदि ऐसे कई राज्य है, जहां आप भी प्राचीन काल के कई महल और इमारत देखे जा सकते हैं।

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के बांदा जिले में स्थित कालिंजर फोर्ट बाहर से देखने में बेहद ही खूबसूरत है लेकिन, कहा जाता कि यह इमारत अपने अंदर कई प्राचीन राज को समेटे हुए हैं। आज भी यह फोर्ट सीना ताने खड़ा है और बहुत अधिक संख्या में सैलानी भी यहां घूमने के लिए जाते रहते हैं। इसे देश का सबसे बड़ा दुर्ग भी बोला जाता है। हम आपको उत्तर प्रदेश के साथ-साथ सम्पूर्ण भारत के सबसे प्राचीन इमारत में से एक कलिंजर फोर्ट से जुड़ें कुछ रोचक तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं। 

इतिहास के बारे में 

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कालिंजर फोर्ट का इतिहास बेहद ही रोचक है। कहा जाता है कि इस फोर्ट को सतयुग में कीर्तिनगर, त्रेतायुग में मध्यगढ़, द्वापर युग में सिंहलगढ़ के नाम से जाना जाता था, और अब इसे कालिंजर के नाम से जाना जाता है। चंदेल शासक परमादित्य देव ने बनवाया था। कहा जाता है कि चंदेल शासकों द्वारा बनवाया गया इस अद्भुत फोर्ट पर लगभग सौ साल से भी अधिक वर्षों तक राज किया और समय के साथ बाद में भी अनेक शासकों ने भी इस फोर्ट पर महला किया लेकिन, उन्हें सफलता नहीं मिली।

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कालिंजर किले की वास्तुकला 

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चंदेल वंश में निर्मिंत कालिंजर फोर्ट को वास्तुकला का एक अद्भुत उदहारण माना जाता है। कहा जाता है कि इस फोर्ट में कई भवन और मंदिर है, जो बारीक डिज़ाइन और नक्काशी की एक मिसाल है। विंध्याचल की पहाड़ी पर करीब 800 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस फोर्ट को नीचे से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि मानों कोई विशाल महल है। इस फोर्ट में स्थित ऐसे कई मंदिर है, जिसे बेहद ही पवित्र माना जाता है।

नीलकंठ महादेव मंदिर 

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इस फोर्ट के सबसे प्रमुख स्थानों में से एक है नीलकंठ महादेव मंदिर। कहा जाता है कि इस फोर्ट में जगह-जगह भगवान शिव, काल भैरव, गणेश और हनुमान की प्रतिमाएं पत्थरों पर बेहतरीन तरीके से नक्काशी की गई है। कहा जाता है कि समुद्र मंथन के बाद निकले विष को महादेव ने यहीं विष-पान किया था। इस फोर्ट के बारे ने यह भी कहा जाता है कि इस फोर्ट में सीता जी ने भी विश्राम किया किया था। कालिंजर फोर्ट में लगभग सात दरवाजे थी, जो समय के साथ टूटते चले गए। कहा जाता है इस महल का उल्लेख वेद और पुराणों में भी किया गया है।

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बीरबल का किला   

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समय के साथ इस फोर्ट पर कई हमले हुए लेकिन, किसी को भी जीत हासिल नहीं हुई। कहा जाता है कि इस महल पर कुतुबुद्दीन, महमूद गजनवी और हुमायूं ने भी आक्रमण कर किले पर राज करना चाहा लेकिन, सफल नहीं हुए। लेकिन, वर्ष 1569 के आसपास अकबर ने फिर इस महल पर महला किया और इस बार जीत अकबर को मिली। कई इतिहासकार कहते हैं कि अकबर ने इसे जीतने क बाद बीरबल को उपहार के रूप में दान का दिया। बीरबल के बाद इस महल पर कई राजाओं ने राज किया और अंत में अंग्रेजों भी इस हमाल पर राज किए लेकिन, बाद में इसे अंग्रेजों छोड़कर चले गए।

कैसे पहुंचें

आज भी कालिंजर फोर्ट घूमने के लिए हजारों सैलानी आते हैं। कहा जाता है कि सलानियों के चलते इस फोर्ट के कई हिस्सों को बंद कर दिया गया ताकि किसी भी अनहोनी को टाला जा सके हैं। यहां आप किसी भी राज्य से आसानी से पहुंच सकते हैं। बुंदेलखंड पहुंचकर आप यहां से लोकल बस या टैक्सी से जा सकते हैं। झांसी से होते हुए भी आप यहां घूमने के लिए जा सकते हैं। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर जरूर शेयर करें और इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

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