प्राचीन भारत में ऐसे कई मस्जिद, चर्च और मंदिर का निर्माण हुआ जो आज भी लाखों भक्तों के लिए किसी रहस्यमयी धार्मिक स्थल से कम नहीं है। देश में ऐसे कई मंदिर भी मौजूद है, जो भविष्य से लेकर अतीत के पन्नों के बारे में बताते हैं। यहां तक कि देश में कब मानसून दस्तक देगी और कब नहीं। जी हां, यूपी के औद्योगिक नगरी कहे जाने वाले कानपुर शहर में एक ऐसा ही मंदिर है, जो ये बताता है कि देश और उत्तर प्रदेश में कब बारिश होगी और कब नहीं। इस मंदिर की छत से यहां के पुजारी अनुमान लगते हैं कि इस साल कितनी बारिश होगी। तो आइए मंदिर के इस चमत्कारी घटनाक्रम के बारे में और भी करीब से जानते हैं।

7 से 8 दिन पहले बारिश की सूचना 

interesting facts about jagannath temple in kanpur inside

उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के भीतरगांव ब्लाक से लगभग तीस से चालीस किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है एक प्राचीन मंदिर, जिसका नाम है 'जगन्नाथ मंदिर'। इस मंदिर के बारे में बोला जाता है कि इस मंदिर की छत से टपकने वाली पानी की बूंदों से ये पता लगाया जाता है कि देश में कब और किस स्तर पर बारिश होगी। बारिश आने से 7 दिन पहले ही इस मंदिर की छत से अपने आप पानी टपकने लगता है। (मोटरसाइकिल की होती है पूजा इस मंदिर में)  बूंदें अगर अधिक गिर रही है, तो ये कहा जाता है कि इस बार बारिश अच्छी होगी और बूंदें आराम-आराम से गिरे तो बारिश कम होगी।

इसे भी पढ़ें: डोंगरगढ़ में मौजूद इस पवित्र मंदिर में दर्शन मात्र से पूरी होती है भक्तों की मुराद

जगन्नाथ मंदिर का रहस्य 

about jagannath temple in kanpur inside

इस रहस्यमयी मंदिर का निर्माण कब हुआ था इसका कोई सटीक प्रमाण किसी के पास नहीं नहीं है लेकिन, कई जानकारों का मानना है कि इस मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी से लेकर 10वीं शताब्दी के बीच हुआ होगा। कई बार पुरातत्व विभाग ने इस रहस्यमयी तथ्य को सुलझाने की कोशिश की लेकिन, कहा जाता है कि कोई भी ये सटीक जानकारी नहीं दें सका कि आखिर क्यों मानसून से पहले ही छत से पानी की बूंदें टपकने लगती है। आपको बता दें कि उड़ीसा में जगन्नाथ मंदिर जैसी रथ यात्रा निकलती है ठीक वैसे ही यहां भी रथ यात्रा निकलती है।

Recommended Video

बौद्ध स्तूप जैसा दिखता है जगन्नाथ मंदिर

jagannath temple in kanpur inside

जी हां, ये मंदिर अंदर से कुछ और बाहर से एक विशाल बौद्ध स्तूप जैसा दिखता है। लेकिन, इस मंदिर के अंदर भगवान जगन्नाथ मंदिर की मुख्य प्रतिमा है। कहा जाता है कि मूर्ति से लेकर इस मंदिर का निर्माण नागर शैली में की गई है। हालांकि, आज के समय में मंदिर का कुछ हिस्सा खंडहर में तब्दील हो गया है, लेकिन आज भी इस मंदिर में पूजा-पाठ करने के लिए हर दिन हजारों भक्त आते हैं। इस ,मंदिर की दीवारें लगभग 14 फीट मोटी है। 

इसे भी पढ़ें: वाराणसी के काल भैरव मंदिर के बारे में कितना जानती है आप, जहां प्रसाद में चढ़ती है मदिरा

पिछली बार कब टपकी थी पानी की बूंदें 

interesting facts about jagannath temple in kanpur inside

एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछली बार इस मंदिर में 26 मई से पानी का टपकना शुरू हुआ था। कई बार शहर में बारिश के चलते फसल का कोई नुकसान नहीं हो इसके लिए भी इस मंदिर में पूजा-पाठ की जाती है।जगन्नाथ मंदिर मंदिर की बूंदों से ही मानसून का आंकलन करके इस गांव के लोग फसल बुवाई की तैयारी भी करते थे। (रहस्यमयी मंदिर)

अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit:(@cdn.s3waas.gov.in,ranasafvi.com)