भारत का लगभग हर राज्य किसी न किसी देवी या फिर देवता के लिए आस्था का केंद्र ज़रूर है। उत्तराखंड, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश या फिर उड़ीसा हो। ये सभी शहर हिन्दू भक्तों के लिए किसी न किसी रूप में पवित्र स्थल है। शायद आपको मालूम हो! अगर नहीं, तो आपकी जानकारी के लिय बता दें कि हिंदुस्तान लगभग 50 हज़ार से भी अधिक पवित्र देवी-देवातयों के स्थल, मंदिर या फिर मूर्ति के लिए जाना जाता है।

आज जिस मंदिर के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं, उसे लगभग दो हज़ार से अधिक प्राचीन समझा जाता है। इस मंदिर को लेकर भक्तों की राय है कि इस मंदिर में मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर के दर्शन मात्र से पूरी हो जाती है लाखों भक्तों की मुराद। तो चलिए जानते हैं इस मंदिर के बारे में।

इतिहास और कहां है मंदिर 

maa bamleshwari temple dongargarh inside

मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास बेहद ही प्राचीन है। इस मंदिर को लेकर कोई स्पस्ट नहीं है कि कब इसका निर्माण हुआ था लेकिन, कई जानकारों का मानना है कि इस मंदिर का निर्माण लगभग 2 हज़ार साल पहले किया गया था। इसे लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण उज्जैन के राजा विक्रमादित्य द्वारा कराया गया था। हालांकि, इसका भी कोई मूल प्रमाण नहीं है। आपको बता दें कि ये मंदिर छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में है। यह मंदिर लगभग एक हज़ार से भी अधिक फीट की ऊंचाई पर मौजूद है।

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मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथायें

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मां बम्लेश्वरी देवी मंदि को लेकर कई पौराणिक कथायें हैं। लेकिन, सभी पौराणिक कथायें में से एक प्रमुख है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में राजा राजा वीरसेन संतानहीन थे। ऐसे में राजा के पुजारियों  ने सुझाव दिया कि आप माता मां बम्लेश्वरी देवी की पूजा करें। इसके बाद  राजा ने पूजा की और लगभग एक वर्ष के बाद रानी में एक संतान को जन्म दिया।  (नागराज के रूप में विराजमान है भगवान शिव) इस फल के बाद लोगों में इस मंदिर के प्रति और भी आस्था बढ़ गई है और कहा जाता है कि जो भी भक्त इस मंदिर में पूजा करने आते हैं उनकी मुराद मात्र दर्शन भर से ही पूरी हो जाती है।

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हजारों सीढ़िया चढ़ाने के बाद होती है दर्शन 

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लगभग एक हज़ार फिट से भी अधिक उंचाई में मौजूद होने के चलते इस मंदिर में माता की दर्शन के लिए लगभग एक हज़ार से भी अधिक सीढ़िया चढ़नी पड़ती है। आपको बता दें कि दशहरा और चैत्र (रामनवी के दौरान) के मसय लाखों भक्तों की भीड़ इस मंदिर में मौजूद रहती है। नवरात्र के समय यहां कई दिनों तक मेले का भी आयोजन होता है, जिसमें घूमने के लिए दूर-दूर से सैलानी आते हैं। (एशिया की सबसे ऊंची गणपति मूर्ति के बारे में)

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टाइम और आसपास घूमने की जगह 

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इस मंदिर में घूमने जाने का कोई निश्चित टाइम नहीं है। यहां घूमने के लिए कभी भी जा सकते हैं लेकिन, सबसे अच्छा टाइम टाइम नवरात्र का ही माना जाता है। इस मंदिर के आसपास घूमने के लिए कई बेहतरीन जगहें भी है। मैत्री बाग, सिविक सेंटर और तांदुला जैसी कई अन्य बेहतरीन जगहों पर भी घूमने के लिए जा सकते हैं। यहां आप सड़क, ट्रेन और हवाई मार्ग के रास्ते भी जा सकते हैं।

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