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क्या आप जानते हैं पहली बार किसने बनाई दाल मखनी, क्या है इसकी कहानी

आइए जानें आपकी थाली में स्वाद का तड़का लगाने वाली स्वादिष्ट दाल मखनी की शुरुआत कहां से हुई और कैसे यह एक प्रसिद्ध व्यंजन के रूप में सामने आई।   
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Published -07 Jun 2022, 19:35 ISTUpdated -07 Jun 2022, 19:51 IST
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dal makhni history by experthistory

जब भी लजीज खाने की बात आती है आपको दाल मखनी जरूर याद आती होगी। कभी रोटी का स्वाद बढ़ाने में तो कभी चावल का मजा दोगुना करने के लिए खाने में दाल मखनी को जरूर जोड़ा जाता है। आपकी थाली को संवारने और आपकी भूख को मिनटों में कम करने वाली ये दाल आखिर कहां से आयी, आखिर कैसे ये स्वादिष्ट दाल हमारी थाली में अपनी जगह बना पायी और कैसे इस दाल ने लोगों के स्वाद को पहचाना और खाने का एक अहम् हिस्सा बन गयी।

ऐसे कई सवाल आपके मन में भी आते होंगे और इसका जवाब आप भी जानना चाहेंगे कि आखिर कैसे इस दाल की शुरुआत हुई और इसका इतिहास क्या है। आइए मास्टरशेफ कविराज खियालानी से जानें दाल मखनी की रोचक कहानी। 

क्या है दाल मखनी 

dal makhni history and facts

दरअसल दाल मखनी एक ऐसा भारतीय व्यंजन है जो साबुत उड़द की दाल, राजमा, मक्खन और कई तरह के मसालों से तैयार किया जाता है। दाल मखनी (दाल मखनी पिज्जा रेसिपी) बनाने के लिए आपको बहुत ज्यादा धैर्य की आवश्यकता होती है क्योंकि इसकी तैयारी में थोड़ा ज्यादा समय लगता है। ये मुख्य रूप से दिल्ली और पंजाब का व्यंजन है जो अब पूरी दुनिया में अपनी जगह बना चूका है। यही नहीं दिल्ली में कई ऐसे रेस्टोरेंट भी हैं जो सिर्फ दाल मखनी के स्वाद के लिए ही जाने जाते हैं। 

दाल मखनी का इतिहास 

what is dal makhni

अगर दाल मखनी के इतिहास की बात करें तो इस दाल को पहली बार मोती महल श्रृंखला के संस्थापक कुंदन लाल गुजराल ने बनाया था। वास्तव में उन्हें इस बात का आईडिया तब मिला जब उन्होंने प्रसिद्ध मखनी ग्रेवी का आविष्कार किया। कुन्दन लाल गुजराल दिल्ली में मोती महल रेस्टोरेंट के पूर्व मालिक हैं  जिसकी दिल्ली में आज कई चेन हैं। जब दाल मखनी के इतिहास को याद किया जाता है तो सन 1950 में गुजराल दिल्ली आए और ‘दरियागंज’ में मोती महल नाम का रेस्टोरेन्ट खोला। उन्होंने ही इस स्वादिष्ट दाल को भारतीय मेन्यू में शामिल किया जो आज हमारे विशिष्ट पकवानों में से एक बन गयी है। 

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जवाहरलाल नेहरू ने चखा इस दाल का स्वाद 

इस स्वादिष्ट दाल मखनी का स्वाद भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर  जाकिर हुसैन ने भी चखा था। आज दाल मखनी का  स्वाद दुनियाभर में फैला हुआ है। भारत में आज इसकी 120 चेन्स हैं और इसके अलावा दुनिया के अलग-अलग हिस्सों पर इसका स्वाद फैला है। 

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क्या है एक्सपर्ट की राय 

दाल मखनी के स्वाद के बारे में मास्टरशेफ कविराज खियालानी का कहना है कि जब हम दाल मखनी का नाम सुनते हैं तो सबसे पहली छाप जो हमारे दिमाग में आती है, वह है उसकी क्वालिटी के साथ मिली जुली सामग्रियां। इस दाल को बनाने में इस्तेमाल किया गया स्लो कुकिंग तरीका इसे खाने के मेन्यू में सबसे खास बनाता है। 

दाल मखनी न केवल हमारी जड़ों के करीब है बल्कि हमारे दिल और प्लेटों के भी करीब है क्योंकि इसमें एक बहुत ही आकर्षक और स्वादिष्ट गुणवत्ता है। इसकी क्लासिक खाना पकाने की विधि से प्राप्त अंतिम आउटपुट न केवल स्वाद और सुगंध लाता है, बल्कि एक दूसरे का आनंद लेने के लिए एक गर्म व्यंजन को भी दिखाता है, साथ ही साथ दाल मखनी के स्वाद ने एक शादी या एक पारंपरिक समारोह में आज भी अपनी भव्य उपस्थिति और अतुलनीय परम पुरातनता को कहीं न कहीं बरकरार रखा है! 

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वास्तव में दाल मखनी का नाम सुनकर आपको भी इसका स्वाद लेने का मन जरूर हो गया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

Image Credit:freepik 

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