नॉर्थ इंडियन डिशेज में जो एक चीज नॉन-वेज लवर्स को सबसे ज्यादा पसंद है, वो बटर चिकन है। खूब सारे मक्खन और क्रीम से बने इस स्वादिष्ट व्यंजन का नाम लेते ही मुंह में पानी आ जाता है। मैरिनेटेड चिकन के पीस को जब मसालों से भरपूर थिक ग्रेवी में डाला जाता है, तो उसकी खुशबू मन को खुश कर देती है।

बटर चिकन को हिंदी में मुर्ग मक्खनी कहा जाता है। यह सबसे पॉपुलर डिशेज में से एक है, लेकिन इसे कैसे बनाया गया, इसके पीछे की क्या कहानी है? चलिए आइए जानें बटर चिकन के इतिहास के बारे में।

पेशावर में गुंदन लाल गुजराल ने था बनाया

kundan lal gujral

बटर चिकन की उत्पत्ति के पीछे तंदूरी चिकन का बड़ा हाथ है। इसकी उत्पत्ति की कहानी भारत की आजादी से जुड़ी है। दरअसल, जब पाकिस्तान और भारत का बंटवारा नहीं हुआ था, तब पेशावर में एक गोरा बाजा हुआ करता था। यहां एक छोटा सा रेस्तरां था जिसके मालिक का नाम मोखा सिंह लांबा था। इसी रेस्तरां में काम करने वाले एक नौजवान शेफ थे, जिनका नाम कुंदन लाल गुजराल था। उन्हें एक दिन दही में मैरिनेट किए हुए चिकन के टुकड़ों को काटकर तंदूर में डालने का ख्याल आया और इस तरह तंदूरी चिकन बन गया।

मिट्टी के तंदूर में पका चिकन और इसके स्मोकी फ्लेवर ने लोगों के दिलों को जीता। एक वक्त ऐसा आया जब ढाबे के मालिक मोखा सिंह की तबीयत बिगड़ने लगी और उन्होंने अपना ढाबा कुंदन लाल गुजराल को बेच दिया। कुंदन लाल गुजराल ने कुछ समय बाद नोटिस किया कि सीख में लगा तंदूरी चिकन पूरे दिन भर रहने के बाद सूख जाया करता था। उन्हें फिर एक नया आइडिया आया। उन्होंने एक बेसिक सी ग्रेवी बनाई, जिसमें उन्होंने टमाटर, मक्खन, क्रीम और कुछ मसाले डालकर तैयार किया। उन्होंने चिकन के पीस करके इस ग्रेवी में डाले और बस तभी से बटर चिकन लोगों के जीवन का टेस्टी हिस्सा बन गया।

आजादी के बाद का भारत

जब बंटवारा हुआ, तो गुजराल अपने परिवार के साथ दिल्ली आ गए और उन्हीं के साथ दिल्ली आया उनका मोती महल। शुरुआत में उन्होंने दिल्ली के दरियागंज में एक छोटा सा आउटलेट खोला था, जिसमें उनका फेमस बटर चिकन और तंदूरी चिकन शामिल थे। इस आउटलेट के कुछ ही सालों बाद रेस्तरां के कई चेन्स खोले गए। आज मोती महल पूरी दुनिया में अपने टेस्टी बटर चिकन के लिए जाना जाता है।

मशहूर हस्तियां भी ले चुकी हैं बटर चिकन का आनंद

kundan lal gujral butter chicken history

इसकी स्वादिष्ट रेसिपी के पीछे का कारण है, इसका टैंगी टोमैटो और टेक्सचर का सही कॉम्बिनेशन। यही चीज गुजराल ने एकदम सही पकड़ी। कमाल की बात यह है कि जब कुंदन लाल गुजराल की यह रेसिपी सुपरहिट हुई, तो उन्होंने इसी से प्रेरित होकर दाल मक्खनी भी बनाई। 1950 में गुजराल का मोती महल जाकिर हुसैन, जवाहर लाल नेहरू, रिचर्ड निक्सन और जॉन एफ कैनेडी सहित मशहूर हस्तियों और विश्व नेताओं के बीच बेहद लोकप्रिय था।

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स्वतंत्रता सेनानी और स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री, मौलाना आज़ाद ने कथित तौर पर ईरान के शाह, मोहम्मद रज़ा पहलवी से भी कहा था कि भारत में उन्हें दो बार यात्रा करनी होगी - आगरा में ताजमहल और दिल्ली में मोती महल के लिए और शाह ने उनकी सलाह मानकर मोती महल के व्यंजनों का आनंद लिया।

बटर चिकन की वजह से बने कई अन्य व्यंजन

tandoori chicken

समय के साथ और बटर चिकन की अपार सफलता के बाद, कई अन्य रेस्तरां भी अपने-अपने वर्जन के साथ मैदान में उतरे। इससे चिकन लबाबदार, चिकन टिक्का मसाला, और मुंबई-स्टाइल मुर्ग मक्खनवाला जैसे कई व्यंजन की भरमार आ गई। चिकन लबाबदार पारंपरिक मखनी ग्रेवी और मुगलई व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले प्याज के मसाले का एक फ्यूजन है। इस डिश में काजू, खसखस, बादाम, चार मगज, कद्दू के बीज, तरबूज के बीज आदि को ब्लेंड कर एक क्रीमी टेक्सचर दिया जाता है और फिर बनाई जाती है यह शानदार डिश।

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