वनवास के समय में प्रभु श्री राम अनेकों जगह पर गए। जिनका उल्लेख हमें रामायण और रामचरितमानस में देखने को मिलता है। प्रभु ने जहां-जहां निवास किया वो आज हिंदू धर्म के लिए बहुत पवित्र स्थान माने जाते हैं। शायद ही आप जानते हों कि यह जगह प्रभु श्री राम के जन्म का कारण भी मानी जाती है।

आज के इस आर्टिकल में हम आपको श्रृंगवेरपुर धाम से जुड़ी मान्यता के बारे में बताएंगे और यह भी बताएंगे कि कैसे यह जगह प्रभु श्री राम के जन्म का कारण बनी।

श्रृंगवेरपुर एक धार्मिक स्थल है जो कि प्रयागराज शहर से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित है। हिंदू धर्म में श्रृंगवेरपुर धाम प्रभु श्री राम से जुड़ा पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है।

रामायण में जिन श्रृंगी ऋषि का नाम हमें सुनने को मिलता है, वो इसी धाम पर निवास किया करते थे। यह मंदिर गंगा किनारे बसे एक टीले पर बना हुआ है। राम नवमी के दिनों में इस मंदिर में काफी भीड़ देखने को मिलती है। यहां दर्शनार्थी आकर मां गंगा का स्नान करते हैं और इसके बाद प्रभु श्री राम के दर्शन पाते हैं।

पौराणिक कथा -

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 रामायण में प्रभु श्री राम से पहले उनके पिता राजा दशरथ के इस स्थान पर जाने का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि राजा दशरथ पुत्र की इच्छा लेकर गुरु वशिष्ठ के कहने पर श्रृंगी ऋषि से यहां मिलने आए थे। श्रृंगी ऋषि वहीं हैं जिनके नाम पर श्रृंगवेरपुर धाम का नाम रखा गया है।

राजा दशरथ ने ऋषि से समस्या का समाधान मांगा तब ऋषि ने उन्हें पुत्रकामेष्टि यज्ञ करने को कहा, जिसके बाद ही भगवान विष्णु के अवतार में प्रभु श्री राम ने धरती पर जन्म लिया। उनके साथ ही लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न का भी जन्म हुआ। राजा दशरथ ऋषि श्रृंग से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी बेटी शांता का विवाह ऋषि से करा दिया। तब से यह स्थान ऋषि श्रृंग और देवी शांता का निवास स्थान बन गया।

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दूसरी कहानी-

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कहा जाता है कि वनवास के समय में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण सहित यहां आए थे। आम मनुष्य का रूप धारण किए तीनों देवी-देवता वनवास के लिए निकल पड़े थे, उस समय श्रृंगवेरपुर निषादराज की राजधानी था। निषादराज मछुआरों के राजा थे, यहीं निषादराज की प्रभु श्री राम से मुलाकात हुई थी। इसके बाद उसी जगह से भगवान राम ने नाव से गंगा पार करने की बात कही, निषादराज ने नाव पार करने की यह शर्त रखी कि उन्हें प्रभु के पैर धुल कर उनके पैरों से लगा पानी पीना है। 

प्रभु निषाद का प्रेम देखकर उसे मना ना कर सके,और उनकी इच्छा को पूरा किया। जहां पर केवट ने प्रभु के पैर धोए थे उस जगह के प्रभु के चरणों के पग चिन्ह बने हुए हैं। यह स्थान इस लिए भी महत्वपूर्ण है क्यों कि यह प्रभु के वनवास का पहला पड़ाव माना जाता है।

अगर आप उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं तो इस जगह पर एक बार आपको जरूर जाना चाहिए। गंगा नदी के किनारे बना यह स्थल बहुत शांत और सुंदर है, यहां जाकर आपके मन को शांति का अनुभव होगा।

मंदिर की मान्यता-

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मंदिर में दर्शन करने वाले लोग पुत्र की कामना लेकर ऋषि श्रृंग के मंदिर में दर्शन करते हैं। कहा जाता है कि यहां दर्शन मात्र से ही पुत्र प्राप्ति का वरदान मिलता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस जगह पर विशाल मेला लगता है, लोग दूर-दूर से यहां गंगा स्नान के लिए आते हैं।

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जाने का रूट-

रोड-

अगर आप यहां रोड के रास्ते जाना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी शहर से सबसे पहले प्रयागराज(जानें प्रयागराज के ये इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स) पहुंचे। इसके बाद प्रयागराज से किसी भी टैक्सी या अपनी कार से की मदद से आप इस जगह तक पहुंच सकते हैं। प्रयागराज से कई लोकल बस और टेंपो भी इस जगह जाने के लिए आपको मिल जाएंगे, आप उनसे भी इस जगह पर जा सकते हैं।

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ट्रेन -

अगर आप ट्रेन से जाना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको अपने शहर से प्रयागराज पहुंचना है। इसके बाद आप प्रयागराज से किसी भी टैक्सी या कार की मदद से इस जगह पर जा सकते हैं।

आपको एक बार इस जगह पर जरूर जाना चाहिए। आपको हमारा यह आर्टिकल अगर पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर करें, ऐसे ही मंदिरों से जुड़ी जानकारी के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।

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