घूमने के शौकीन लोगों को हमेशा ही नई जगहों की तलाश रहती है, जहां वो कुछ अलग देख सकें और कुछ कर सकें। इसके साथ ही, घूमने का मजा तब और अधिक बढ़ जाता है, जब प्राकृतिक सौंदर्य के साथ उस स्थान का कोई सांस्कृतिक या ऐतिहासिक महत्व भी हो। आपने उत्तराखंड में कई हिल स्टेशन देखें होंगे और आप वहां घूमने भी गए होंगे। लेकिन क्या आपको पता है उत्तराखंड में एक ऐसे गांव मौजूद है, जहां आप खूबसूरत दृश्यों के साथ, कई नायाब चीजें देखने को मिलेंगी।

आज हम आपको ऐसा ही एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं से समृद्ध उत्तरकाशी जिले में स्थित बगोरी के बारे में बताएंगे।यहां आपको कई सारी इमारतों के साथ प्राकृतिक सौंदर्य के बेहद अनोखे अंदाज देखने को मिलेंगे। तो चलिए, जानते हैं बगोरी गांव के बारे में... 

क्यों है खास? 

village

यह शहर खेती, बाग, प्राकृतिक सौंदर्य आदि के क्षेत्र से बहुत खास है। साथ ही, यहां आपको हाथ से बनी हुई कई कलाकारी देखने को भी मिल जाएगी। खासतौर से यहां के लोग जड़ी-बूटियों का व्यापार भी करते हैं। इसलिए यहां की चाय बहुत मशहूर है क्योंकि यहां के लोग चाय में एक प्रकार की जड़ी-बूटी डालते हैं, जिससे चाय में अलग ही तरह का स्वाद आता है। 

इसके अलावा, आपको यहां मशरूम की कई प्रजातियां भी मिल जाएंगी। यहां के लोग खाने में मशरूम ही इस्तेमाल करते हैं। साथ ही, अगर आप खाने के शौकीन हैं, तो आपको कई स्वादिष्ट व्यंजन यहां खाने को मिल जाएंगे। यह चीन से बहुत नजदीक है इसलिए यहां आपको कई चाइनीज खाने के व्यंजन मिल जाएंगे जैसे, नूडल्स, मोमोज आदि। आप उन व्यंजनों का भी लुत्फ भी उठा सकते हैं। 

क्या है ऐतिहासिक? 

history of bagori

उत्तराखंड में हिल स्टेशन के अलावा आपको बगोरी गांव की भी सैर ज़रूर करनी चाहिए क्योंकि यह गांव अपने आप में बेहद खास है। कहा जाता है कि 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान सीमा पर बसे जादुंग और नेलांग गांव खाली हो गए थे और वहां के अधिकतर लोग बगोरी गांव में आकर बस गए। इसलिए यहां आपको ज्यादातर तिब्बती लोग मिलेंगे। 

बगोरी बहुत छोटा-सा गांव है, यहां की आबादी भी बहुत कम है। यह जगह बहुत शांत है अगर आपको शांति पसंद है, तो यह जगह आपके लिए बेस्ट है। यहां आपको कई प्राकृतिक सौंदर्य देखने को मिलेंगे। इस गांव के बराबर से जलनधारी भी बहती है, जो आगे जाकर गंगा नदी में मिल जाती है। साथ ही, यहां का सारा एरिया पाइन और चीड़-मजनू के पेड़ों से टपा पड़ा है। सर्दियों में यहां खूब बर्फ गिरती है। इसके अलावा, यहां आपको सेबों के कई खूबसूरत बाग देखने को मिल जाएंगे। अगर आप कुछ खरीदना चाहते हैं, तो हर्षिल कैंट एरिया के पास छोटी-सी मार्केट भी है। आप वहां से अपनी पसंद का कुछ खरीद सकती हैं। 

यह 'ग्रीन विलेज’ यानी हरित गांव के नाम से भी जाना जाता है। यह जगह ईको-फ्रेंडली डेस्टिनेशन पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए भी एकदम बेस्ट ऑप्शन है। इस गांव में चारों ओर हरियाली है। अगर आप इस गांव का रुख करते हैं, तो आपको यहां तिब्बती लोग और उनकी संस्कृति, आजीविकाओं के बारे में भी जानने का मौका मिलेगा। यहां आप तिब्बत के पारंपरिक खाने का लुत्फ भी उठा सकते हैं। 

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कहां रुकें? 

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वैसे तो बगोरी गांव में रुकने की कोई खास व्यवस्था नहीं है। बगोरी गांव के पास हर्षिल में आपको कई होटल मिल जाएंगे। आप अपनी बजट के अनुसार होटल ले कर यहां रुक सकते हैं।

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कब जाएं? 

अगर आप बगोरी जाना चाहते हैं, तो आप अप्रैल के बाद और सितंबर से पहले ही घूमने का प्लान बनाएं। 

कैसे जाएं? 

यहां जाने के लिए आपको देहरादून जाना होगा। फिर वहां से यह 220 किमी की दूरी पर स्थित है। आप हर्षिल तक गाड़ियों से जाएं, उसके बाद आप बगोरी बाइक या पैदल जा सकते हैं। 

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जब भी आप उत्तराखंड आएं तो एक बार बगोरी गांव की सैर जरूर करें। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर करना ना भूलें। इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

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