समुद्र तट पर स्थित होने की वजह से केरल में खूबसूरत समुद्री तट और बेहतरीन पर्यटक स्थलों की भरमार है। केरल में हर साल लगभग लाखों सैलानी घूमने के लिए आते हैं। ये सैलानी घूमने के साथ-साथ केरल में मनाए जाने वाले सांस्कृतिक और पारम्परिक उत्सवों का भी आनंद उठाते हैं। जिस तरह से केरल खूबसूरत पर्यटक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है ठीक उसी तरह अलग-अलग त्योहारों और उत्सव के लिए भी प्रसिद्ध है। 

केरल में मनाए जाने वाले मुख्य त्योहारों में से एक है ओणम। केरल का यह पारंपरिक त्योहार 10 दिन तक मनाया जाता है। इस साल यानी कि 2021 में इसकी शुरुआत 12 अगस्त को हुई थी और . 10वें दिन थिरुवोनम पर्व मनाया जाएगा। इसके साथ ही इस त्योहार का समापन 23 अगस्त को धूम -धाम से हो जाएगा। केरल में मनाए जाने वाले इस त्योहार का महत्त्व तो विशेष रूप से है ही लेकिन यहां और भी ऐसे त्योहार हैं जो बड़ी ही धूम धाम से मनाए जाते हैं। आइए जानें उन त्योहारों के बारे में। 

  • त्रिचूर पूरम त्योहार
  • कोडुंगल्लूर भरणी उत्सव
  • केरला बोट उत्सव 
  • विषु उत्सव

त्रिचूर पूरम त्योहार 

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केरल के सबसे प्रमुख त्योहार में से एक त्रिचूर पूरम त्योहार है। मुख्य रूप से इस त्योहार को वडक्कुनाथन मंदिर में मनाया जाता है, जहां भगवान शिव की पूजा होती है। लगभग दो सौ वर्षो से यह त्योहार हर साल अप्रैल के महीने में मनाया जाता है। इस खास मौके पर केरल के स्थानीय लोग पारंपरिक वेश-भूषा में होते हैं और बैंड-बाजा के साथ-साथ आतिशबाजी भी होती है। इस खास मौके पर सुसज्जित हाथियों की परेड भी होती है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से सैलानी आते हैं। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा लगभग 36 घंटे तक चलती है।

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कोडुंगल्लूर भरणी उत्सव 

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कोडुंगल्लूर भरणी उत्साह केरल में तीन दिन तक चलता है। इन तीन दिनों में कई जगह मेले आदि का आयोजन भो होता है। इस खास मौके पर केरल के शहर त्रिशूर में मौजूद मंदिरों में दारिका नामक एक दानव पर भद्रकाली की जीत के जश्न के रूप में मनाया जाता है। मार्च और अप्रैल के बीच में होने वाले इस उत्साह में स्थानीय लोग अलग-अलग पोषक के साथ पूजा-पाठ करते हैं। कई जगह स्थानीय लोग सामूहिक गीत के साथ-साथ नृत्य भी प्रस्तुत करते हैं। इस उत्सव में आप भी शामिल हो सकते हैं। (केरल के 4 खूबसूरत डेस्टिनेशन्स)

केरला बोट उत्सव 

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केरल के इस उत्सव से तो लगभग हर कोई वाकिफ होगा। केरल राज्य का सबसे प्रमुख कोई उत्सव है तो उसका नाम है केरला बोट उत्सव। इस बेहतरीन उत्सव में रोमांचकारी नौका दौड़ देखने के लिए दक्षिण-भारत के साथ-साथ उत्तर, पूर्व आदि सभी जगहों से लोग आते हैं। इस उत्सव को देखने के लिए कई विदेशी सैलानी भी प्रमुख रूप से केरल घूमने के लिए आते हैं। नौका के दौरान होने वाले गीत भी सबसे आकर्षण का केंद्र रहता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बोट रेस उत्सव को मुख्य रूप से जुलाई और सितंबर के बीच में मनाया जाता है। इस उत्सव को कई लोग नेहरू बोट रेस के नाम से भी जानते हैं।

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विषु उत्सव 

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जिस तरह से उत्तर-भारत के लोगों फर्स्ट जनवरी को नए साल के रूप में मानते हैं ठीक उसी तरह केरल में नए साल की शुरुआत विषु उत्सव के साथ होती है। कहा जाता है ओणम त्योहार के बाद दूसरा सबसे प्रमुख त्यौहार है केरल ले लिए। इस दिन पुरुष से लेकर महिलाएं तक पारंपरिक वस्त्र धारण करते हैं और एक-दूसरे को गले लगाकर विशु की बधाई देते हैं। इस दिन घर के सामने रंगोली भी बनाई जाती है और आतिशबाजी भी होती हैं। मुख्य रूप से अप्रैल के महीने में मनाए जाने वाले इस उत्सव में खान-पान का भी बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

यक़ीनन बोला जा सकता है कि अलगी बार आप जब भी केरल घूमने के लिए निकालेंगे तो इस त्योहारों और उत्सवों को देखते हुए ही घूमने का प्लान करेंगे। वैसे घूमने के साथ स्थानीय उत्सव और त्योहार को देखना और शामिल होने का एक अलग ही मज़ा होता है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

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