महाराष्ट्र में लगभग हर जिले में खूबसूरत पहाड़ी किलों मौजूद हैं। इन किलों का एक अपना समृद्ध इतिहास है। साथ ही, यह किले समय के साथ पर्यटकों के लिए एक विशेष स्थान बन गए हैं। इन किलों में से एक है महाराष्ट्र का हरिहर किला, जो पर्यटकों के लिए ट्रेकिंग व घूमने का एक मुख्य केंद्र बन गया है। आपको बता देें कि इस किले तक पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं है क्योंकि इसकी कई जगह चढ़ाई 90 डिग्री तक है। इस लेख के माध्यम से आज हम आपको हरिहर किले के बारे में जानकारी देने वाले हैं। दरअसल, यह किला जमीन पर नहीं बल्कि एक खूबसूरत पहाड़ की चोटी पर स्थित है। 

हरिहर किला या हर्षगढ़ एक ऐसा किला है, जो सह्याद्री की हरी-भरी पहाड़ियों के ऊपर स्थित है, जिसे पश्चिमी घाट भी कहा जाता है। यह किला घोटी और नासिक शहर दोनों से 40 किमी, महाराष्ट्र के नासिक जिले में इगतपुरी से 48 किमी दूर स्थित है। इस महत्वपूर्ण किले का निर्माण महाराष्ट्र को गुजरात से जोड़ने वाले गोंडा घाट के माध्यम से व्यापार मार्ग को देखने के लिए किया गया था। आज यह किला ट्रेकर्स का केंद्र बन गया है।

हरिहर किला का इतिहास

harihar fort histroy

हरिहर किला पश्चिमी घाट के त्र्यंबकेश्वर पर्वत में स्थित है। कहा जाता है कि इस किले की स्थापना सेउना या यादव राजवंश (9 वीं और 14 वीं शताब्दी के बीच) में हुई थी। उस समय यह किला गोंडा घाट से गुजरने वाले व्यापार मार्ग की सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण था। इसकी स्थापना के बाद से ही, हरिहर किले पर हमला किया गया और विभिन्न आक्रमणकारियों द्वारा कब्जा कर लिया गया जब तक कि ब्रिटिश सेना ने कब्जा नहीं कर लिया।

यह अहमदनगर सल्तनत के कब्जे वाले किलों में से एक था। 1636 में, हरिहर किले के साथ, त्र्यंबक, त्रिंगलवाडी और कुछ अन्य पूना (अब पुणे) किलों को शाहजी भोसले ने मुगल जनरल खान जमान को सौंप दिया था। फिर वह हरिहर किला 1818 में त्र्यंबक के पतन के बाद अंग्रेजों को सौंपे गए थे। यह 17 मजबूत किलों में से एक था, तब इन सभी किलों पर कैप्टन ब्रिग्स ने कब्जा कर लिया था।

हरिहर किले की बनावट कैसी है? 

structure of harihar fort

यह किला पहाड़ के नीचे से चौकोर दिखाई देता है, मगर इसकी बनावट प्रिज्म जैसी है। इसकी दोनों तरफ से संरचना 90 डिग्री की सीध में है और किले की तीसरी साइड 75 डिग्री है। वहीं, यह किला पहाड़ पर 170 मीटर की ऊंचाई पर बना है। यहां जाने के लिए एक मीटर चौड़ी लगभग 117 सीढ़ियां बनी हैं। साथ ही, इस किले की लगभग 50 सीढियां चढ़ने के बाद मुख्य द्वार, महादरवाजा आता है, जो आज भी बहुत अच्छी स्थिति में है।

हालांकि, किले का अधिकांश भाग समय की कसौटी पर खरा नहीं उतर सका, फिर भी इसकी संरचना प्रभावशाली है। किले के आधे रास्ते तक पहुंच काफी आसान है। पहाड़ी की तलहटी से जुड़े कई रास्ते वहां से एक जलाशय और कुछ कुओं के साथ जुड़ते हैं। गैरीसन के लिए यहां कुछ घर भी थे, जो अब अस्तित्व में नहीं हैं।

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घूमने और खाने के विकल्प

harihar fort travel places

निर्गुडपाड़ा गांव एक होमस्टे सुविधा प्रदान करता है लेकिन यह भोजन और ठहरने की व्यवस्था के मामले में हर्षवाड़ी अभी इतना विकसित नहीं हुआ है। हालांकि, यहां सड़क के किनारे कुछ ढाबे हैं, जहां आपको खाने-पीने के कई विकल्प मिल जाएंगे। घूमने के लिए किले के शीर्ष पर पहुंचने के बाद पर्यटकों को हनुमान और शिव के छोटे मंदिर भी देखने को मिलेंगे। वहीं, मंदिर के पास एक छोटा तालाब भी है, जहां का पानी बहुत साफ है। आप इस पानी को आसानी से पी भी सकते हैं। यहां रहने के लिए तालाब से थोड़ी आगे जाने के बाद पर्यटकों को दो कमरों का एक छोटा-सा महल दिखाई देगा। इस कमरे में आसानी से लगभग 10-12 लोग रुक सकते हैं।

साथ ही, पर्यटकों को यहां से बासगढ़ किला, उतावड़ पीक और ब्रह्मा हिल्स का खूबसूरत नजारा भी दिखाई देगा। यहां आप और भी कई चीजों का लुत्फ उठा सकते हैं। आपको बता दें कि इस किले पर सबसे पहले 1986 में डौग स्कॉट (पर्वतारोही) ने ट्रैकिंग की थी। यहां का ट्रैक पहाड़ के बेस में बने निर्गुडपाड़ा गांव से शुरू होती है। यह लगभग त्र्यंबकेश्वर से 22 किमी और नासिक से 45 किमी दूरी पर स्थित है। जब भी आप महाराष्ट्र आएं तो एक बार यहां की सैर जरूर करें। 

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नजदीकी हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन 

अंतरराष्ट्रीय और घरेलू हवाई अड्डा 

इस किले का निकटतम अंतरराष्ट्रीय और घरेलू हवाई अड्डा छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, मुंबई (170 किमी) है। 

रेलवे स्टेशन

रेलवे स्टेशन नासिक (56 किमी) और कसारा रेलवे स्टेशन (60 किमी) है। 

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आप अपने दोस्तों के साथ इस किले की सैर जरूर करें। आपको लेख पसंद आया हो तो इसे शेयर और लाइक ज़रूर करें, साथ ही, ऐसी अन्य जानकारी पाने के लिए जुड़े रहें हरजिन्दगी के साथ। 

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