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सुबह और शाम गायब हो जाता है शिव का ये मंदिर, दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं लोग

भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जिनका इतिहास काफी पुराना है। इन मंदिरों में दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।
Updated:- 2021-07-20, 18:26 IST
mahadev all temple

भारत में कई ऐसे मंदिर हैं, जो दुनिया भर में काफी मशहूर हैं। इन मंदिरों में दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर हैं जो बहुत प्रसिद्ध हैं। उन्हीं में से एक गुजरात के स्तंभेश्वर महादेव मंदिर का भी उल्लेख है। सबसे पुराना मंदिर होने के होने के साथ स्तंभेश्वर महादेव मंदिर को 'गायब मंदिर' भी कहा जाता है। सावन के महीने में इस मंदिर में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। दूर-दूर से लोग महादेव के दर्शन करने के लिए यहां आते हैं।

स्तंभेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने अपने तपोबल से किया था। यह मंदिर समुद्र में स्थित है और रोज़ाना दो बार गायब हो जाता है। कई लोगों को मंदिर का गायब होना एक चमत्कार लगता है। यही नहीं लोग अपनी मनोकामना पूर्ण होने की कामना लेकर इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आते रहते हैं। अगर आप भी भगवान शिव की भक्त हैं तो इस मंदिर के दर्शन करने के लिए जा सकती हैं।

क्यों कहा जाता है 'गायब मंदिर'

shiv temple

रोजाना स्तंभेश्वर महादेव मंदिर सुबह और शाम कुछ देर के लिए गायब हो जाता है। इसके पीछे प्राकृतिक कारण है, दरअसल दिन भर में समुद्र का स्तर इतना बढ़ जाता है कि मंदिर पूरी तरह डूब जाता है। फिर कुछ ही पलों में समुद्र का स्तर घट जाता है और फिर मंदिर पुनः दिखाई देने लगता है। ऐसा हमेशा सुबह और शाम के समय होता है। मंदिर के गायब होने के पीछे लोग समुद्र द्वारा शिव का अभिषेक करना मानते हैं। यही नहीं श्रद्धालु भगवान शिव के इस मंदिर का नजारा लेने के लिए दूर-दूर से आते हैं।

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स्तंभेश्वर महादेव मंदिर जाने का तरीका

stambheshwar

स्तंभेश्वर महादेव मंदिर गुजरात के वडोदरा से लगभग 40 किलोमीटर दूर जंबूसर तहसील में स्थित है। कावी कंबोई गुजरात के वडोदरा से लगभग 75 किमी दूर है। कावी कंबोई वडोदरा, भरूच, और भावनगर जैसी जगहों से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। वडोदरा से आप स्तंभेश्वर महादेव मंदिर जाने के लिए निजी टैक्सी या फिर अन्य वाहन का साधन लें सकती हैं। इसके अलावा यहां पहुंचने के लिए सड़क, रेल या फिर एयर प्लेन के जरिए भी आसानी से पहुंचा जा सकता है। वहीं इस मंदिर से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप www.stambheshwarmahadev.com पर जाकर विजिट कर सकती हैं।

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ऐसे निमार्ण हुआ था स्तंभेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना

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पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह शिवलिंग स्वयं भगवान कार्तिकेय द्वारा स्थापित किया गया था। एक कहानी यह भी कहती है कि भगवान कार्तिकेय (शिव के पुत्र) राक्षस तारकासुर को मारने के बाद स्वयं को दोषी मानते हैं। इसलिए भगवान विष्णु ने उन्हें यह कहते हुए सांत्वना दी कि आम लोगों को परेशान करने वाले एक राक्षस को मारना गलत नहीं है। हालांकि कार्तिकेय भगवान शिव के एक महान भक्त की हत्या के पाप को दूर करना चाहते थे। इसलिए, भगवान विष्णु ने उन्हें शिवलिंग स्थापित करने और क्षमा प्रार्थना करने की सलाह दी।

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