गुलाल और रंगों का त्योहार होली का नाम सुनते ही लोग उत्साह से भर जाते हैं। खाने से लेकर पहनने तक की तैयारी पहले से ही शुरू हो जाती है। इस बार कोरोना महामारी के नियमों को देखते हुए त्योहार मनाने की तैयारी है, लेकिन कई राज्यों में लोग अभी से ही खुशी में झूम रहे हैं। बता दें कि रंगों का ये त्योहार देशभर में धूम-धाम से मनाया जाता है। हालांकि कई राज्यों में इस त्योहार को मनाने का तरीका बेहद अलग है। 

अगर आप इस बार अपने होमटाउन न जाकर होली का त्योहार खास तरीके से सेलिब्रेट करना चाहती हैं तो इन जगहों को जरूर एक्सप्लोर करें। हालांकि कोरोना महामारी की वजह से कुछ नियमों का निर्धारित किया गया है, लेकिन सावधानी बरतते हुए इस त्योहार को मानया जा सकता है। आप इन जगहों पर जाकर होली के त्योहार को यादगार बना सकती हैं।

बनारस की होली

holi in varanasi

होली बनारस में दो दिन तक मनाई जाती है। बात करें यहां के गंगा घाट की तो यहां सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटक भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। दश्वाशमेध, अस्सी, तुलसी घाट आदि पर अलग रौनक देखने को मिलती है। होली के दिन लोग घाट पर ठंडाई बनाते हैं और एक दूसरे को पिलाते हैं। हालांकि यह ठंडाई भांग की होती है, जिसे पीने के बाद लोग झूमने भी लगते हैं। इसके अलावा भांग के लड्डू भी बनाए जाते हैं। लोग यहां सुबह से होली खेलना शुरू कर देते हैं और शाम होने से पहले तक खेलते रहते हैं। इस दिन घाट पर लजीज व्यंजन भी बनाए जाते हैं, जिसे सब मिलकर खाते हैं। बनारसी मस्ती में डूबे लोगों को देख आपका भी मन एक बार होली खेलने का जरूर करेगा।

पुष्कर की होली

pushkar

पिछोला झील के किनारे बसा पुष्कर हमेशा विदेशियों का पसंदीदा शहर माना गया है। यहां होली का त्योहार मनाने हजारों लोग आते हैं और मुख्य चौक में एक बड़ी पार्टी करते हैं। होली के दिन कृष्ण के भजन के बजाय यहां वराह घाट और ब्रह्म चौक पर मुख्य आयोजन किया जाता है। जहां लोगों की भीड़ देखी जा सकती है। होली के दिन लोगों की भीड़ डीजे पर जमकर डांस करती दिखाई देती है। हालांकि कोरोना महामारी की वजह से होली मनाने के तरीके में कुछ बदलाव किए जाएंगे। यही नहीं पुष्कर में कपड़ा फाड़ होली भी मनाई जाती है। दरअसल लोग एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं और इस दौरान एक-दूसरे के कपड़ों को फाड़ने की होड़ मचती है। यह सबकुछ न सिर्फ भारतीय पर्यटकों बल्कि विदेशी पर्यटकों को भी खूब पसंद आता है। (100 साल पहले कैसा दिखता था जयपुर)

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उदयपुर की होली

udaypur

उदयपुर में रॉयल तरीके से होली मनाई जाती है। दरअसल उदयपुर में होलिका शाही तरीके से जलाकर होली का जश्न मनाया जाता है। होली के त्योहार पर सिटी प्लेस में शाही निवास मानेक चौक तक जुलूस निकाला जाता है, जिसमें सजे-धजे घोड़े, हाथी, और ऊँट शामिल होते हैं। यही नहीं जुलूस के साथ बैंड-बाजा और राजधानी गीत-संगीत भी बजता रहता है। वहीं विदेशी पर्यटक सुबह चौक पर गुलाल लेकर खेलने के लिए एकत्र होते हैं, हालांकि इस दौरान स्थानीय पुलिस व्यवस्था को बनाए रखने में जुटी रहती है।

आनंदपुर साहिब

holi festival

पंजाबी तरीके से होली मनाना चाहती हैं तो आनंदपुर साहिब जाना बेस्ट है। जिस तरह अन्य शहरों में होली की रौनक देखने को मिलती है कुछ ऐसा ही नजारा यहां भी देखने को मिल जाएगा। पंजाब के रंग में होली अलग तरीके से मनाई जाती है। आनंदपुर साहिब में खेली जाने वाली होली काफी पुरानी नहीं है। इसकी शुरुआत साल 1701 में हुई थी, तब उसे होला-मोहल्ला त्योहार के नाम से जाना जाता था। इस त्योहार में सिख, तलवारों से करतब, मार्शल आर्ट्स, कुश्ती जैसी चीजें किया करते थे। 

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बलदेव की होली

baldeo holi

मथुरा से आधे घंटे की दूरी पर स्थित गांव बलदेव की होली बेहद खास है। यहां होली के अगले दिन बलदेव में हुरंगा का आयोजन किया जाता है। यहां भाभी-देवर की अद्भुत होली खेली जाती है, जिसमें लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। होली खेलने के लिए हल्दी, केसर, और पीले रंग का इस्तेमाल किया जाता है। ब्रज में मनाई जाने वाली और होली की तरह हुरंगा भी काफी मशहूर है।

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