प्रेग्नेंसी किसी भी महिला के लाइफ का एक अनमोल समय होता है। लेकिन इस समय के दौरान महिलाओं को कई शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुजरना पड़ता है। इसलिए प्रेग्नेंट महिलाओं को एक्स्‍ट्रा केयर की जरूरत होती है ताकि होने वाले बच्चे और मां को किसी भी तरह की कोई समस्‍या ना हो। प्रेग्नेंसी में डाइट के साथ-साथ रुटीन चेकअप का भी ध्यान रखा जाता है। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार प्रेग्नेंट महिला को सिर्फ खानपान का ही ध्यान नहीं रखना चाहिए बल्कि उसके आसपास कौन-सी चीजें रखी है, इसका ध्यान रखना भी बेहद जरूरी होता है। ऐसे में अगर कुछ वास्‍तु टिप्‍स को अपना लिया जाए तो प्रेग्‍नेंसी और बच्‍चे के जन्‍म के समय आने वाली अनावश्यक समस्याओं से बचा जा सकता है। शायद आपको विश्वास नहीं हो रहा होगा तो आइए हमारे साथ वास्तु के अनुसार घर में कुछ ऐसे बदलाव करके देखें क्‍योंकि इससे न केवल आपके प्रेग्नेंसी के चांस बढ़ते हैं बल्कि प्रेग्‍नेंसी में भी कोई परेशानी नहीं होती है। साथ ही डिलीवरी में होने वाली परेशनियां भी दूर होती हैं।

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प्रेग्नेंसी किसी भी महिला की लाइफ में नए रिश्ते की शुरूआत का सबसे अद्भुत लेकिन नाजुक समय होता है। एक जीवन के अंदर एक और जीवन, एक नया ऐसा रिश्ता जो जीवन भर चलता है। हर महिला चाहती है कि उसका शिशु हेल्दी हो, लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान महिला की बॉडी कमजोर रहने के कारण वह ऐसा नहीं कर पाती हैं। ऐसे में वास्तु टिप्स आपके लिए मददगार साबित हो सकते हैं। क्योंकि वास्तु प्रकृति के मौजूद 5 तत्वों को बैलेंस और ठीक से चलाने पर मदद करता है। इस प्रकार 5 तत्व हमारे कर्म, भाग्य, व्यवहार और जीवन के अन्य प्राथमिकताओं को प्रभावित करते हैं। आइए इस आर्टिकल के माध्यम से प्रेग्नेंसी के दौरान वास्तु के महत्व  के बारे में जानते हैं।

प्रेग्‍नेंसी में वास्‍तु टिप्‍स

  • जब तक आप प्रेग्नेंट ना हो जाए तब तक उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित कमरे का इस्तेमाल करना चाहिए। कम से कम तब तक जब तक गर्भधारण ना हो जाए।
  • प्रेग्नेंसी में किसी भी परेशानी से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को हमेशा दक्षिण-पश्चिम कमरे में ही सोना चाहिए। अगर ऐसा संभव ना हो तो उत्तर-पूर्व दिशा का कमरा भी बेहतर रहेगा। लेकिन प्रेग्नेंसी के अंतिम दिनों में प्रेग्नेंट महिला को उत्तर-पश्चिम दिशा के कमरे का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
  • प्रेग्नेंट महिला को हमेशा कमरे की दक्षिण दिशा की ओर ही सिर करके सोना चाहिए।
  • नीला रंग बेहद आरामदेह माना जाता है, इसलिए प्रेग्नेंट के कमरे में हल्की नीली या वायलेट रंग की लाइटें लगाना बेहतर रहता है।
  • फिर चाहे वह कमरे का रंग हो या कपड़ों का, प्रेग्नेंट को काले, नारंगी और लाल जैसे गहरे रंगों के इस्तेमाल से बचना चाहिए। क्योंकि गहरे रंगों के इस्तेमाल से प्रेग्नेंट डिप्रेशन का शिकार हो सकती है और इसका बुरा असर मां और बच्चे दोनों पर पड़ सकता हैं।
  • गहरे रंगों की बजाय हल्के रंगों जैसे- हल्का नीला, पीला, सफेद और हल्के गुलाबी रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए।

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  • यूं तो पढ़ना एक अच्छी आदत है लेकिन प्रेग्नेंसी में पॉजिटीव और प्रेरणादायक किताबें पढ़ना मां और होने वाले बच्चे दोनों के लिए अच्छा रहता है।
  • बेडरूम में छोटे बच्चों की फोटोज लगाएं। इससे प्रेग्नेंट महिला हमेशा पॉजिटिव रहती हैं और होने वाला बच्चा भी हेल्दी रहता है।
  • प्रेग्नेंट महिला के कमरे में मन विचलित करने वाली फोटोज नहीं लगानी चाहिए। नेगेटिव फोटोज जैसे डूबती नाव, खतरनाक जानवरों की फोटो, उदास फोटोज लगाने से बचना चाहिए।
  • प्रेग्नेंट महिला के कमरे में कोई नुकीली चीज नहीं रखनी चाहिए। नुकीली चीजें वास्तु दोष को बढ़ाती हैं जिससे वातावरण नेगेटिव होता है।
  • अपने घर में कोई भी कांटेदार पौधे जैसे कैक्‍टस न रखें। इसके अलावा, बोन्साई पौधों से दूर रहें क्योंकि वे मंद विकास का प्रतिनिधित्व करते हैं।

 

  • गर्भवती को नेगेटिव वाइब्स से बचने के लिए सीढ़ियों के नीचे बने टॉयलेट में जाने से बचना चाहिए।
  • घर के बीच में सीढ़ि‍यों का होना प्रेग्नेंट महिलाओं में हेल्थ प्रॉब्लम्‍स का कारण बनता है।
  • प्रेग्नेंट महिला को अंधेरे या बेरंग कमरे में नहीं बैठना चाहिए क्योंकि इससे उन्हें डिप्रेशन हो सकता है।

इन सब वास्तु टिप्स को ध्‍यान में रखकर प्रेग्‍नेंट, प्रेग्नेंसी में आने वाली समस्याओं से आसानी से बच सकती है। जी हां अगर आप वास्‍तु में विश्वास करती हैं, तो अपने प्रेग्‍नेंसी के दौरान इन दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए।