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  • Kirti Jiturekha
  • Her Zindagi Editorial, 24 Nov 2017, 19:10 IST

इस मंदिर में भगवान हनुमान बने डॉक्टर और मूर्ति करती है नृत्य

इस मंदिर की खासियत यह है कि केवल भभूति लगाने मात्र से यहां आए लोग ठीक हो जाते हैं, भले ही कोई बड़ी बीमारी ही क्यूं ना हो।
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  • Her Zindagi Editorial, 24 Nov 2017, 19:10 IST
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gwalior hanuman  mandir big

ऐसा कहा जाता है कि डॉक्टर्स भगवान का रूप होते हैं लेकिन आज हम आपको भगवान का ही एक ऐसा रुप दिखाने जा रहे हैं जिसमें भगवान ही एक डॉक्टर का काम कर हजारों लोगों को एक बड़ी बीमारी से ठीक कर रहे हैं। हम एक मंदिर के बारे में बात कर रहे हैं जहां भगवान हनुमान एक डॉक्टर का काम करते हैं। ग्वालियर चम्बल अंचल के भिण्ड जिले के दंदरौआ गांव में जहां कभी भी कोई बीमार पड़ता है तो किसी डॉक्टर या अस्पताल में दिखाने के अलावा ये लोग भगवान हनुमान के पास जाते हैं और उनका यह मंदिर ही इनके लिए किसी बड़े अस्पताल से कम नहीं है। इस मंदिर की खासियत यह है कि केवल भभूति लगाने मात्र से यहां आए लोग ठीक हो जाते हैं, भले ही कोई बड़ी बीमारी ही क्यूं ना हो।

कैंसर का होता है इलाज

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इस मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि यहां हनुमान स्वयं अपने एक भक्त का इलाज करने डॉक्टर बनकर पहुंचे थे और उसी के बाद से इस मंदिर को डॉक्टर हुनमान कहने लगे। इस मंदिर से जुड़ी ऐसी मान्यता है कि एक साधु शिवकुमार दास को कैंसर था और उसे भगवान हनुमान ने इस मंदिर में डॉक्टर के रूप में दर्शन दिए थे। भगवान हनुमान के दर्शन करने के बाद साधु पूरी तरह ठीक हो गया था। तब से लेकर आज तक हजारों श्रद्धालुओं की इस मंदिर से उनकी आस्था जुड़ी हुई है। उनका ऐसा मानना है कि डॉक्टर हनुमान के पास सभी प्रकार के रोगों का इलाज है।

इस भभूती में है कई रोगो के इलाज की दवा

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यहां आने वाले हजारों श्रद्धालुओं का इलाज भगवान हनुमान की भभूति से किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि ये भभूति रामबाण है जिससे सभी रोगों का इलाज किया जा सकता है। खासतौर पर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का। विशेष रूप में फोड़ा, अल्सर और कैंसर जैसी बीमारियां भी इस मंदिर की पांच परिक्रमा करने और भभूत लगाने से ठेक हो जाती है।

तालाब से निकली थी इस मंदिर की मूर्ति

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ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर की मूर्ति 300 साल पुरानी है जोकि एक तालाब से निकली थी, जिसे बाद में मिते बाबा नाम के एक संत ने इस मंदिर में स्थापित करवाया था। तब से इस मूर्ति की पूजा-अर्चना शुरू की गई थी।
वहीं दूसरी तरफ कुछ लोगों का ऐसा मानना भी है कि 300 साल पहले हनुमानजी की यह मूर्ति नीम के पेड़ से छिपी थी। पेड़ को काटने पर गोपी वेषधारी को भगवान हनुमान की ये प्राचीन मूर्ति प्राप्त हुई थी। तब से मूर्ति की पूजा-अर्चना शुरू की गई थी। यहां भगवान हनुमान की मूर्ति नृत्य की मुद्रा में है।

 

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