आजकल के ट्विटर ट्रेंड्स में 'फैमिली मैन 2' सीरीज का बहुत बोलबाला है और अगर आपने इस सीरीज को देखा है तो यकीनन पहली तस्वीर देखकर आप समझ ही गए होंगे कि मैं किस बारे में बात कर रही हूं। ये सीरीज एक आदमी श्रीकांत की कहानी पर आधारित है जो नेशनल सिक्योरिटी सर्विसेज में एक जासूस होता है, देश की रक्षा करता है और साथ ही साथ अपने परिवार के लिए समय भी निकालता है। 'फैमिली मैन' सीरीज को श्रीकांत के हिसाब से बनाया गया है और उसमें परिवार की महिलाओं के झगड़े पर फोकस किया गया है। पर क्या ये सही है?

श्रीकांत की बेटी और पत्नी दोनों को ही लेकर बहुत सारे मीम्स बन रहे हैं और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। शो में सुची यानि श्रीकांत की पत्नी और सुची का दोस्त करीब आ जाते हैं क्योंकि सुची की शादी में कभी श्रीकांत था ही नहीं। इसके बाद सुची गिल्ट में अपना करियर छोड़कर घर पर ध्यान देने लगती है। अब इसे लेकर भी मीम्स बने हैं और न जाने कितने लोगों ने इसे गलत माना है। पर एक सवाल जो हम सबको पूछना चाहिए वो ये कि 'क्या कोई पुरुष अगर ऐसी ही स्थिति में होता तो लोगों का रिएक्शन ऐसा ही होता?'।

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यहां बात सिर्फ एक फैमिली मैन सीरीज की नहीं है बल्कि एक आम धारणा की है। धारणा ये कि जिस भी चीज़ के लिए पुरुषों को असहजता महसूस होती है उस चीज़ के लिए महिलाओं का मज़ाक बना दिया जाता है। सीरियल में इस बात पर फोकस कम है कि 16 साल तक सुची अकेले घर संभालती रही, वो अपनी डिलिवरी के समय भी अकेले अस्पताल गई, उसने अपने करियर के बारे में कम और परिवार के बारे में ज्यादा सोचा, बल्कि इस बात पर फोकस ज्यादा है कि श्रीकांत के साथ वो कैसा व्यवहार करती है और अपनी गलती क्यों नहीं मानती। 

टीनएज लड़कियों पर भी बनते हैं मीम्स- 

शो में श्रीकांत की बेटी घृति टीनएज है और उसे हर उस बात को करते दिखाया जा रहा है जो टीनएज बच्चों में नॉर्मल है। ये सब शायद हमने खुद भी झेला है, लेकिन घृति को इसके लिए विलेन बना दिया गया। क्या एक बेटी जिसने 16 साल से अपने पिता को मां से लड़ते देखा है, पिता को घर से दूर देखा है उसके लिए विद्रोह करना नॉर्मल नहीं है?  

यहां ये समझने की जरूरत है कि टीनएजर्स वैसे भी बहुत नाजुक होते हैं और ऐसे में अगर वो इस तरह की स्थिति को देखेंगे जहां माता-पिता हर वक्त लड़ते रहें और बात तलाक तक आ पहुंचे तो उनके मन में क्या फीलिंग आएगी? फिर भी उन्हें लेकर मीम्स बनते हैं।  

 

यहां अफेयर को या टीनएजर्स के गलत व्यवहार को जस्टिफाई नहीं किया जा रहा है बस सवाल किया जा रहा है कि क्या ये सही नहीं था जो रिएक्शन उन लोगों ने दिया। पत्नी की मेंटल स्टेट को न समझते हुए पति पत्नी से सिर्फ इसलिए झगड़ा करे कि पत्नी उसे समझ नहीं रही है और उसके काम को महत्व नहीं दे रही तो ये भेदभाव है और इसपर जोक बनाना तो और भी गलत है।  

family man memes

कितना आसान हो सकता है एक पुरुष के लिए ऐसी स्थिति में फंसना और फिर भी उसे स्टड कहा जा सकता है, उसे जस्टिफाई किया जा सकता है कि इतनी परेशानियों के बाद उसने अपनी खुशी बाहर ढूंढ ली तो महिलाओं को जोक का मटेरियल क्यों बनाया जाता है।  

memes on dayaben

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महिलाओं का मज़ाक उड़ाना इतना आसान क्यों? 

यहां सिर्फ एक सीरियल या वेबसीरीज की बात नहीं है। अगर आप गौर करें तो महिलाओं पर जोक करना लोगों के लिए बहुत आसान होता है। एक तरह से उन्हें टाइपकास्ट कर दिया गया है कि वो अपनी बात एक निश्चित तरीके से रखती हैं और साथ ही साथ उन्हें उनकी बात रखने पर भी जोक के तौर पर देखा जाता है। किसी पुरुष का बाहर फ्लर्ट करना सही है और महिला का उसी गलती पर उसे टोक देना भी गलत। 

memes on women

आखिर क्यों इतना आसान हो जाता है पुरुषों के लिए महिलाओं को लेकर ऐसे मज़ाक करना। महिलाओं को ये समझना कि वो अगर अपना मन भी बदलती हैं तो वो भी गलत होता है। ये कहां तक सही है कि महिलाओं को सिर्फ हंसी का पात्र बना दिया जाता है। आजकल मीम्स बहुत आसानी से वायरल हो जाते हैं, लेकिन अगर टीवी सीरियल की बात करें तो मीम्स की शक्ल भी पुरुषों और महिलाओं को लेकर बदल जाती है।  

 

पुरुष बॉस को मारे तो सही और महिला अगर बॉस की बुराई भी करे तो उसे चुगली का नाम दे दिया जाता है। ये स्टड बनाम सबला की लड़ाई में आखिर महिलाओं पर जोक करना कितना सही है? अगर ये आप खुद से पूछेंगे तो पाएंगे कि ये सिर्फ और सिर्फ पुरुषों के ईगो को शांत करने का एक तरीका मात्र है।  

एक बात सोचने वाली है कि आखिर हर बार इस तरह का जोक महिलाओं पर बनाना क्या सिर्फ एक ट्रेंड है या फिर कुछ और।  

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