हिन्दू धर्म में न जाने कितनी कथाएं प्रचलित हैं जो प्राचीन काल की संस्कृति को दिखाती हैं। ऐसी कहानियों में से राम चंद्र और अयोध्या की कहानियां आप सभी ने कई बार सुनी होंगी। लेकिन अगर हम आपसे कहें कि भारत से बाहर भी एक ऐसा देश है जहां राम जी के अनुयाई हैं , यही नहीं भारत के बाहर एक ऐसी भी जगह है जहां के लोग अयोध्या को अपनी ननिहाल मानते हैं और राम की नगरी से विशेष जुड़ाव रखते हैं। 

जी हां हम बात कर रहे हैं दक्षिण कोरिया के लोगों की। यह सत्य है कि वहां के लोग आज भी अयोध्या को अपनी ननिहाल मानकर यहां मुख्य रूप से दर्शन के लिए आते हैं। यह एक ऐसा रिश्ता है जिसे निभाने की परंपरा हजारों सालों से चली आ रही है और दक्षिण कोरिया के लोग इसी प्रथा को निभाने अयोध्या आते हैं। आइए जानें इस तथ्य के पीछे की कहानी के बारे में जो आपमें से शायद ही किसी ने सुनी होगी। 

क्या है ये कहानी 

ayodhya story

पौराणिक कथाओं के अनुसार कोरिया के लोगों को अपनी रानी हॉ हांक-ओके के अयोध्या से आने का पता तेरहवीं सदी में लिखे गए कोरियन ग्रंथ सम्यूक यूसा से पता चला। इसमें कहा गा या है कि अयोता नाम की जगह से आयी राजकुमारी का विवाह काया राज्य के राजा सूरो से हुआ था. इस ग्रंथ के मुताबिक अयोता यानी अयोध्या की राजकुमारी का विवाह किम सूरो से 48 ईसी में हुआ था। इसी कहानी के अनुसार अयोध्या नगरी रानी का मायका और वहां के लोगों का ननिहाल माना जाता है। अब इस कहानी पर न सिर्फ कोरिया के लोग बल्कि भारतीय भी विश्वास करने लगे हैं।

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अयोध्या से है गहरा नाता 

ayodhya and koria relation

जी हां, अयोध्या से अपना नाता जोड़ने वाला देश कोरिया में किम वंश के लोग हर साल अयोध्या आते हैं और इनकी मान्यता है कि अयोध्या इनकी रानी मां का मायका है। भारत के इतिहास या किंवदंतियों में ये कहानी सुनने पढ़ने को भले ही न मिलती हो, लेकिन कोरिया के गिमहे शहर में जाएं तो हर किसी की ज़ुबान पर यह कहानी मिल जाएगी। दरअसल दक्षिण कोरिया और भारत की दोस्ती 2000 साल पहले से शुरू होती है। यह बात हम जानते हैं कि श्रीराम को राजा दशरथ ने 14 साल के लिए वनवास पर भेज दिया था। वनवास पूरा होते ही, राम वापस अयोध्या आ गए थे. लेकिन उसी नगरी की एक राजकुमारी थीं सुरीरत्ना, जो 2000 साल पहले दक्षिण कोरिया गईं और वहीं बस गईं थीं। कोरिया में उन्होंने उस समय के राजा किम सोरो से शादी कर ली। इसके बाद भारत-कोरिया के दोस्ती और मजबूत हो गई। 

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कोरिया की रानी हॉ हॉंक-ओके का स्मारक

rani smarak ayodhya

सिर्फ कोरिया की किंवदंतियों में नहीं है, बल्कि भारत की ज़मीन पर भी दिखने लगी है। में कोरिया की सरकार ने अयोध्या में सरयू नदी के तट पर 'रानी हो' का स्मारक बनवाया और हर साल फरवरी-मार्च के बीच कोरियन लोग अयोध्या आकर 'रानी हो' को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। 

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कौन थी राजकुमारी 

korian princess

अयोध्या की राजकुमारी सूरी रत्ना एक जहाज पर सवार होकर कोरिया द्वीप के काया राज्य के लिए रवाना हुईं। उनके माता पिता को स्वप्न में ईश्वर ने आदेश दिया था कि सुदूर काया राज्य के राजा किम सूरो ही उनकी बेटी के पति होंगे। इस सपने के बाद उन्होंने अपनी बेटी को कुछ अंगरक्षकों और सेवक-सेविकाओं के साथ काया राज्य की तरफ रवाना कर दिया। इधर कोरिया के काया राज्य में किम सूरो के राजा बनने की भी दिलचस्प कहानी है। 

कहा जाता है कि किम सूरो देवलोक से आए छह सोने के अंडों से जन्मे थे और उन्होंने राजुकुमारी के आने के इंतजार में शादी नहीं की थी। जब मंत्रियों ने उनसे विवाह का आग्रह किया तो उन्होंने कहा कि उनका रिश्ता स्वर्ग से ही जुड़ गया था और वो अपनी राजकुमारी का इंतज़ार कर रहे हैं। जब राजकुमारी का जहाज कोरिया के काया राज्य की सीमा में पहुंचा, तो वहां राजा किम सूरो के सैनिक राजकुमारी को राजा के पास ले गए।  राजा ने उन्हें अपने राजमहल में जगह दी और फिर दोनों का विवाह संपन्न हुआ। यहां राजकुमारी को रानी हॉ हॉन्क ओके नाम दिया गया। 

वास्तव में दक्षिण कोरिया से जुड़ी से कहानी बेहद दिलचस्प है और लोगों का ध्यान केंद्रित करती है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

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