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Japan Laughing Ritual: 20 मिनट तक लगातार हंसने की रस्म में शामिल होते हैं हजारों लोग, पौराणिक कथा से जुड़ी है जापान की यह अनोखी परंपरा

Japanese Laughing Tradition: हमारे देश-दुनिया में तमाम ऐसी परंपराएं और संस्कृति हैं, जिसे जानने के बाद हैरानी होती है। आज के इस लेख में हम आपको एक जापान की एक ऐसी परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे जानने के बाद आप सोच में पड़ जाएंगे।
Editorial
Updated:- 2025-12-31, 16:34 IST

Japan Owarai Shinji Ritual Kya Hai: जापान अपनी अनूठी परंपराओं और संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, लेकिन वहां की एक रस्म ऐसी है जो सबसे ज्यादा हैरान कर सकती है और वह रिवाज कुछ और नहीं बल्कि हंसने से जुड़ा है। अब आप सोचेंगे कि आखिर हंसने वाली परंपरा कैसे हैरान कर सकती हैं। बता दें कि इस अनोखी रस्म में हजारों लोग एक साथ जमा होते हैं और करीब 20 मिनट तक बिना रुके जोर-जोर से हंसते हैं। चलिए नीचे लेख में जानते हैं कि इस परंपरा में 10-25 या 30 मिनट के बजाय केवल 20 मिनट ही हंसना क्यों जरूरी है और क्या है इसके पीछे की पौराणिक कथा।

क्या है जापान की हंसने वाली प्रथा का नाम?

20 मिनट तक लगातार हंसने वाली इस परंपरा का नाम हिराओका मत्सुरी है, जिसे Owarai Shinji उत्सव भी कहते हैं। यह उत्सव मुख्य रूप से ओसाका के हिराओका श्राइन में मनाया जाता है। इसमें वॉरौ शब्द का जापानी भाषा में अर्थ हंसना है।

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कब आयोजित किया जाता है Owarai Shinji Rituals?

kya hai japan ka 20 minute hasne wali pratha

Owarai Shinji परंपरा आमतौर पर हर साल दिसंबर के महीने में आयोजित किया जाता है, ताकि नए साल का स्वागत खुशियों और सकारात्मकता के साथ किया जा सके।

कैसे निभाई जाती है यह रस्म?

यह उत्सव मुख्य रूप से जापान के ओसाका और आसपास के मंदिरों में आयोजित किया जाता है। समारोह की शुरुआत में मंदिर के पुजारी सफेद पोशाक पहनकर पवित्र अनुष्ठान करते हैं। इसके बाद एक मुख्य पुजारी हाथ उठाकर जोर से हंसना शुरू करता है और फिर वहां मौजूद हजारों लोग उनके साथ मिलकर ठहाके लगाने लगते हैं। यह सिलसिला लगातार लगभग 20 मिनट तक चलता है।

पौराणिक कथा से जुड़ा है जापान की यह परंपरा

Japanese folklore laughing myth

जापान की इस परंपरा की जड़ें जापानी लोककथाओं में छिपी हैं। माना जाता है कि प्राचीन काल में सूर्य की देवी अमातेरासु अपने भाई के व्यवहार से दुखी होकर एक गुफा में छिप गई थीं, जिससे पूरी दुनिया में अंधेरा छा गया था। तब अन्य देवी-देवताओं ने उन्हें बाहर निकालने के लिए गुफा के बाहर जोर-जोर से हंसना शुरू किया। उनकी हंसी और शोर सुनकर देवी अमातेरासु को जिज्ञासा हुई और वे गुफा से बाहर निकल आईं, जिससे दुनिया में फिर से रोशनी फैल गई। तब से यह परंपरा निभाई जा रही है।

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