हर महिला की यही कामना होती है कि उसके घर में सुख-शांति का वास रहे। घर के सभी सदस्यों की हेल्थ अच्छी रहे, घर के सदस्यों के बीच संबंध अच्छे रहें और मनमुटाव जैसी स्थितियां ना रहें। लेकिन घर में अक्सर किसी ना किसी चीज को लेकर महिलाएं तनाव में आ ही जाती हैं। कभी घर के सदस्यों को हेल्थ प्रॉब्लम हो जाती है, तो कभी घर में छोटी-बड़ी चीजों के कारण परेशानी हो जाती है। अगर घर की पूरी देखरेख करने के बावजूद कोई ना कोई समस्या बनी रहती है, तो इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि आपका घर वास्तु सम्मत है या नहीं। वास्तु एक्सपर्ट से आप इस बात की जानकारी ले सकती हैं। वास्तु के अनुसार घर की व्यवस्था करने से घर-परिवार में हमेशा खुशियां कायम रहती हैं। वास्तु में रंगों का भी विशेष महत्व होता है।

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हर दिशा में अलग रंग का होता है प्रभाव

वास्तु के अनुसार अलग-अलग दिशाओं में अलग-अलग रंगों का प्रभाव घर में पॉजिटिव एनर्जी लाने में मददगार साबित हो सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, प्रत्येक दिशा के लिए एक निश्चित रंग है, जो उस दिशा के देवी-देवता से जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही प्रत्येक दिशा किसी न किसी ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है और उस दिशा में किसी रंग विशेष का प्रयोग शुभ या अशुभ फलदायक होता है। बात जब घर में रंग-रोगन की आती है, तो महिलाओं की भूमिका विशेष होती है। ज्यादातर घरों में रंगों का चयन महिलाएं ही करती हैं। ऐसे में अगली बार आप अगर अपने घर के लिए रंगों का चयन करें तो आपको घर में पॉजिटिव एनर्जी लाने वाले रंगों को विशेष महत्व दें। इससे आपका घर न सिर्फ खूबसूरत दिखेगा, वह आपके परिवार के लिए सौभाग्य, समृद्धि एवं स्वास्थ्य को भी आमंत्रित करेगा। घर में वास्तु या फेंगशुई के अनुसार प्रयोग करके बहुत सी चीज़ो को अपने अनुकूल किया जा सकता  है। वास्तु एक्सपर्ट नरेश सिंगल से आइए जानते हैं कि आप कैसे अपने घर का वास्तु अनुकूल बना सकते हैं-

पूर्व दिशा: यह दिशा सूर्य की मानी जाती है। पूर्व दिशा में भूरे रंग का प्रयोग करना चाहिए, जो पवित्रता का द्योतक है। यहाँ पर आप हरे रंग या पिस्ता वाले हरे रंग का प्रयोग भी कर सकती हैं।  

पश्चिम दिशा: इस दिशा का स्वामी शनि है। पश्चिम दिशा में स्लेटी रंग का उपयोग करना चाहिए। यह रंग संतोष और परिपक्वता प्रदान करता है। 

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उत्तर दिशा:  इस दिशा का स्वामी बुध है। उत्तर दिशा में हरे रंग का प्रयोग शुभ फलदायी है। यह रंग दिमाग को तेज करता है और आर्थिक संपन्नता बढ़ाता है। यहाँ पर आप नीला रंग का प्रयोग भी कर सकती हैं।

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दक्षिण दिशा:  मंगल दक्षिण दिशा का स्वामी है। उत्साह और ऊर्जा का पर्याय माना जाने वाला लाल रंग इस दिशा के लिए सर्वोचित है। यहाँ पर आप पर्पल रंग का प्रयोग भी कर सकती हैं।

उत्तर-पूर्व दिशा: वास्तु के अनुरूप यह दिशा श्रेष्‍ठ मानी जाती है, जिसका स्वामी बृहस्पति है। उत्तर-पूर्व में पीला रंग होना चाहिए। यह रंग शुभ फल प्रदान करता है। इस दिशा में आप बेज रंग का प्रयोग भी कर सकती हैं।  

उत्तर-पश्चिम दिशा: यह दिशा चन्द्रमा की है। उत्तर-पश्चिम में सफेद रंग या सिल्वर रंग का प्रयोग आत्मिक शांति और संपत्ति प्रदान करता है। 

दक्षिण-पूर्व दिशा: इस दिशा का स्वामी शुक्र है। इस दिशा में सफेद रंग होना चाहिए, जो खूबसूरती, उत्साह और सौभाग्य में वृद्धि करता है। यहाँ पर आप हरा रंग या पिस्ता वाले हरे रंग का प्रयोग भी कर सकती हैं।  

दक्षिण- पश्चिम दिशा:  इस दिशा का स्वामी राहू है। यहां नीला रंग उपयोग करने की सलाह दी जाती है, जो साहस का प्रतीक है। इस दिशा में आप बेज रंग का प्रयोग भी कर सकते है। 

वास्तु शास्त्र के अनुसार अपने घर की चीजों की व्यवस्था करने से घर में हमेशा पॉजिटिवटी बनी रहती है। घर के हर कमरे, चाहें वह लिविंग रूम हो या किचन, बेडरूम रूम हो या पूजा घर, हर जगह वास्तु के अनुकूल व्यवस्था होने से घर नेगेटिव एनर्जी के प्रभाव से सुरक्षित बना रहता है। अगर आप घर के वास्तु से जुड़ी और जानकारियां पाना चाहती हैं, तो इसके लिए HerZindagi विजिट कर सकती हैं। वास्तु के अलावा भी घर को सजाने-संवारने और छोटी-बड़ी सहूलियतों के लिए स्मार्ट टिप्स भी HerZindagi पर आसानी से पा सकती हैं।