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    कान कटने पर दे दी जाती है जिंदा समाधि, जानें इस अनोखी परंपरा का सच

    आज हम आपको एक अनोखी परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके अनुसार कान कटने पर जिंदा समाधि लेनी पड़ती है।  
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    • Gaveshna Sharma
    • Editorial
    Updated at - 2023-01-14,14:00 IST
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    samadhi significance

    Unique Samadhi Tradition: भारत में कई तरह की संप्रदाय हैं और हर एक संप्रदाय के अंतर्गत पंथ आते हैं। ऐसा ही एक पंथ है 'सतनाम पंथ'। इस पंथ में कई अनोखे रीति-रिवाज हैं जो बेहद चौकाने वाले हैं। 

    हमारे ज्योतिष एक्सपर्ट डॉ राधाकांत वत्स द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर आज हम आपको सतनाम पंथ की एक अनोखी प्रथा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका नाता समाधि से है। 

    • दरअसल, सतनाम पंथ में एक प्रथा है कि जिस भी योगी का कान कट जाता है उसे जिंदा समाधि लेनी पड़ती है। बता दें कि यहां कान कटने का अर्थ है कर्णछेदन संस्कार (कान छिदवाने के लाभ) होना। 
    what is samadhi
    • सतनाम पंथ में योगी अर्थात संत बनने के बेहद कठिन नियमों का पालन करना पड़ता है। इन नियमों के तहत 41 दिन तक अपनों से दूर पर्दे में रहना होता है।
    • इसके अलावा, 9 दिन अघोरी क्रिया करनी होती है। भोजन भी सिर्फ वही खाना होता है जो गुरु द्वारा दिया जाता है। उतने ही भोजन में दिन निकालना होता है। 
    • इसके बाद कान छेदा जाता है। इस पंथ में यह मान्यता है कि कान छेदने से सुनने की शक्ति में वृद्धि होती है और कान से जुड़ी बीमारी भी दूर हो जाती है। 
    • कर्ण छेदन पक्रिया के बाद सबसे पहले मिट्टी से बने कुंडल पहनाए जाते हैं फिर पीतल या चांदी (चांदी रखने के ज्योतिष टिप्स) के कुंडल पहनने की अनुमति होती है। 
    types of samadhi
    • चूंकि कर्ण छेदन संस्कार को ही कान कटना कहा जाता है इसी कारण से परंपरा के अनुसार यहां जीवित समाधि का प्रचलन है।
    • यानी कि जिसने भी कर्ण छेदन करवाया वह योगी की गिनती में आ जाता है। धर्म ग्रंथों में योगियों की समाधि का विधान है। 
    • ऐसे में योगी बने व्यक्ति की या तो जीवित समाधि होती है या मरने के बाद शरीर की समाधि बनाई जाती है लेकिन उसका दाह संस्कार नहीं किया जाता है। 
    • मान्यताओं के अनुसार, योगी बनने के लिए अनेकों योग क्रियाएं करनी पड़ती हैं जिससे शरीर स्वतः ही शुद्ध हो जाता है। 
    samadhi in hindu dharm
    • ऐसे में शुद्धि के लिए दाहसंस्कार करने की आवश्यकता नहीं मानी जाती है। क्योंकि एक योगी के लिए उसकी योग क्रियाएं अग्नि से ज्यादा पवित्र होती हैं।

    तो ये था कान कटने पर जिंदा समाधि लेने के पीछे का कारण और महत्व। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर जरूर शेयर करें और इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। आपका इस बारे में क्या ख्याल है? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

    Image Credit: Wikipedia, Pinterest

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