हिंदू धर्म में किसी भी तिथि का बहुत ज्यादा महत्व है। ऐसा माना जाता है कि किसी भी तिथि को अलग तरीके से मनाया जाता है और उस दिन में अलग तरीके से पूजन किया जाता है। इसी तरह से हिंदू पंचांग की15वीं तिथि को अमावस्या तिथि होती है जिसका महत्व बहुत ज्यादा बताया गया है।

ऐसा माना जाता है कि किसी भी अमावस्या तिथि में यदि पितरों को याद किया जाता है या फिर उनके नाम से हवन और पूजन किया जाता है तो ये पितृ दोष से मुक्ति दिलाने के साथ पुण्य फलों की प्राप्ति कराता है। यही नहीं अमावस्या तिथि में पवित्र नदी में स्नान करना भी शुभ माना जाता है और पापों से मुक्ति दिलाता है। हिंदू धर्म में पौष अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है। आइए अयोध्या के जाने माने पंडित राधे शरण शास्त्री जी से जानें पौष के महीने में कब है अमावस्या तिथि और इसका क्या महत्व है।

पौष अमावस्या 2022 तिथि एवं मुहूर्त

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  • पंचांग के अनुसार, पौष माह के कृष्ण पक्ष की अमवास्या तिथि 02 जनवरी को पड़ेगी। 
  • अमावस्या तिथि का मुहूर्त 2 जनवरी प्रातः 03 बजकर 41 मिनट से प्रारंभ 
  • 02 जनवरी को रात 12 बजकर 02 मिनट पर समापन 
  • ऐसे में अमावस्या तिथि सूर्योदय पर 02 जनवरी से प्रारंभ हो रही है, इसलिए अमावस्या की उदया तिथि 02 जनवरी को ही प्राप्त हो रही है। 
  • इस वजह से पौष अमावस्या 02 जनवरी 2022 दिन यानी रविवार को है। 

सर्वार्थ सिद्धि योग

पौष अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रात: 07 बजकर 14 मिनट से शाम 04 बजकर 23 मिनट तक है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन आप जो भी कार्य करते हैं वह सफल और सिद्ध होता है। 

पवित्र नदी में स्नान करना है शुभ 

pavitra river snan

ऐसा माना जाता है कि पौष अमावस्या के दिन यदि आप प्रात:काल पवित्र नदी में स्नान करते हैं तो यह कई तरह से आपके लिए शुभ माना जाता है। इस दिन नदी में स्नान करने और गरीबों को दान पुण्य देने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन आप स्नान के बाद गरीबों को दान पुण्य अवश्य करें। 

पितरों को तर्पण और हवन करें 

पौष अमावस्या के दिन स्नान और दान के बाद पितरों का स्मरण करना कर उनके लिए तर्पण, पिंडदान करना लाभकारी माना जाता है। इस दिन मृत पूर्वजों का श्राद्ध आदि कर सकते हैं। इस दिन पितरों को तृप्त करने के लिए पूजन किया जाता है जिससे पितर खुश हो सकें और सुखी एवं समृद्ध जीवन का आशीर्वाद मिले। ऐसा करने से आपको पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है। 

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कैसे करें पूजन 

  • अमावस्या तिथि के दिन प्रातः जल्दी उठें और पवित्र नदी के स्नान करें। 
  • यदि आप नदियों में स्नान नहीं कर सकते हैं तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। 
  • ऐसा माना जाता है कि नदी में स्नान करने से कई पापों से मुक्ति मिलती है। 
  • इस दिन पितरों के नाम का दीपक प्रज्ज्वलित करें और उनके नाम से हवं करें। 
  • अपनी सामर्थ्य अनुसार गरीबों को दान पुण्य करें। 

इस प्रकार अमावस्या के दिन पूजन करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है और इससे शुभ फलों की प्राप्ति भी होती है। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।

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