हमारे देश में पितृसत्ता इस कदर लोगों के दिमाग पर हावी होती है कि कई बार ये भी नहीं समझा जा सकता है कि आखिर हम अपनी आने वाली पीढ़ी को क्या सीख दे रहे हैं। ऐसा कई बार हुआ है कि बच्चों की किताबों में हमें कुछ ना कुछ ऐसा देखने को मिला है जो पितृसत्ता की इस सोच को और गहरा करता है। हाल ही में एक बार फिर से ऐसा ही कुछ देखने को मिला है। सीबीएसई के क्लास 10 के एक क्वेश्चन पेपर में एक ऐसा पैसेज लिखा गया था जिसे देखकर कांग्रेस की प्रियंका गांधी भड़क गईं। 

इसके बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस पैसेज को लेकर सवाल उठाए और उसे महिलाओं के खिलाफ बताया। अंग्रेजी के क्वेश्चन पेपर में रीडिंग सेक्शन में उस पैसेज में लिखा था कि परिवार में महिलाओं का रोल क्या होता है। 

क्या लिखा था उस विवादित पैसेज में?

इस पैसेज में जेंडर स्टीरियोटाइप बातें लिखी हुई थीं कि महिलाओं को क्या करना चाहिए । उस पैसेज में लिखा था, 'महिलाओं की मुक्ति ने बच्चों पर माता-पिता के अधिकार को नष्ट कर दिया है', और 'अपने पति के तरीके को स्वीकार करने से ही एक मां छोटे बच्चों को आज्ञाकारी बना सकती है।'

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इसी पैसेज का आखिरी पैराग्राफ कहता है, 'जो लोग समझने में देरी कर देते हैं वो ये कि पत्नी की आजादी ने माता पिता की अथॉरिटी बच्चों के ऊपर से खत्म कर दी है। मां ने उस आज्ञाकारिता का उदाहरण नहीं दिया जिस पर वह अभी भी जोर देने की कोशिश करती है। आदमी को उसके आसन से नीचे लाने में पत्नी और मां ने खुद को वास्तव में अनुशासन से वंचित कर दिया है।'

इस पैराग्राफ से जुड़ी समस्याएं यहां ही खत्म नहीं होती हैं बल्कि ये और भी आगे बढ़ता है और उस पैराग्राफ से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं जैसे- क्या लेखक एक 'ऐसा लगता है कि एक नर अंधराष्ट्रवादी/ अभिमानी व्यक्ति है।', 'जीवन को किसी हल्के दृष्टिकोण से लेकर चलता है।', 'एक असंतुष्ट पति है', 'उसके परिवार का कल्याण उसके दिल में है।'

सीबीएसई बोर्ड के मुताबिक इस सवाल का उत्तर है, 'जीवन को किसी हल्के दृष्टिकोण से लेकर चलता है।'

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इसे कई स्टूडेंट्स ने गलत माना और सोशल मीडिया पर शेयर भी किया जिसके बाद ये पैसेज वायरल हो गया। इसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी जा रही है और सीबीएसई बोर्ड पर ये आरोप लगाया जा रहा है कि ये पितृसत्ता को बढ़ावा देता है। 

कई बड़ी हस्तियों ने किया विरोध-

इसके वायरल होने के बाद कांग्रेस की जनरल सेक्रेटरी प्रियंका गांधी वाड्रा ने इसके खिलाफ आपत्ति जताई है और इसे महिलाओं के लिए रूढ़ीवादी सोच बताया है। उन्होंने इसे ट्वीट भी किया और कहा, 'विश्वास नहीं होता! हम अपने बच्चों को ये बकवास पढ़ा रहे हैं? साफ है कि भाजपा सरकार महिलाओं के खिलाफ इस तरह के पीछे छोड़ने वाले विचारों का समर्थन कर रही है, और भला क्यों ये सीबीएसई के कोर्स में होता? ' 

 

प्रियंका गांधी की इस ट्वीट के बाद ये और भी ज्यादा वायरल हो गया और अब इसपर बहस छिड़ गई है। यकीनन ये एक ऐसा टेक्स्ट है जो बताता है कि आखिर हम किस हद तक महिलाओं की आज़ादी के विरोध में हैं।  

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क्या कहना है सीबीएसई का? 

आखिर इतने विरोध के बाद सीबीएसई की तरफ से इस बारे में प्रतिक्रिया आई है। आधिकारिक स्टेटमेंट के मुताबिक, 'ये मामला सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स के पास जाएगा और उनकी राय ली जाएगी। जहां तक सही उत्तर का सवाल है तो इसकी उत्तर कुंजी बोर्ड द्वारा रिलीज कर दी गई है। अगर एक्सपर्ट्स द्वारा ये साबित कर दिया जाता है कि पैसेज में कई तरह के उत्तर हो सकते हैं तो बोर्ड द्वारा वो एक्शन लिया जाएगा जो विद्यार्थियों के हित में होगा।' 

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बोर्ड ने तो अपनी तरफ से अपनी राय दे दी, लेकिन अब एक बार फिर से ऐसा किस्सा ये सवाल उठाता है कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं और किस तरह की बातें आने वाली पीढ़ी को सिखाई जा रही हैं। अगर देखा जाए तो महिलाओं की तरक्की को लेकर शुरुआत से ही बहुत ज्यादा विवाद हुए हैं और बहुत संघर्ष के बाद अब हम इस लेवल पर आ पहुंचे हैं, लेकिन जिस तरह का दबाव अभी भी कई महिलाओं को झेलना पड़ता है वो बिल्कुल समझ के परे है।  

ये सब कुछ हमारे समाज में सिखाया जाता है जो गलत है। इसपर तीखी प्रतिक्रिया आ रही है और ये होनी भी चाहिए। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।