90's के दिनों की बात ही निराली थी जहां छोटी-छोटी चीज़ों के बहुत मायने हुआ करते थे। वो कैसेट टेप का इस्तेमाल करना, मैजिक रबर का मालिक बनकर खुद को अमीर समझना, वो कैम्पस शूट में पॉलिश करना और हमारा बजाज गाते हुए स्कूटर पर सैर करना। 90's के बच्चों को शायद उस दौर के एड्स की सारी लाइनें भी याद होंगी और अब 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' के दौर से आगे बढ़कर हम भले ही रैप की दुनिया में आ गए हों पर कुछ बात तो थी उन यादों में जो हमें खास लगती है। 

पर एक बात जो 90's की अच्छी नहीं थी वो ये कि उस दौर में जेंडर को लेकर भेदभाव बहुत किया जाता था। पुरुष माचो मैन होते थे और एड्स भी उसी तरह से बनाए जाते थे। 90 के दशक का कैडबरी वाला वो एड आपको याद है जहां एक क्रिकेट फील्ड पर लड़का विनिंग 6 मारता है और लड़की नाचते हुए कैडबरी खाते हुए सेलिब्रेट करती है?

उस एड में शायद 90's में हमें कोई दिक्कत नहीं हुई थी, लेकिन कहीं न कहीं फेमिनिज्म पर चलती डिबेट और लड़कियों के हर मौके पर आगे बढ़ने की बातों को लेकर अब ये जरूर लगने लगा है कि महिला प्रधान एड्स भी होने चाहिए जहां वो सिर्फ किसी ग्लैमर का हिस्सा ना हों। शायद यही कारण है कि कैडबरी ने अपने उसी विंटेज एड को दोबारा से लॉन्च किया है और इस बार जेंडर रोल्स रिवर्स कर दिए गए हैं। 

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1990 और 2021 में अंतर-

1990 वाले एड में जहां लड़की कैडबरी लेकर भागती है वहीं इस बार लड़का उसका रोल निभा रहा है। इसी के साथ, वो लड़की है जो विनिंग सिक्सर शॉट लगाकर सभी को इम्प्रेस कर रही है। हो भी क्यों ना, 'छोरियां छोरों से कम हैं के?' 

एक ओर जहां महिला क्रिकेट पर भी कई सारे सवाल उठते रहते हैं और अक्सर ये बात सामने आती है कि महिला क्रिकेट को पुरुष क्रिकेट की तरह ना तो मीडिया कवरेज मिलता है और ना ही उसपर उतना ध्यान दिया जाता है। यही नहीं अगर सिर्फ पुरुष खिलाड़ियों और महिला खिलाड़ियों की फीस का अंतर देख लिया जाए तो ही आप समझ जाएंगे कि ये कितना बड़ा है। ऐसे में कैडबरी का ये कदम बहुत ही सराहनीय लग रहा है। 

 

90 के दशक की फील के साथ नया और यूनिक एड लाने के लिए कैडबरी को बधाई तो देनी होगी। जेंडर रोल्स को लेकर जागरुकता और महिलाओं को उनका हक दिलाने की मुहिम धीरे-धीरे तेज़ हो रही है और ऐसे में किसी ग्लोबल ब्रांड का इस तरह से अपने एड को बदलना यकीनन बहुत अच्छा है।  

#GoodLuckGirls- 

इस एड की सबसे अच्छी बात ये है कि ये एड एक हैशटैग #GoodLuckGirls से खत्म हो रहा है। यकीनन आखिर का ये ट्विस्ट भी बहुत ही शानदार है और इसे पसंद करना लाजमी है। यही नहीं नए एड में ज्यूरी मेंबर की जगह भी एक महिला बैठी है जो पहले वाले एड में एक पुरुष की जगह थी। अब तो आप समझ ही गए होंगे कि इसमें कितनी बारीकी देखी गई है। ये एड महिला सशक्तिकरण की एक झलक तो दिखा रहा है। हालांकि, महिलाओं को लेकर इतना बदलाव आने में 30 साल लग गए ये थोड़ी गलत बात है।

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कैडबरी का ये एड सोशल मीडिया पर हो गया वायरल- 

जब कुछ अच्छा किया जाता है तो उसका वायरल होना बनता है। कैडबरी की इस पहल की तारीफ सोशल मीडिया पर भी हो रही है और ऐसे में चलिए कुछ सोशल मीडिया कमेंट्स भी देख लेते हैं- 

 

 

हालांकि, कुछ लोगों को लगता है कि पुराने एड के साथ छेड़छाड़ करना अच्छा नहीं था और सोशल मीडिया पर आपको दोनों तरीके के कमेंट्स मिल जाएंगे पर अगर सिर्फ मेरी बात की जाए तो मुझे ये एड बहुत अच्छा लगा और यकीनन इसे पसंद करना लाजमी है। 90's की होने के कारण 'क्या स्वाद है जिंदगी का' मेरी एक मीठी याद थी, लेकिन कैडबरी ने उसे नए पैकेट में दे दिया है जो मुझे अच्छा लगा।  

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