इस वर्ष दिवाली का त्‍योहार 27 अक्‍टूबर को है। हर वर्ष की तरह लोग दिवाली को धूम-धाम से मनाने के लिए तैयार हैं। आपको बता दें कि दिवाली से 1 दिन पहले भी एक त्‍योहार पड़ता है अमूमन लोग इसे छोटी दिवाली के नाम से जानते हैं मगर, उत्‍तर भारत में इस त्‍योहार को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। आइए जानते हैं इस त्‍योहार से जुड़ी मान्‍यताओं के बारे में। 

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शुभ मुहूर्त 

सूर्य अस्‍त होने के बाद आप घर की किसी नाली पर पुराने दिए में तिल का तेल भरकर उसे जलाएं। एक नया और कच्‍च दिया आपको घर के मुख्‍य द्वार पर भी जलाना चाहिए। 

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क्‍या है मान्‍यता 

ऐसी मान्‍यता है कि द्वापर युग में भगवान श्री कृष्‍ण ने नरकासुर नाम के राक्षस को इसी दिन मारा था और नरकासुर की कैद से भगवान कृष्‍ण ने सोलह हजार एक सौ कन्‍याओं को रिहा करा कर उन सभी को अपनी रानी बना लिया था। आपने कई बार सुना होगा कि भगवान श्री कृष्‍ण की सोलह हजार रानियां थी। इस बात का संबंध नरक चतुर्दशी से ही है। 

कौन था नरकासुर 

नरकासुर के बारे में बहुत कम लोगों को पता है मगर, जब भगवान विष्‍णु ने जंगली सुअर का अवतार लिया था तब नरकासुर उनका पुत्र था। उसे ब्रह्मा जी की तपस्‍या करने से कभी भी किसी के भी हाथों से न मरने का वरदान प्राप्‍ता था। मगर, वह नरक में रहने के कारण असुर सोच वाला बन गया और लोगों को देवताओं को तंग करने लगा। तब द्वापर युग में भगवान कृष्‍ण ने उसके अत्‍याचारों से लोगो को मुक्ति दिलाने के लिए उसे मार दिया था। पंडित जी से जानें कि कौन से शुभ मुहूर्त में आपको करनी चाहिए Dhanteras Shopping

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नरक चतुर्दशी कथा

इस त्‍योहार से कथा जुड़ी है। लोग इस दिन को बुराई पर अच्‍छाई की जीत की खुशी में भी मनाते हैं। विष्‍णु पुराण में लिखी  कथा के अनुसर,

‘ एक समय की बात है रंति देव नामक एक धर्मात्मा राजा थे। जाने-अनजाने में भी कभी उनसे कोई पाप नहीं हुआ था। हमेशा वो संसार का भला करने में लगे रहते थे। लेकिन सदैव सात्विक जीवन जीने के बावजूद भी जब मृत्यु का समय आया तो उनके समक्ष यमदूत आ खड़े हो गए।  यमदूत को सामने देख राजा बोले हे ईश्वर, मैंने तो कभी कोई पाप नहीं किया। फिर आप मुझे लेने क्यों आए हो क्योंकि आपके यहां आने का मतलब है कि मुझे नरक जाना होगा। आप मुझ पर कृपा करें और बताएं कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है। यह सुनकर यमदूत ने कहा कि- हे राजन एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण भूखा लौट गया था, यह उसी पाप का फल है। वजह के बारे में पता चलने के बाद राजा ने यमदूत से प्रार्थना की, ‘प्रभु कृपा कर मुझे एक वर्ष का समय दे दीजिए मैं अपने पाप कर्मों का धरती पर ही प्रायश्चित करना चाहता हूं।’  कब है गणेश-लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त, पंडित जी से जानें
 
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तब यमदूतों ने राजा को एक वर्ष का समय दे दिया। राजा अपनी नरक लोक को जाने की समस्या लेकर ऋषियों के पास पहुंचे और उन्हें अपनी सारी कहानी सुनाकर उनसे इस पाप से मुक्ति का उपाय पूछा। तब ऋषि ने उन्हें बताया कि कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी आने पर आप उसका व्रत करें। उस दिन ब्राह्मणों को भोजन करवा कर। उनकी सेवा करें। और उनके प्रति हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें। राजा ने वैसा ही किया जैसा ऋषियों ने उन्हें बताया था।  इस प्रकार राजा पाप मुक्त हुए और यमदूतों और नरक से दूर हो। विष्णु लोक अथार्त बैकुण्ठ लोक में स्थान प्राप्त हुआ। उस दिन से पाप और नर्क से मुक्ति हेतु पृथ्वी पर कार्तिक चतुर्दशी के दिन का व्रत प्रचलित हो गया।’

पूजा विधि 

नरक चतुर्दशी के दिन आपको सुबह जल्‍दी उठकर स्‍नान करना चाहिए। इसके बाद आपको पुरे शरीर में उबटन लगा कर शरीर के नरक को साफ कर लेना चाहिए। नरक चौदस की शाम को ढेर सारे दिए जलाने चाहिए और एक दिया आपको नाली के पास भी चलना चाहिए। क्‍यों इस‍दिन भगवन कृष्‍ण ने सोलह हजार एक सौर कन्‍याओं को अपनी रानी बनाया था। इसके साथ ही आपको रात के समय घर के सबसे बुजुर्ग आदमी को दिया जला कर पूरे घर में घूमना होता है और फिर दिए को घर से बाहर रखना चाहिए। इसे यम दिया कहते हैं। इस दौरान बाकी सारे परिवार के सदस्‍यों को घर के अंदर ही रहना होता है। कहते हैं कि इस दिन जो दिया जलाया जाता है वे पितरों के लिए भी होता है इससे पितरों को मोक्ष प्राप्‍त होता है।