कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो पढ़ाई से पूरी तरह विमूख होते हैं, जिन्‍हें पढ़ना-लिखना बिल्‍कुल अच्‍छा नहीं लगता। पढ़ाई के नाम से वो ऐसे भागते हैं जैसे उन्‍हें कितना बड़ा काम करने को दे दिया गया हो। कई बार ऐसा होता है कि माता-पिता को बच्चे को पढ़ाने का सही तरीका पता नहीं होता है और उन्हें लगता है कि बच्चे को डांट या मार देना ही एक ऐसा विकल्प है जिससे डरकर वह पढ़ाई करने लगेगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई में यह सही तरीका है। जी नहीं, यह सही तरीका नहीं है।

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अगर आपके बच्चे को पढ़ाई करना बिल्कुल भी नहीं पसंद हैं उसे पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने का सबसे पहला स्टेप यह होना चाहिए कि सबसे पहले आप उसकी समस्या को पहचानें, जैसे कि बच्चे को पढ़ाई के दौरान कौन सा सब्जेक्ट अच्छा लगता है और कौन सा नहीं लगता, उसे कौन सी चीज याद करने में दिक्कत होती है, क्‍या उसे लिखने में परेशानी होती है। जब तक आप पढ़ाई को लेकर उसकी समस्या को नहीं समझेंगी तब तक आप पढ़ाई को लेकर उसके नकारात्मक रवैये को नहीं समझ पाएंगी। एक बार जब आप समस्या की जड़ तक पहुंच जाएंगी तो फिर आप उसका समाधान भी निकाल लेंगी। अगर आपके बच्चे का भी दिल पढ़ाई में नहीं लगता और उसे भी पढ़ना-लिखना पसंद नहीं है, तो कुछ आसान उपायों से आप उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।

  • बच्चों को पढ़ाने से पहले यह बात अपने दिमाग में बैठा लें कि उनको पढ़ाने का काम में धैर्य वाला काम है, इसलिए आपको अपना धैर्य बनाएं रखना होगा। ऐसा हो सकता है कि बच्चा आपसे एक ही सवाल कई बार करे और आपको उसे कई बार समझाना पड़े।
  • बच्चे को अपनी किताबें, पेपर्स और असाइमेंट्स को व्यवस्थित रखना सिखाएं। शुरूआत के कुछ दिनों के बाद आपकी मदद से उसे ऑर्गनाइज़्ड रहने की आदत पड़ जाएगी। कहीं आपका बच्चा तनावग्रस्त तो नहीं, पहचानें कुछ इस तरह

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  • बच्चे को डेली कम से कम बीस मिनट तक पढ़ने की आदत डालवाएं। डेली पढ़ने से ना केवल बच्चे का विकास होगा, बल्कि उसकी शब्दावली में भी वृद्धि होगी और उसका लर्निंग प्रोसेस बढ़ेगा। बच्चे को हमेशा सही टाइम पर पढ़ना, ब्रेक लेना और सोना सिखाएं। बिना ब्रेक के लगातार पढ़ते रहने से वो तनावग्रस्त हो सकते हैं।
  • बच्चे को पढ़ाई के बारे में उसकी क्‍या राय है ये व्यक्त करने का हक दें और उसे अपनी राय व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करें, चाहे आप उसकी बात से सहमत हों या ना हो, उसे सुने जरूर।

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  • बच्‍चे को पढ़ाने से पहले उनका लर्निंग स्टाइल जान लें। लर्निंग स्टाइल यानि विज़ुअल, ऑडियो, वर्बल या लॉजिकल इत्‍यादि। कुछ बच्चे विज़ुअल देखकर ज्‍यादा सीखते हैं, तो कुछ ऑडियो को सुनकर चीजों को जल्‍दी याद कर लेते हैं। जो ऐसा स्टाइल आसानी से समझता हो उसे उसी स्‍टाइल में सिखाएं। स्कूल के बाद बच्चे नहीं होंगे बोर, अगर अपनाएंगी यह टिप्स
  • पढ़ाई में बच्चे को आपके मदद की जरूरत होती है इसलिए लर्निंग प्रोसेस में उनकी मदद जरूर करें। उन विषयों के बारे में जानने का कोशिश करें करें, जिनमें बच्चे की रुचि है, और साथ ही उन विषयों के बारे में भी जानने की कोशिश करें जिनमें उनकी रुचि नहीं है।
  • बच्चे के परफॉर्मेंस पर नहीं बल्कि उसके लर्निंग प्रोसेस पर ध्यान केंद्रित करें। इस बात का ध्‍यान रखें कि अगर बच्चा एक बार चीजों को अच्छी तरह से सीख-समझ लेगा, तो उसके परफॉर्मेंस में अपने आप सुधार होने लगेगा। बच्चों की 10 बुरी आदतें क्या हैं एक्सपर्ट से जानें

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  • बच्चे की कमजोरियों पर निराश होने की बजाय उसे और सीखने के लिए प्रेरित करें और उसके स्ट्रेंथ पर फोकस करें। बच्चे की मदद के लिए हमेशा तैयार रहें और उनसे पूछती रहें कि क्या उसे आपकी कोई मदद चाहिए।