आज से देशभर में गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय बताया गया है, इसलिए किसी भी शुभ अवसर पर गणपति का पूजन सबसे पहले किया जाता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का पुराणों में विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन से गणेशोत्सव का शुभारम्भ होता है और यह पूरे देश में 10 दिनों तक बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है।

मुंबई शहर में गणपित महोत्सव बड़े स्तर पर मानाया जाता है। वैसे तो देशभर में कई बड़े और लोकप्रिय गणेश मंदिर हैं, लेकिन मुंबई के सिद्धिविनायक और लालबागचा राजा का अपना अलग ही महत्व है। इस बार लालबागचा राजा विष्णु के अवतार में विराजमान हुए हैं। हालांकि कोरोना की वजह से मंदिर में जाकर दर्शन करने पर रोक है, लेकिन आप उनके ऑनलाइन दर्शन कर सकते हैं। आज हम आपको लालबागचा राजा के बारे में कुछ रोचक तथ्य बताने जा रहे हैं।

विष्णु के अवतार में आए हैं लालबागचा राजा

lalbaugcha raja in vishnu avtar mumbai

मुंबई के सबसे अधिक देखे जाने वाले गणेश मंडल, लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल में भगवान गणेश की प्रतिमा बैठा दी गई है। इस वर्ष, गणेश की मूर्ति को भगवान विष्णु के अवतार में है।

मनोकामनाएं पूरी करते हैं लालबागचा राजा

ऐसा माना जाता है कि लालबागचा राजा एक नवसाचा गणपति हैं (जिसका अर्थ है जो सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं) और हर साल यहां 10 दिनों के दौरान कई लाख श्रद्धालू आते हैं।

चार साल पहले भी विष्णु के दूसरे अवतार में देखे गए थे भगवान 

साल 2017 में भी भगवान गणेश को विष्णु के दूसरे अवतार कोरमा अवतार में बैठाया गया था। भगवान की मूर्ति जिस कछुए के सिंहासन पर बैठी हुई थी, उसे बॉलीवुड के फेमस आर्ट डायरेक्टर और प्रोडक्शन डिजाइनर नितिन चंद्रकांत देसाई ने डिजाइन किया था। 

भगवान से वादा करने पर दी गई थी परमानेंट प्लेस

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कहा जाता है कि 1932 में पेरु चॉल मार्केटप्लेस बंद हो गई थी और उसी के चलते यहां रहने वाले मछुआरों और विक्रेताओं, जिन्हें अपना सारा सामान, सारा माल बेचना पड़ा था, ने बाजार फिर से बन जाने पर कसम खाई थी कि वह भगवान गणेश को एक स्थायी स्थान देंगे।

दो साल बाद मिली थी भगवान गणेश को जगह

बाजार बनने के बाद, यहां रहने वालों ने अपने वादे को पूरा किया और मछुआरों और ट्रेडर्स ने ठीक 2 साल बाद यानी 12 सितंबर 1934 में गणेश जी की प्रतिमा यहां स्थापित की थी।

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लालबागचा राजा के दर्शन के लिए लगती हैं दो लाइन

लालबागचा राजा के दर्शन करने के लिए यहां हर बार दो लाइन लगती हैं- नवसाची लाइन और मुख दर्शनाची लाइन। पहला उन लोगों के लिए है जो अपनी इच्छाओं को पूरा करना चाहते हैं, जहां उन्हें मंच पर जाना है, देवता के चरणों को कठिन बनाना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है। दूसरा भक्तों को थोड़ी दूर से मूर्ति की एक झलक पाने की अनुमति देता है।

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देश में सबसे लंबा विसर्जन जुलूस यहीं आयोजित होता है

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दिलचस्प बात यह है कि मुंबई का लालबागचा राजा देश में सबसे लंबा विसर्जन जुलूस आयोजित करता है। विसर्जन की प्रक्रिया सुबह 10 बजे शुरू होती है और अगले दिन सुबह समाप्त होती है। दूसरा सबसे लंबा विसर्जन जुलूस अंधेरीचा राजा का है।

इस बार भले ही आप भगवान के दर्शन सामने से न कर पाएं, लेकिन आप ऑनलाइन दर्शन कर सकते हैं। लालबागचा राजा की वेबसाइट पर सारी जानकारी दी गई है। आप वहां से आरती और दर्शन की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

हमें उम्मीद है आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा। गणेश चतुर्थी की आपको ढेरों शुभकामनाएं। भगवान गणेश आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी करें। इसी तरह के रोचक लेख पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।

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