कल से शारदीय नवरात्रि शुरू होने वाली हैं। इन दिनों कुछ लोग अपने घर में कलश स्थापना करते हैं और जवारे भी बोते हैं। किसी भी पूजा में कलश स्थापना का महत्‍व क्‍या है, यह तो हम आपको पहले भी बता चुके हैं मगर क्‍या आपने कभी यह जानने की कोशिश की है कि नवरात्रि में जवारे ही क्यों बोए जाते हैं और कोई अन्य अनाज क्‍यों नहीं बोया जाता है? 

इस बारे में हमने भोपाल के ज्योतिषाचार्य एवं पंडित विनोद सोनी से बात की। वह कहते हैं, 'सृष्टि की जब शुरुआत हुई थी, तब अनाज के नाम पर सबसे पहली फसल जो की बोई गई थी, वह जौ की थी। पृथ्वी को हमने मां का दर्जा दिया है और धरती पर उगी पहली फसल यानि कि जवारे को शास्त्रों में मां का ही एक रूप माना गया है।'

जाहिर है, इतने पवित्र अनाज को बोते वक्त कुछ बातों विशेष ध्यान रखना बहुत जरूरी हो जाता है। पंडित जी भी जवारे से जुड़े कुछ रोचक तथ्‍य और इसे बोने के जरूरी नियम बताते हैं। 

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कैसे बोए जाते हैं जवारे

अलग-अलग घरों में जौ बोने का तरीका भी अलग-अलग होता है। कुछ लोग बालू को एक स्थान पर इकट्ठा करते हैं और उसमें जौ डाल देते हैं। कुछ ही दिनों में बालू में हरी-हरी घास उगने लगती है। वहीं कुछ लोग अलग से मिट्टी के पात्र में बालू या मिट्टी डालकर जौ बोते हैं। पंडित जी कहते हैं, 'जिस स्थान पर आप जौ बोने जा रहे हैं, उसे पहले साफ करें और वहां चावल डालें। इसके बाद आप मिट्टी का एक पात्र रखें। पात्र को पहले ही पानी से साफ कर लें। इसके बाद आपको पात्र में किसी पवित्र नदी की बालू डालनी चाहिए। बालू में कंकड़-पत्थर न हो, यह आप पहले ही देख लें। इसके बाद आप बालू में जौ के दाने डालें। इस तरह जौ बोने की प्रक्रिया पूर्ण हो जाएगी। अब आप चाहें तो इसी पात्र में कलश स्थापना कर सकते हैं, या फिर अलग से कलश स्थापना करें। अब आपको नौ दिन जौ वाले पात्र में नियमित जल अर्पित करना है।'

जौ बोते वक्त इन बातों का रखें ध्‍यान 

  • जौ का पात्र वहीं रखें, जहां आपने कलश स्थापना की है और देवी जी की प्रतिमा या फोटो रखी है। 
  • जौ के पात्र में आपको रोज जल अर्पित करना है, मगर जल साफ होना चाहिए और बहुत कम मात्रा में ही इसे अर्पित करें। 
  • अगर आपके घर में चूहे हैं तो जौ के पात्र को ऐसे स्थान पर या ऐसी व्यवस्था के साथ रखें कि चूहे वहां तक न पहुंच सके। दरअसल, चूहे जौ को खा जाते हैं और फिर जवारे नहीं उगते हैं। 
  • जौ जब अंकुरित होने लगे और घास लंबी होने लगे, तो मौली की मदद से फैली हुई घास को बांध दें। 
 
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न करें ये काम 

अगर आपने घर पर नवरात्रि के दौरान जौ बोए हैं, तो आपको इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए- 

  • पति-पत्‍नी ब्रह्मचर्य का पालन करें। 
  • घर में किसी भी प्रकार का क्लेश न हो। 
  • घर की साफ-सफाई का ध्यान रखें। 
  • सूर्योदय के साथ ही देवी और जवारों की पूजा करें। 
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शुभ-अशुभ संकेत देते हैं जवारे 

  • अंकुरित जौ का रंग अगर नीचे से आधा पीला और ऊपर से आधा हरा है, तो साल का आधा समय अच्छा बीतेगा और अच्‍छा समय खराब। 
  • यदि जौ का रंग नीचे से हरा और ऊपर से पीला है, तो साल का शुरुआती समय ठीक होगा और आखिरी का समय परेशानियों से भरा हो सकता है। 
  • यदि जौ सफेद या हरे रंग की उगती है, तो यह शुभ संकेत है। (जानें शारदीय नवरात्रि की तिथि)
  • अंकुरित होने के बाद जौ की घास अगर झड़ रही है या टूट रही है तो यह अशुभ संकेत है।

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