शिव नादर भारतीय व्यवसाय के सबसे अग्रणी व्यक्तियों में से एक हैं। वह HCL टेक्नोलॉजी, जो एक ग्लोबल आईटी सर्विसेज कंपनी है ,उसके चेयरपर्सन होने के साथ मुख्य रणनीति अधिकारी भी हैं। दिल्ली NCR सहित भारत के कई शहरों में HCL के कार्यालय मौजूद हैं। वह भारत में कंप्यूटर सिस्टम उद्योग स्थापित करने वाले एकमात्र भारतीय हैं । वह भारत के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक और फोर्ब्स मैगज़ीन के अनुसार एक अरबपति हैं जिनकी कुल संपत्ति 14.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। उन्होंने 1970 के दशक के मध्य में HCL प्रौद्योगिकियों की स्थापना की और तीन दशकों में IT हार्डवेयर कंपनी को IT उद्यम में बदल दिया। 2008 में आईटी उद्योग में उनके प्रयासों के लिए उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। आइए आपको बताते हैं इनके जीवन से जुड़ी कुछ और बातें -

शुरूआती जीवन 

शिव नादर का जन्म 1945 में भारत के सबसे दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में श्रमिक वर्ग में हुआ था। इनके पिता का नाम  शिवसुब्रमण्यन और माता का नाम वामसुंदरी नादर था।  उनकी मां एस पी आदिनाथ की बहन हैं, जिन्होंने समाचार पत्र दीना थांथ शुरू किया था। एस.पी. आदिनाथ शिव नादर के मामा थे। वह एक राजनीतिज्ञ, वकील और मंत्री थे। प्रसिद्ध तमिल उपन्यासकार रमानीचंद्रन शिव नादर की इकलौती बहन हैं। 

एजुकेशन 

शिव नादर ने द अमेरिकन कॉलेज, मदुरै से स्नातक और PSG कॉलेज ऑफ़ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की। उन्होंने 1967 में पुणे में वालचंद ग्रुप के कूपर इंजीनियरिंग में अपना करियर शुरू किया।

कब हुई शादी 

shiv nadar ()

शिव नादर की किरन  नादर से एक विज्ञापन एजेंसी में मुलाक़ात हुआ , किरन  वहां काम करती थीं। उन्होंने किरन से मिलने के बाद उनसे शादी कर ले। किरण  पेशे से भारत में एक अनुबंध ब्रिज खिलाड़ी है। किरण, अपने पति के साथ, विभिन्न गैर सरकारी संगठनों और संगठनों के साथ शामिल हैं जो भारत में एक बेहतर शिक्षा प्रणाली का समर्थन करते हैं और वीमेन पापुलेशन को सशक्त बनाते हैं। वह SSN ट्रस्ट, रसजा फाउंडेशन, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PFHI) और राजीव गांधी फाउंडेशन का प्रबंधन करती है। इसके साथ ही वह शिव नादर फाउंडेशन के लिए एक ट्रस्टी के रूप में कार्य करती हैं और उन्होंने किरन नादर संग्रहालय की स्थापना भी की है। किरन को एक शौकीन कला संग्राहक माना जाता है। 

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कैसे की करियर की शुरुआत 

कुछ साल पहले फो‌र्ब्स की सूची में शामिल धनी भारतीयों में से एक, शिव नादर 1968 तक तमिलनाडु की डीसीएम कंपनी में काम करते थे। उन्होंने अपने साथ के छह लोगों एक कंपनी खोलने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा एक ऐसी कंपनी जो ऑफिस इक्विपमेंट्स बनाए उसकी शुरुआत की जाए । फलत: 1976 में एचसीएल कंपनी की नींव पड़ी। 1982 में जब आईबीएम ने एचसीएल को कंप्यूटर मुहैया कराना बंद कर दिया, तब नादर और उनके साथियों ने पहला कंप्यूटर भी बना लिया। फिलहाल, हालत यह है कि एचसीएल की 80 फीसदी आमदनी कंप्यूटर और ऑफिस इक्विपमेंट्स से ही होती है। फरवरी 1987 में चर्चित पत्रिका 'टाइम' ने लिखा था, पूरी दुनिया नादर की सोच और भविष्य के लिए तैयार किए गए नेटवर्क को देखकर आश्चर्यचकित और मुग्ध है।

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कैसे की HCL कंपनी की शुरुआत 

अगस्त 1976 में उन्होंने एचसीएल इंटरप्राइजेज की स्थापना की, तो 1991 में वे एचसीएल टेक्नोलॉजी के साथ बाजार में एक नए रूप में हाजिर हुए। पिछले तीन दशक में भारत में तकनीकी कंपनियों की बाढ़-सी आ गई है, लेकिन एचसीएल को उत्कर्ष तक ले जाने के पीछे शिव नादर  का नेतृत्व ही प्रमुख है। नादर  की कंपनी में बड़े पद तक पहुंचना भी आसान नहीं होता। शिव ने एक बार कहा था, मैं नेतृत्व के अवसर नहीं देता, बल्कि उन लोगों पर निगाह रखता हूं, जो कमान संभाल सकते हैं।

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कितने हैं बच्चे 

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शिव और किरन नादर की एक बेटी हैं जिनका नाम रौशनी नादर है। वह वर्तमान में CEO और कार्यकारी निदेशक के रूप में HCL का कार्य भार संभाल रही हैं। रोशनी ने केलॉग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से स्नातक किया और शिखर मल्होत्रा से शादी की। रोशनी नादर का एक बेटा भी है जिसका नाम अरमान है। 

मुख्य काम 

  • HCL ने 1980 के दशक में माइक्रो कंप्यूटर का उत्पादन शुरू किया, उस समय इसका एकमात्र वैश्विक समकक्ष स्टीव जॉब का मैकिन्टोश था। जब भारत का नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) 1992 में स्थापित किया गया था, HCL ने एक इज़राइली कंपनी के साथ साझेदारी करके AT & T के खिलाफ प्रतिस्पर्धा की और वित्तीय संस्था के बुनियादी ढांचे को लागू करने और बाद में प्रबंधन किया। शिव नादर, अजय चौधरी, एचसीएल इन्फोसिस्टम्स के चेयरमैन, अर्जुन मल्होत्रा, सुभाष अरोड़ा, योगेश वैद्य और डीएस पुरी ने माइक्रोविक्स के साथ टेलीविजनल कैलकुलेटर को "टेलीविस्टा" के ब्रांड नाम से बेचने के लिए शुरुआत की।
  • उन्होंने एचसीएल की शुरुआत 1976 में रुपये के शुरुआती निवेश के साथ की थी। छह संस्थापकों में से 187,000। कंपनी को अप्रत्याशित लाभ मिला जब आईबीएम जैसी कंपनियों ने तत्कालीन औद्योगिक मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस द्वारा शामिल नीतियों के कारण देश छोड़ दिया, शिव नादर को भारत में अपने माइक्रो कंप्यूटर के लिए एक व्यापक बाजार स्थान प्रदान किया।
  • 1980 में शिव नादर ने आईटी हार्डवेयर बेचने के लिए सिंगापुर में अपने सुदूर पूर्व कंप्यूटर की शुरुआत के साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रवेश किया। शिव नादर ने तीन अन्य लोगों के साथ एनआईआईटी के साथ शुरुआत की, जो निवेशकों को कंप्यूटर शिक्षा बाजार की तत्कालीन जरूरत को संबोधित करते हुए काम करते थे। नादर इसका सबसे बड़ा शेयरधारक था। उन्होंने 2003 तक NIIT में अपनी हिस्सेदारी रखी।
  • 1984 में शिव नाडार ने पर्सनल कंप्यूटर सॉल्यूशंस के विकास के साथ शुरू किया जिसे बिजीबी और यूनिक्स प्लेटफॉर्म आधारित समाधान कहा जाता है। आईटी हार्डवेयर व्यवसाय में, उनकी कंपनी ने एचसीएल कार्यालय स्वचालन नामक एक सहायक के साथ शुरू किया जो कार्यालय समाधान में भारत का नेता बन गया। 1987 तक, HCL ने 100 करोड़ का राजस्व अर्जित किया और इसे भारत की नंबर 1 कंपनी के रूप में स्थान दिया गया।

उपलब्धियां

  • जिस समय पूरे भारत में सिर्फ 250 कंप्यूटर थे, उस समय शिव नादर  ने एक टीम का नेतृत्व किया, जो आईटी उद्योग के विकास को बढ़ावा देने के बारे में सोच रही थी । 
  • 1978 में वैश्विक आईटी साथियों के रूप में एक ही समय में भारत का पहला पीसी डिजाइन करने से; बोइंग ड्रीम लाइनर के फ्लाइट मैनेजमेंट सिस्टम पर काम करने के लिए, एचसीएल ने समकालीन कम्प्यूटिंग के एक सच्चे नेता के रूप में काम किया ।
  • 1996 में नादर ने अपने पिता श्री शिवसुब्रमण्य नादर के नाम पर चेन्नई में SSN कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की स्थापना की। वह उत्साहपूर्वक कॉलेज के कार्यक्रमों और गतिविधियों में भाग लेते हैं।
  • मार्च 2008 में, नादर के एसएसएन ट्रस्ट ने ग्रामीण छात्रों के लिए यूपी में सात विद्याज्ञान स्कूल की स्थापना की घोषणा की, जहां यूपी के दस जिलों के सौ छात्रों को मुफ्त छात्रवृत्ति प्रदान करने की घोषणा की गई। 
  • 2005 में, नादर भारतीय बिजनेस स्कूल के कार्यकारी बोर्ड के सदस्य बने। शिव नाडर पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के गवर्निंग बोर्ड के सदस्य हैं। यह आधार रजत गुप्ता द्वारा "सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रशिक्षण, अनुसंधान और नीति विकास को मजबूत करने के लिए भारत में सीमित संस्थागत क्षमता के निवारण" के लिए शुरू किया गया था।

पुरस्कार

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  • 1995 में वह डाटाक्वेस्ट आईटी मैन ऑफ द ईयर बने।
  • 2005 में उन्हें CNBC बिज़नेस एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया गया।
  • 2006 में ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन-एआईएमए की मानद फैलोशिप प्राप्त की।
  • 2008 में भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।
  • 2009 में उन्हें एशिया प्रशांत में फोर्ब्स 48 हीरोज ऑफ फिलेंथ्रोपी के बीच गिना गया था।
  • 2010 में डेटाक्वेस्ट लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला।

इस तरह शिव नादर आज भारत के सबसे अमीर व्यवसाइयों में से एक हैं जो सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं , उनकी कड़ी मेहनत और काम करने की लगन उन्हें और लोगों से अलग बनाती है।

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Image Credit: pintrest