टीनएजर्स के लिए दोस्त बनाना मुश्किल नहीं है। बचपन से ही माता-पिता अपने बच्चों की दोस्ती करवाने और उन्हें व्यवहारिक ज्ञान देने के लिए बच्चों को आगे करते हैं। कई बार माता-पिता ये सब कुछ बच्चों के टीनएज में आने तक करते रहते हैं। पर कई बार बच्चों को इस उम्र में प्राइवेसी की जरूरत भी होती है। उन्हें ये विशेषाधिकार चाहिए होता है कि वो खुद से ही अपने दोस्त और अपना सर्कल चुन सकें। बल्कि एक तरह से देखा जाए तो ये बहुत जरूरी होता है कि आप अपने दोस्तों को चुनें।

यही उम्र होती है कि बच्चे अपने पैंपरिंग मोड को छोड़कर अपनी अलग पहचान दिखा सकते हैं। पर हमें दोस्त चुनते समय भी बहुत सतर्क होने की जरूरत रहती है। टीनएज बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है अपने भविष्य को निर्धारित करने का।

दोस्त और सहकर्मी-

जिन दोस्तों और सहकर्मियों को हम चुनते हैं वो पॉजिटिव और निगेटिव दोनों तरह से हमपर असर कर सकते हैं। चाहें जो भी हो, लेकिन व्यक्ति साथियों का दबाव जरूर महसूस करता है। अगर कोई ऐसे दोस्त चुनता है जो पॉजिटिव तरीके से गाइड कर सकें तो ये पॉजिटिव और हेल्दी दबाव होता है, लेकिन इसी जगह अगर दोस्ती गलत आचरण को बढ़ावा दे तो ये साफ तौर पर एक हेल्दी रिश्ता नहीं है।

teenage peer pressure

पॉजिटिव दोस्ती-

सही आचरण को बढ़ावा देने वाली दोस्ती के कुछ अच्छे उदाहरण ये हो सकते हैं।

- आपको फिजिकल एक्टिविटी के लिए बढ़ावा देना
- पढ़ाई के लिए प्रेरित करना और उसके लिए मदद भी करना
- हेल्दी डाइट लेने के लिए प्रेरित करना और दबाव बनाना
- व्यवहारिकता बढ़ाने में मदद करना और अच्छे आचरण की ओर बढ़ाना

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निगेटिव दोस्ती-

निगेटिव दोस्ती के भी कुछ उदाहरण दिए जा सकते हैं,

- तंबाकू, एल्कोहॉल, ड्रग्स के इस्तेमाल जैसे काम करना
- डेटिंग करने या रोमांस करने के लिए प्रोत्साहित करना
- कपड़े, मौज-मस्ती के साधनों जैसे कुछ अनहेल्दी सोशल स्टेटस के लिए दबाव बनाना

ऐसे ही जो भी दोस्ती आप चुनते हैं वो पॉजिटिव और निगेटिव दोनों तरह से असर डाल सकती है। अधिकतर मामलों में आप उसी तरह की दोस्ती चुनने की कोशिश करते हैं जो आपके लिए आरामदायक हो, जहां पर सामने वाले इंसान से आपकी सोच मिलती हो। हालांकि, अगर दोस्ती ज्यादा प्रभावशाली बनने लगे और आपके कंफर्ट जोन को खत्म करने लगे तो दोस्ती के बारे में दोबारा सोचने की जरूरत है।

भले ही कई बार दोस्तों को चुनने में थोड़ी सी समस्या हो, लेकिन अगर आपने दोस्ती को टीनएज के लंबे समय तक चला लिया तो मुमकिन है कि आप वयस्क होने पर भी ऐसी दोस्ती या दोस्तों को ढूंढ पाएं जो लंबे समय तक आपके साथ रहें। ऐसे ही अगर आपको लगता है कि टीनएज के दौरान लंबी चलने वाली दोस्ती आप नहीं बना पाए हैं तो ऐसा आपके साथ वयस्क जीवन में भी हो सकता है।

सार (Conclusion)-

किशोरावस्था जिंदगी का बहुत ही अहम और प्रभावशाली समय होता है। ऐसे में दोस्तों का चुनाव ध्यान से करना चाहिए ताकि दोस्ती और भी ज्यादा मजबूत,  हेल्दी और ज्यादा लंबे समय तक टिकने वाली बन सके।

डॉक्टर सुप्रिया अरवारी (M.D, D.G.O) को उनकी एक्सपर्ट सलाह के लिए धन्यवाद।

Reference:
https://www.hhs.gov/ash/oah/adolescent-development/healthy-relationships/healthy-friendships/peer-pressure/index.html