साल 2020 ही नहीं बल्कि एक दशक समाप्‍त होने वाला है, हम आशा करते हैं कि आने वाले वर्ष अधिक सकारात्मक हो। साल के अंत में एक और आखिरी बात जो जल्द ही होने वाली है, वह चंद्र ग्रहण है, जोकि 30 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा पर पड़ रहा है। यह इस साल का चौथा चंद्रग्रहण भी है। इससे पहले ग्रहण 10 जनवरी, 5 जून और 4 जुलाई को था।

किस समय लगेगा चंद्र ग्रहण?

एक्‍सपर्ट का मानना है कि यह ग्रहण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और एशिया में दिखाई देगा और इसे नग्‍न आखों से देखने की कोशिश न करें। 

ग्रहण का आरंभ समय: दोपहर 1:02 बजे

ग्रहण का मध्यकाल: दोपहर 3:13 बजे

ग्रहण समाप्ति समय: शाम 5:22 बजे

lunar eclipse  inside

चंद्र ग्रहण का प्रभाव

यह चंद्र ग्रहण साल 2020 का अंतिम ग्रहण माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि यह रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि को प्रभावित करेगा, लेकिन यह अन्य सभी राशियों को भी प्रभावित कर सकता है। हालांकि वृष राशि के जातकों पर ग्रहण का सर्वाधिक प्रभाव देखने को मिलेगा। ग्रहण के दौरान वृष राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर आप सूतक काल के दौरान कहीं जाते हैं तो यह सुझाव दिया जाता है कि आप जप और ध्यान करें। हालांकि इस चंद्र ग्रहण के बारे में कहा जाता है कि सूतक काल मान्य नहीं होगा क्योंकि यह एक 'उपच्छाया' ग्रहण है। आइए उपच्‍छाया ग्रहण के बारे में भी जान लेते हैं।

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उपच्छाया चंद्र ग्रहण क्या होता है?

उपच्छाया चंद्र ग्रहण ऐसी स्थिति को कहा जाता है, जब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया न पड़कर सिर्फ उसकी छाया पड़ती है। इसमें चंद्रमा पर एक धुंधली सी छाया नजर आती है। ऐसे मे पृथ्वी की उपच्छाया में प्रवेश करने से चंद्रमा की छवि धूमिल दिखाई देने लगती है। उपच्छाया वाले चंद्र ग्रहण नग्न आंखों से देखे नहीं जाते हैं इसलिए उनका पञ्चाङ्ग में समावेश नहीं होता है और कोई भी ग्रहण से संबंधित कर्मकाण्ड नहीं किया जाता है। केवल नग्न आंखों से देखे जाने वाले प्रच्छाया चन्द्र ग्रहण का धार्मिक कामों में विशेष महत्व होता है।

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कहां-कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण?

Timeanddate.com के अनुसार, साल का आखिरी चंद्र ग्रहण मौसम साफ होने पर यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, एशिया प्रशांत और अटलांटिक के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।

आकाशीय घटना सूर्यास्त से पहले और भारत में होने की बात कही जा रही है, इसलिए यह असम, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित कुछ राज्यों में दिखाई दे सकता है। हालांकि दिल्ली और मुंबई जैसे कुछ प्रमुख शहरों के लिए ग्रहण क्षितिज से नीचे होगा, इसलिए यह दिखाई नहीं देगा।

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सूतक का समय क्या रहेगा?

इस बार चंद्र ग्रहण में सूतक काल मान्य नहीं होगा। दरअसल यह उपच्छाया चंद्रग्रहण है। चूंकि ये ग्रहण आंखों से दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। सामान्य चंद्र ग्रहण में सूतक ग्रहण से 9 घंटे पहले लग जाता है जो ग्रहण समाप्ति के साथ ही खत्म होता है। हिंदू धर्म में सूतक काल का विशेष महत्व होता है। सूतक काल में किसी भी तरह का शुभ कार्य करने के लिए माना किया जाता है। सूतक काल सूर्य और चंद्र ग्रहण के दौरान लगता है। 

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