वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है। यह त्यौहार हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। पुराणों के अनुसार इस दिन को  महर्षि जमदाग्नि और माता रेनुका के यहां भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। इसलिए इस तिथि को परशुराम जयंती के रूप में मनाया जाता है। 

परशुराम को भगवान श्री हरि विष्णु के छठें अवतार के रूप में पूजा जाता है और श्रद्धा भाव से उनकी पूजा की जाती है। आइये नई दिल्ली के पंडित, एस्ट्रोलॉजी, कर्मकांड,पितृदोष और वास्तु विशेषज्ञ प्रशांत मिश्रा जी जानें अक्षय तृतीया का त्यौहार क्यों मनाया जाता है और इस साल कब मनाया जाएगा यह त्यौहार। 

क्यों मनाया जाता है अक्षय तृतीया 

akshay tritiya festivl

पौराणिक कथाओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन भगवान् परशुराम का जन्म हुआ था। परशुराम को श्री विष्णु के छठवें अवतार के रूप में माना जाता है। इस दिन पूरे श्रद्धा भाव से लोग भगवान परशुराम और श्री हरी की पूजा करते हैं और इस दिन की पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। 

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अक्षय तृतीया तिथि 

अक्षय तृतीया का पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस साल यानी साल 2021 को अक्षय तृतीया 14 मई, शुक्रवार को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग में अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त का गौरव प्राप्त है। इस दिन बिना किसी सोच विचार के सभी शुभ कार्य जैसे शादी ब्याह, घर खरीदना, गृह प्रवेश करना जैसे काम बिना विचार के भी किये जा सकते हैं। 

अक्षय तृतीया शुभ मुहूर्त

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  • शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि का आरंभ: 14 मई 2021 को प्रात: 05 बजकर 38 मिनट से.
  • तृतीया तिथि का समापन: 15 मई 2021 को प्रात: 07 बजकर 59 मिनट तक.
  • अक्षय तृतीया (अक्षय तृतीया पर न करें ये काम) पूजा मुहूर्त: प्रात: 05 बजकर 38 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक
  • अवधि: 06 घंटा 40 मिनट

अन्नपूर्णा माता की पूजा 

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अक्षय तृतीया की पावन तिथि को माता अन्नपूर्णा का अवतरण दिवस भी माना जाता है। इसलिए इस दिन पूरे पर ही मां अन्नपूर्णा का जन्मदिवस भी मनाया जाता है। इस दिन जरूरतमंदों की सेवा करने और उन्हें भोजन कराने से मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं और अपना आशीर्वाद भक्तों को देती हैं जिससे भक्तों का घर धन धान्य से भरा रहता है। अन्न पूर्ण माता को अन्न की देवी माना जाता है इसलिए अन्नपूर्णा माता के पूजन से कभी भी अन्न की कमी नहीं होती है। 

सोना खरीदना क्यों होता है शुभ 

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ऐसी मान्यता है कि इस दिन अगर हम भौतिक संसाधन जुटाते हैं तो घर हमेशा धन धान्य से भरा रहता है। भौतिक संसाधनों में  खरीदारी सबसे ज्यादा शुभ मानी जाती है और इस दिन खरीदा गया सोना आने वाली पीढ़ियों के साथ बढ़ता चला जाता है और कभी धन की कमी नहीं होती है। अक्षय तृतीया के दिन सूरज की किरणों में काफी तेज होता है। सूर्य का संबंध सोने से होता है। इसलिए  इस दिन सोना खरीदना शक्ति और ताकत का प्रतीक माना जाता है। यदि आप सोने की खरीदारी नहीं कर पाते हैं तब भी दान पुण्य अवश्य करें। 

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अक्षय तृतीया का महत्त्व 

पंडित प्रशांत मिश्रा जी के अनुसार इस दिन अन्नदान का विशेष महत्व है। अक्षय तृतीया के दिन शुभ कार्य करने का विशेष महत्व है।  इस दिन बिना किसी मुहूर्त के शुभ कार्य किये जाते हैं और इस दिन विष्णु पूजन तथा अन्नपूर्णा माता के पूजन से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। 

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