आमतौर पर नए वर्ष की शुरुआत जनवरी महीने से ही मानी जाती है, मगर हिंदी पंचांग के अनुसार चैत्र के महीने से नए वर्ष की शुरुआत होती है। यह महीना कई मायनों में महत्‍वपूर्ण होता है। चैत्र के महीने में न केवल मौसम में परिवर्तन होता है बल्कि कई नए त्‍यौहार भी आते हैं। इतना ही नहीं, इस मास में रहन-सहन और दिनचर्या में बदलाव लाना भी बेहद जरूरी होता है। यह न केवल सेहत के लिहाज से जरूरी है बल्कि आध्‍यात्मिक तौर पर भी यह महत्‍वपूर्ण होता है। 

उज्‍जैन के पंडित एवं ज्‍योतिषाचार्य मनीष शर्मा बताते हैं, ' हिंदू धर्म में नए वर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्‍ल पक्ष से होती है। यह इस वर्ष 13 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है। इस माह में कई धार्मिक घटनाएं घटी हैं, जो मनुष्‍य के जीवन पर अलग-अलग प्रभाव डालती हैं।'

तो चलिए पंडित जी से इस महीने का महत्‍व जानते हैं और यह भी जानते हैं कि चैत्र मास में क्‍या करना शुभ होता है- 

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कब से कब तक रहेगा चैत्र का महीना 

पंडित जी कहते हैं, 'चैत्र मास के आखिरी दिन यानी पुर्णिमा पर चंद्रमा चित्रा नक्षत्र में उपस्थित होता है इसलिए इस मास को चैत्र कहा गया है।' इस वर्ष चैत्र का महीना 29 मार्च से शुरू हो कर 27 अप्रैल तक चलेगा। आपको बता दें कि इस माह में कई त्‍यौहार आते हैं, इसलिए इसे भक्ति का महीना भी कहा जाता है। 

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चैत्र के महीने का धार्मिक महत्‍व जानें 

  • चैत्र के महीने को हिंदी कैलेंडर का पहला महीना माना गया है। पुराणों के मुताबिक चैत्र मास में भी ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना की थी। 
  • इसी माह में जगतपिता भगवान विष्‍णु के पहले मत्‍स्‍य अवतार का जन्‍म हुआ था। उनका यह जन्‍म वेदों की रक्षा के लिए हुआ था और वह एक मछली के रूप में जन्‍में थे। पृथवी पर जन्‍मे पहले नर मनु की नौका को भी भगवान विष्‍णु ने असुरों से बचाया था।
  • चैत्र माह में देवी शक्ति का अवतरण भी हुआ था। इसलिए इस माह में चैत्र नवरात्रि भी धूम-धाम से मनाई जाती है। यह पर्व 9 दिन मनाया जाता है। 
  • नवरात्रि के 9वें दिन भगवान विष्‍णु के सातवें अवतार भगवान श्रीराम का जन्‍मदिवस भी होता है। इसलिए इस पर्व को रामनवमी कहा जाता है। 
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चैत्र के महीने में जरूर करें ये 5 काम 

  1. चैत्र के महीने में नीम के पेड़ की पूजा करें और नीम की पत्तियों का सेवन भी करें। इस महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन शीतला अष्‍टमी का पर्व भी मनाया जाता है, जिसमें शीतला माता की पूजा की जाती है। इस वर्ष यह पर्व 4 अप्रैल को था। ऐसी मान्‍यता है कि चैत्र मास में यदि नियमित नीम के पेड़ में जल चढ़ाया जाए या फिर उसका सेवन किया जाए तो शरीर सेहतमंद रहता है और किसी भी प्रकार का संक्रमण या रोग नहीं लगता है। 
  2. चैत्र के महीने में सूर्य देव की पूजा करना बहुत ही शुभ होता है। इस माह में सूर्य की पूजा करने से आपके जीवन में ज्ञान का प्रकाश आता है। इतना ही नहीं, आपकी कुंडली में यदि सूर्य दोष है तो वह भी दूर हो जाता है। इस माह नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य दें। सूर्य को अर्घ्य देने के लिए आप जल में गुड़हल का फूल और लाल चंदन मिला सकते हैं। ऐसा करने से जीवन में अनुशासन आता है। मन में बुरे विचार और छल-कपट आना भी बंद हो जाते हैं। 
  3. इस माह आपको भगवान विष्‍णु की पूजा और आराधना भी जरूर करनी चाहिए। इस माह आपको भगवान विष्‍णु के मछली के स्‍वरूप की पूजा करनी चाहिए। मछली पालना और उसकी सेवा करना भी इस माह बहुत ही लाभकारी होता है। ऐसा करने से देवी लक्ष्‍मी भी प्रसन्‍न होती हैं, जिससे आर्थिक दशा भी सुधरती है। 
  4. चैत्र मास में देवी दुर्गा और उनके नौ रूपों की अराधना करना भी बेहद लाभकारी होता है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से शुरू हो रही है। इस दिन घट स्‍थापना का अलग ही महत्‍व होता है। ऐसी मान्‍यता है कि घट स्‍थापना करके आप 9 दिन के लिए अपने घर में देवी को रहने के लिए निमंत्रित करते हैं। ऐसा करने से दरिद्रता दूर होती है। 
  5. पंडित जी कहते हैं, 'महाभारत ग्रंथ के मुताबिक इस माह में केवल एक समय ही खाना खाना चाहिए और अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए। इससे शरीर और दिमाग दोनों में ताजगी बनी रहती है।'

 

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