20 रुपये के बाद जारी हुआ 100 रुपये का सिक्का, जानें Coin बनाने की क्या होती है प्रक्रिया?

Indian coin minting process: भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 100 रुपये का विशेष स्मारक सिक्का जारी किया गया है। इस सिक्के पर भारत माता का चित्र छपा हुआ है। बता दें कि इससे पहले 20 रुपये का सिक्का जारी किया गया था, जो कभी न कभी हम सभी के पास हाथ में जरूर आया होगा। अधिकतर लोगों को इस बारे में पता है कि नोटों की छपाई का काम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया देखता है। इसी प्रकार सिक्कों की बानाने का दायित्व पूरी तरह से भारत सरकार का है, जो यह काम भारत की चार टकसालों के माध्यम से करती है। अब ऐसे में मन में सवाल आता है कि आखिर सिक्के कैसे बनाया जाता है और इसकी प्रक्रिया क्या है। इस लेख में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि 100 रुपये या किसी भी अन्य सिक्के को टकसाल में छपने से पहले की किन-किन चरणों को पूरा करना होता है।
सिक्के को किस अधिनियम के तहत ढाला जाता है?
सिक्का निर्माण की प्रक्रिया एक अत्यंत जटिल और वैज्ञानिक विधि है, जिसे कॉइनएज एक्ट 1906 के तहत नियंत्रित किया जाता है। हालांकि भारतीय सिक्का अधिनियम, 2011 के पारित होने के बाद निरस्त हो गया, लेकिन इसका भारतीय मुद्रा और बैंकिंग इतिहास पर गहरा प्रभाव था।
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सिक्के किन-किन शहरों में बनाए जाते हैं?
भारत में सिक्के ढालने का काम भारत सरकार द्वारा किया जाता है, जिसके लिए देश में चार प्रमुख टकसालें बनाई गई हैं, जो मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, नोएडा में है।
कैसे पहचाने कौन सा सिक्का किस टकसाल में बनाया गया है?
अब ऐसे में मन में सवाल आता है कि कौन सा सिक्का कहां छापा गया है। इसकी पहचान कैसे करें। बता दें कि आपकी जेब में मौजूद सिक्का किस शहर यह खुद ही बताता है। इसके लिए आपको केवल सिक्के पर छपे चिन्ह पर गौर करने की जरूरत है। नीचे देखें
- अगर सिक्के पर हीरे यानी डायमंड का निशान है, तो वह मुंबई के टकसाल में बना है।
- वहीं अगर सिक्के पर सितारे का निशान है, तो इसका मतलब यह है कि वह हैदराबाद के टकसाल में बना है।
- अगर सिक्के पर डॉट का निशान है, तो इसका मतलब यह सिक्का नोएडा टकसाल में बना है।
- अगर सिक्के पर कोई निशान नहीं है, तो इसका अर्थ है कि वह कोलकाता में बना है।
सिक्के ढालने की क्या होती है पूरी प्रक्रिया?
- सबसे पहले, सिक्के के मूल्यवर्ग और डिजाइन के अनुसार धातु का मिश्रण तैयार किया जाता है।
- इसके बाद पिघली हुई धातु को ठंडा करके लंबी, पतली और समान मोटाई वाली पट्टियों के रूप में रोल किया जाता है।
- इसके बाद पंचिंग मशीन इन धातु की पट्टियों से सिक्के के आकार के गोल खाली टुकड़े काटती है।
- फिर गोलाकार खाली टुकड़ों को एक मशीन से गुजारा जाता है जो उनके किनारों को हल्का ऊपर उठा देती है। इस प्रक्रिया को रिमिंग कहते हैं।
- इसके बाद किनारों को ऊपर उठाने से सिक्का अधिक टिकाऊ बनता है और उस पर छपाई करते समय धातु फैलती नहीं है।
- फिर ब्लैंक्स को ढलाई के लिए नरम बनाने के लिए, उन्हें एक निश्चित तापमान पर गर्म किया जाता है।
- गर्म करने के बाद, ब्लैंक्स को केमिकल लिक्विड से साफ किया जाता है।
- साफ किए गए ब्लैंक्स को एक हाई-प्रेशर प्रेस मशीन के नीचे रखा जाता है। इस प्रेस में ऊपर और नीचे सिक्के का डिजाइन लगा होता है।
- मशीन के दबाव से धातु पर डिजाइन बन जाती है छाप देती है। इस प्रक्रिया में एक तरफ अशोक स्तंभ और दूसरी तरफ मूल्यवर्ग और बाकी डिटेल्स अंकित हो जाता है।
- इसके बाद आखिर में ढाले गए सभी सिक्कों को उनके वजन आकार और छपाई की गुणवत्ता को जांचा जाता है।
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