महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 8 मार्च को महिला दिवस मनाया जाता है। बता दें कि महिलाएं अब किसी भी मामले में पुरुषों से कम नहीं हैं। हालांकि कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां महिलाओं को आज भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है। समय के साथ बदलाव हुए हैं, जहां वह अपने अधिकारों के साथ-साथ शरीरिक परेशानियों को खुलकर बात कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ ऐसे भी मामले में हैं, जिन्हें दूसरों के सामने बात करने से कतराती हैं उन्हीं में से एक है माहवारी। जिसे आम भाषा में पीरियड कहते हैं, महिलाएं हर महीने पीरियड से जुड़ी तमाम तरह की परेशानियों का सामना करती हैं।

वहीं पीरियड को लेकर हरजिंदगी ने कुछ विशेषज्ञों से बात की। जिसमें स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ अरुणा कालरा,UnTaboo की संस्थापक अंजू किश,हेड ऑफ ऑपरेशन की संथापक मिनल खरे गेस्ट के रूप में नजर आईं। इस दौरान इन सभी ने न सिर्फ पीरियड बल्कि इससे जुड़ी गलत धारणाओं के बारे में भी खुलकर बात की।

पीरियड ब्लड नहीं होता गंदा

period blood

पीरियड को लेकर कई ऐसी धारणाएं हैं, लेकिन उसके बारे में बात करने से पहले यह यह समझना महत्वपूर्ण है कि क्या पीरियड ब्लड वास्तव में अशुद्ध है। मेंसुरेशन के बारे में ज्यादातर मिथक इसलिए हैं, क्योंकि बहुतों का मानना है कि महिला की योनि से निकलने वाला खून अशुद्ध होता है। खैर ऐसा नहीं है बल्कि खून उपयोगी है और यह कई बीमारियों का इलाज कर सकता है।

23 सालों से महिलाओं का इलाज कर रहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ अरुणा कालरा ने बताया कि ''मासिक धर्म बहुत अच्छा है और यह संकेत है कि आपका प्रजनन स्वास्थ्य और ठीक है। हर महीने गर्भाशय की कैविटी एंडोमेट्रियल कोशिकाओं द्वारा पंक्तिबद्ध होती है। यह लाइनिंग है जो हर महीने एक बच्चे को प्राप्त करने के लिए तैयार किया जाता है। पीरियड ब्लड गंदा या अशुद्ध नहीं है, वास्तव में, वे स्वस्थ हैं, जो कई बीमारियों का इलाज कर सकते हैं।

पीरियड होने पर माता-पिता को मनाना चाहिए जश्न

parents celebrate

UnTaboo की संस्थापक अंजू किश ने कहा कि अब जब हम जानते हैं कि पीरियड्स के बारे में कुछ भी अशुद्ध नहीं है, ऐसे में इससे जुड़े कलंक से लड़ने की जरूरत है। जैसा कि डॉ. कालरा ने कहा कि यह स्वस्थ होने के संकेत हैं कि आपको पीरियड हो रहे हैं। जबकि इस दौर से हर लड़की को गुजरना पड़ता है ऐसे में उस वक्त माता-पिता को छत पर जा कर खुशी मनानी चाहिए कि उनकी बेटी स्वस्थ है। 

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महिलाओं को मिलनी चाहिए पीरियड लीव

period leave

जब इंडिया बेस्ड फूड डिलीवरी स्टार्ट अप ने 10 दिनों के लिए पीरियड लीव की घोषाणा की तो जाहिर है कि समुदाय विभाजित होंगे। जबकि कुछ इसके समर्थन में थे, अन्य ये सोचने लगे कि इससे महिलाओं की रोजगार में कमी आएगी। वहीं सेक्स एजुकेशन कंपनी की संस्थापक अंजू किश के अनुसार यह एक बेहतरीन कदम था और उन कपंनियों की सराहना की जानी चाहिए जिन्होंने अपनी कंपनियों में इस पॉलिसी को लाने का फैसला किया।

उन्होंने आगे कहा कि यह एक शानदार कदम है, लेकिन जहां तक महिलाओं के रोजगार की बात है, मुझे लगता है कि हमें जापान और कोरिया से उदाहरण लेना चाहिए, जिनके पास 1947 से है। यही नहीं पीरियड लीव की पॉलिसी होने के बावजूद, उनके वर्कफोर्स में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं हैं।

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पीरियड को लेकर हाइजीन

meenal khare

कोरोना महामारी आने की वजह से ज्यादातर लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा था। इसकी वजह से ज्यादातर महिलाओं को सैनेटरी नैपकिन, टैम्पोन आदि मेंसुरेशन प्रोडक्ट्स आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में, कई महिलाएं एनजीओ और गर्वमेंट स्कूल जो सैनिटरी नैपकिन सप्लाई करते थे उनपर निर्भर थी। ऐसे में लॉकडाउन के दौरान ज्यादातर लड़कियां और महिलाएं पीरियड में हाइजीन का ध्यान नहीं रख पाई।

वहीं मीनल खरे ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान मेंसुरेशन प्रोडक्ट्स नहीं मिल पाना, यह कोई बड़ी समस्या नहीं थी। दरअसल यहां जानकारी की कमी थी। लॉकडाउन के बीच सैनिटरी नैपकिन या ऐसे प्रोडक्ट्स तक पहुंचना एक मुद्दा था, जबकि इससे भी बड़ी समस्या थी, लोगों के बीच पीरियड को लेकर गलत धारणाएं बनना। लोग इसके प्रति जागरुक ही नहीं है, ऐसे में वह घर में रखी चीजों का इस्तेमाल करते थे जैसे कपड़ा। पीरियड को लेकर इन्हीं गलत धारणाओं की वजह से हाइजीन का ध्यान रखना बहुत मुश्किल है।

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पीरियड में होने वाली परेशानियां

period problem

सोशल मीडिया कई ऐसे मीम्स और पोस्ट देखे होंगे, जिसमें पीएमएस को क्रेंकी मूड के लिए दोषी ठहराया जाता हैं। इस पर अंजू किश ने कहा कि इस तरह के चुटकुले लोगों को कामुक लगते हैं। वहीं डॉ. कालरा ने कहा कि हर किसी के पास पीएमएस या प्रीमेन्स्ट्रुअल सिंड्रोम को समझने का अनुभव नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसा जरूरी नहीं कि हर कोई पीरिडय के दौरान ऐसा अनुभव करें। कुछ महिलाओं को चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या, भारी स्तन, पेट निचले हिस्से में दर्द जैसी समस्याएं होती है।

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