मिलिए 500 से अधिक महिलाओं को सेनेटरी नैपकिन बनाने के क्षेत्र में रोजगार दे रहीं व्योमिनी सोशल फाउंडेशन की फाउंडर प्राची कौशिक से

आज हम आपको मिलवाने वाले हैं प्राची कौशिक से, जो एक सोशल एक्टिविस्ट हैं। वह अपने एनजीओ व्योमिनी सोशल फाउंडेशन के जरिए कई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में निरंतर काम कर रही हैं।

prachi kaushik promoting female entrepreneurship
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हम मेंस्ट्रुअल हेल्थ पर कई सारी बातें करते हैं, लेकिन आज भी देश का एक बड़ा वर्ग इसके बारे में जानता नहीं है। उस वर्ग में वे ग्रामीण महिलाएं हैं, जिन्होंने हमेशा से कपड़ा इस्तेमाल किया है। वहीं, जब हम राष्ट्र विकास के बारे में बात करते हैं और महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, तो हमें यह समझना भी जरूरी है कि हर महिला को शारीरिक रूप से सशक्त होना बहुत जरूरी है। यह बात समझी व्योमिनी सोशल फाउंडेशन की नींव रखने वाली प्राची कौशिक ने।

दिल्ली यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में मास्टर करने के बाद, प्राची ने दिल्ली सरकार के अंतर्गत कई कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम में काम किया। इसके बाद उन्होंने फैसला किया कि इसकी बागडोर उन्हें खुद ही संभालनी है और उन्होंने 2016 में अपनी नौकरी छोड़कर शुरू किया व्योमिनी। यह एक ऐसी संस्था है जो महिलाओं के विकास पर काम करती है। उनकी संस्था दो वर्टिकल्स की ओर ध्यान देती है- रिप्रोडक्टिव हेल्थ और ग्रामीण आंत्रेप्रेन्योर को उठाना।

अपने फाउंडेशन के जरिए प्राची ने मेंस्ट्रुअल हेल्थ मैनेजमेंट प्रोग्राम के तहत 10 लाख महिलाओं को शामिल किया। इतना ही नहीं, वह आंत्रेप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत 5000 महिलाओं को प्रशिक्षित कर चुकी हैं और 500 से अधिक महिलाएं आय बढ़ाने वाली कई एक्टिविटीज से जुड़ी हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के पथ पर निकली प्राची के बारे में आइए विस्तार से जानें।

prachi kaushik vyomini social foundation

1. व्योमिनी सोशल फाउंडेशन की स्थापना करने के लिए आप कैसे प्रेरित हुईं?

मेरा बचपन काफी संघर्षपूर्ण रहा है। मैंने बचपन से ही गरीबी देखी। मैं एक ऐसे परिवार और समाज के बीच से हूं, जिसमें लड़कियों को पढ़ने और नौकरी करने के लिए हतोत्साहित किया जाता है। उन्हें हर पल यह याद दिलाया जाता है कि आपको शादी करके परिवार संभालना है। इसके साथ ही, मैंने अपने आस-पास कई घरेलू हिंसा के मामले भी देखे हैं। इन सब चीजों को देखकर मैं यहां तक आई हूं।

मुझे यह बात बहुत पहले समझ आ गई थी कि हर महिला का आर्थिक और शारीरिक रूप से सशक्त होना कितना जरूरी है। बस इसी मकसद को लेकर मैंने व्योमिनी की नींव रखी। हमारी संस्था व्योमिनी महिलाओं को आर्थिक और शारीरिक विकास के लिए प्रोत्साहित करता है। उन्हें स्किल ट्रेनिंग , मेंटरिंग , सही जानकारी के माध्यम से आगे बढ़ने में मदद की जाती है।

2. समाज के हाशिए पर मौजूद वर्गों के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा? आपके संगठन ने उन चुनौतियों का कैसे सामना किया?

मार्जिनलिज्ड सोसाइटी से जुड़ा एक बड़ा वर्ग अपने रोजमर्रा के खर्चे पूरे करने के लिए मजदूरी करता है। उनके पास कुछ और ऑप्शन रह नहीं जाता है और वे लोग मजबूरी में यह काम करते हैं। उनके लिए अपने कौशल को पहचानकर कुछ अपना शुरू करने की हिम्मत नहीं होती।

हम अपनी संस्था के माध्यम से ऐसे प्रोगाम चलाते हैं, जो उन्हें नए कौशन सीखने के साथ-साथ नए रोजगार से जुड़ने में मदद करते हैं। हमारी इस पहल का नाम व्योमिनी उद्यमी कंसोर्टियम है। इस प्रोग्राम से जुड़कर आप कई महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं , एक्सपर्ट की राय ले सकते हैं और अपने काम को आगे बढ़ा सकते हैं।

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vyomini foundation talks about  menstrual health

3. आपकी संस्था महिलाओं को मेंस्ट्रुअल हेल्थ से कैसे रूबरू करवाती है?

व्योमिनी का सेकंड वर्टिकल मेंस्ट्रुअल हेल्थ और हाईजीन पर काम करता है। हमारी संस्था जागरूकता, अफॉर्डिबिलिटी और एक्सेसिबिलिटी पर काम करती है। जागरूकता कार्यक्रमों में गांवों में स्वास्थ्य अभियान चलाना और सरकारी अधिकारियों और यहां तक कि कॉर्पोरेट्स को मासिक धर्म स्वास्थ्य पर प्रशिक्षण देना शामिल है।

व्योमिनी संगठनों में सैनिटरी-नैपकिन वेंडिंग मशीनें स्थापित करती है और मेंस्ट्रुअल हेल्थ के मुद्दे के बारे में विस्तार से बताती हैं। इसके अलावा, हम योगासन सिखाते हैं जो मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के लिए सहायक हो सकते हैं। व्योमिनी प्रशिक्षकों और विशेषज्ञों की एक टीम के साथ काम करती है। इसका रेवेन्यू मैन्यूफैक्चरिंग मशीनों, 'रक्षक' ब्रांड नाम के तहत सैनिटरी पैड की बिक्री और ट्रेनिंग कार्यक्रमों से आता है।

4. रिग्रेसिव माइंडसेट्स और पारंपरिक कंडीशनिंग के कारण महिलाएं बाहर जाकर काम नहीं कर पाती हैं, ऐसे में आप उन्हें उद्यमी बनने के लिए कैसे प्रेरित करती हैं?

अगर आप ग्रामीण क्षेत्रों में किसी महिला से संपर्क करते हैं, तो वह तीन अलग-अलग कारण बताती है कि वह काम क्यों नहीं करना चाहती। एक कनेक्टिविटी है, दूसरी सुरक्षा है और तीसरी चुनौती है- उनके सामने सही बुनियादी ढांचे की कमी। अगर मैं उन्हें ये सब मुहैया करा सकूं तो उन्हें उद्यमी बनने से कोई नहीं रोक सकता। इसलिए हम एमएसएमई मंत्रालय की मदद से सरकारी भवनों में स्वयं सहायता समूहों की 12-15 महिलाओं के क्लस्टर विकसित कर रहे हैं।

कुछ महिलाओं के पास पैसा है लेकिन वे नहीं जानतीं कि क्या करें, दूसरों के पास पैसा नहीं है, अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग समस्याएं हैं। हम महिलाओं से संपर्क करते हैं और उन्हें बताते हैं कि उनकी स्थिति को देखते हुए हम उन्हें आर्थिक रूप से कैसे स्वतंत्र बना सकते हैं।

5. क्या इन महिलाओं को स्कूलों और कॉलेजों में प्रवेश करने के लिए कोई स्पेसिफिक ट्रेनिंग्स या स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम होते हैं?

जी हां, हमारा इन्क्यूबेशन सेंटर और कैंपस कनेक्ट प्रोग्राम विद्यार्थियों को स्व रोजगार के लिए प्रोत्साहित करता है , जिसके माध्यम से स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ उद्यमशीलता के गुण भी सिख सकते हैं। वे अस्सेस्मेंट टूल के माध्यम से यह भी जान सकते हैं कि वे किस कला या कौशल मैं निपुण हैं। इसके साथ ही हम सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओ से भी उद्यमियों को जोड़ते हैं।

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6. आपके और आपकी संस्था के आगे के कुछ प्रोजेक्ट्स के बारे में बताएं। आपकी संस्था आंत्रेप्रेन्योरशिप को प्रोमोट करने के लिए किस तरह से काम करना चाहती है?

हम चाहते हैं कि भारत के दूर दराज इलाकों तक अपने इस प्रोग्राम को लेकर जाएं। अभी फिलहाल हमने एक इन्क्यूबेशन सेंटर उत्तर प्रदेश के बहराइच क्षेत्र में शुरू किया है। आप जानते ही हैं कि बहराइच एक पिछड़ा डिस्ट्रिक्ट है, वहां के युवा यदि हमारे इन्क्यूबेशन सेंटर से वहीं रहकर जुड़ सकते हैं तो इससे बेहतर और क्या बात है? अभी वहां पर हमने 1000 युवाओं और महिलाओं को अपने इस प्रोग्राम से जोड़ा है।

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7. आप अन्य युवा उद्यमियों को क्या सलाह देंगी जो उद्यमिता को बढ़ावा देने के क्षेत्र में एक सकारात्मक प्रभाव लाने की कोशिश कर रहे हैं?

जब आप दूसरों को सफल होने में मदद करना अपना लक्ष्य बना लेते हैं, तो आप स्वयं एक सफल व्यक्ति बन जाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि सच्ची सफलता केवल व्यक्तिगत लक्ष्यों को प्राप्त करने के बारे में नहीं है, बल्कि दूसरों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने के बारे में भी है। दूसरों की मदद करने को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है क्योंकि यही सच्ची और सार्थक सफलता प्राप्त करने की कुंजी है।

मेरा उद्देश्य यूनिकॉर्न बनना नहीं है बल्कि उन लोगों के लिए एक ईकोसिस्टम बनाना है जो उद्यमी बनने के इच्छुक हैं और अपने कौशल को एक नए स्तर पर ले जाना चाहते हैं।

कई अवॉर्ड्स से सम्मानित प्राची निरंतर अपने कर्तव्य की ओर काम कर रही हैं। वे कई महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं। उनका सपना है कि वह हर महिला को आत्मनिर्भर बना सकें।

प्राची कौशिक के बारे में जानकार आपको कैसा लगा हमें कमेंट करके बताएं। अगर इस लेख को लेकर आपके कोई सवाल हैं, तो हमें जरूर बताएं। इस लेख को लाइक और शेयर करें और ऐसे ही लेख पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी के साथ।

Image Credit: Freepik

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