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गुलाम भारत में राजनीतिक पद पाने वाली भारतीय महिला थीं जवाहरलाल नेहरू की बहन विजय लक्ष्मी पंडित, जानें

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अब तक केवल चार भारतीय महिलाएं ही अध्यक्ष पद तक पहुंच पाई हैं। ऐसे में जानें UN की पहली महिला अध्यक्ष के बारे में।
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Published -22 Jul 2022, 19:03 ISTUpdated -04 Aug 2022, 19:21 IST
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भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी काफी पहले से थी। हालांकि उस दौर में केवल अमीर और शिक्षित घरों की महिलाएं ही राजनीति का हिस्सा हुआ करती थीं। विजय लक्ष्मी पंडित भी उन्हीं महिलाओं में से एक थीं। आज के इस लेख में हम आपको विजय लक्ष्मी पंडित के जीवन के बारे में बताएंगे, कि आखिरकार कब और कैसे उन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनाया गया। 

कौन हैं विजय लक्ष्मी पंडित?

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विजय लक्ष्मी पंडित भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की बहन थीं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान विजय लक्ष्मी अहम भूमिका निभाते नजर आईं। 18 अगस्त 1900 को नेहरू परिवार में विजय लक्ष्मी का जन्म हुआ। उनकी शिक्षा दीक्षा घर में पूरी हुई। साल 1921 में विजय लक्ष्मी ने प्रसिद्ध वकील रणजीत सीताराम पंडित से विवाह किया। 

गुलाम भारत में मिला था राजनीतिक पद

साल 1937 में विजय लक्ष्मी पंडित को मंत्री पद मिला। उस वक्त देश अंग्रेजों के अधीन था, ऐसे में विजय लक्ष्मी पंडित गुलाम भारत में मंत्री पद पाने वाली भारतीय महिला बनीं।

भारत की राजनीति में विजय लक्ष्मी की भूमिका 

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इसी साल विजय लक्ष्मी पंडित को संयुक्त प्रांत की प्रांतीय विधानसभा के लिए निर्वाचित किया गया। साल 1946 से लेकर कई वर्षों तक विजय लक्ष्मी ने संयुक्त राष्ट्र में किसी राष्ट्र के प्रतिनिधित्व करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। 

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संयुक्त महासभा में पहुंची विजय लक्ष्मी पंडित

साल 1947 में विजय लक्ष्मी पंडित विश्व की प्रथम महिला राजदूत बनीं, जिन्होंने तीन राजधानियों का राजदूत के पद पर काम किया। साल 1953 में उन्हें संयुक्त महासभा की प्रथम निर्वाचित महिला अध्यक्ष बनाया गया। इस तरह विजय लक्ष्मी पंडित UN  के अध्यक्ष पद पर काबिज रहने वाली देश की पहली महिला बनीं।

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अन्य पदों पर रहीं कार्यरत

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आजाद भारत में विजय लक्ष्मी पंडित स्वास्थ्य मंत्री, राज्यपाल और राजदूत जैसे अहम पदों पर काबिज रहीं। जहां उन्होंने देश की प्रगति में कई अहम कार्य किए। 

आपातकाल का किया विरोध

1975 के दौरान जब इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल लगाया गया, तब उन्होंने खुलकर इस बात का विरोध किया। आखिरकार 1990 के दिन विजय लक्ष्मी ने अपने जीवन की आखिरी सांस ली। 

तो ये थी विजय लक्ष्मी पंडित की कहानी, जिन्होंने भारतीय राजनीति को और भी मजबूत बनाने का कार्य किया। आपको हमारा यह आर्टिकल अगर पसंद आया हो इसे लाइक और शेयर करें, साथ ही ऐसी जानकारियों के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ।

Image Credit- wikipedia

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