जासूसी वाली फिल्में देखने में कितनी दिलचस्पी रहती है न? फिल्म के किरदारों को देख हमारे अंदर का जासूस भी निकल जाता है। चोरी किसने की होगी, मर्डर किसने किया होगा और कौन किसे बेवकूफ बना रहा है, हम भी इन चीजों को एनालाइज करने लगते हैं। सोचिए उन जासूसों के बारे में जो यह काम करते हैं।

जब हम जासूसी की बात करते हैं, तो दिमाग में आता है कि यह एक ऐसी फील्ड है, जिसमें सिर्फ पुरुष ही होते हैं। मगर क्या आपने किसी महिला जासूस के बारे में पढ़ा या सुना है? हां आपने फिल्म 'राजी' देखी होगी तो उसमें सेहमत के किरदार से वाकिफ हुई होंगे।

आज हम आपको हमारी अपनी और पहली प्राइवेट इन्वेस्टिगेटर के बारे में बताने जा रहे हैं। रजनी पंडित एक ऐसा नाम है, जिन्होंने जासूसी को करियर के रूप में चुना और ऐसे-ऐसे केस सुलझाए, जिनकी गुत्थी सुलझाना मुश्किल था। उन्हें देसी शरलॉक होम्स की उपाधि दी जाती है। भारतीय महिला जेम्स बॉन्ड कहा जाता है। अगर अब तक आपने उनके बारे में नहीं सुना, तो आज चलिए उन्हें अच्छे से जान और पहचान लें।

ऐसा था शुरुआती जीवन

rajani pandit detective

साल 1962 में महाराष्ट्र के पालघर जिले में जन्मी और पली-बढ़ी रजनी पंडित के पिता स्थानीय पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर के रूप में काम करते थे। उन्हें शुरू से ही रहस्य और जासूसी वाले उपन्यास पढ़ने में रुचि थी। उन्होंने मुंबई के रूपारेल कॉलेज में मराठी साहित्य में ग्रेजुएशन किया। 

कॉलेज में बढ़ी थी दिलचस्पी

अपने कॉलेज में ही उन्होंने पहली बार जासूसी के काम में दिलचस्पी हुई थी और उन्होंने 1983 में अपनी एक क्लासमेट के बिहेवियर के प्रति कंसर्न होकर उसकी जासूसी (भारतीय राजकुमारी नूर इनायत जो ऐशो-आराम छोड़कर बन गई थीं जासूस) की थी और पता लगाया था कि वह वेश्यावृत्ति में शामिल है। इसकी जानकारी उन्होंने क्लासमेट के पिता को दी, उन्हें सारे सबूत दिए और अपना केस सॉल्व किया।

क्लर्क से जासूस बनने की कहानी

कॉलेज खत्म हो गया, इसके बाद वह एक ऑफिस में क्लर्क की नौकरी करने लगी। ऑफिस में काम करने वाली एक महिला के घर चोरी हुई और महिला को शक था कि चोरी उनकी बहू ने की है। रजनी को फिर एक बार जासूसी करने का मौका मिला और उन्होंने महिला के परिवार के सभी सदस्यों के दैनिक कार्यक्रम को ट्रैक किया और पाया कि सबसे छोटा बेटा ही चोरी कर रहा था। यह उनका पहला पेड केस था और उसने उन्हें अपने स्किल्स पर काम करने के लिए प्रेरित किया।

बेटी की जासूसी पर ऐसा थी पिता की प्रतिक्रिया

indias first woman private detective

इस केस को सॉल्व करने के बाद, रजनी की बड़ी तारीफ होने लगी थी। धीरे-धीरे देश की पहली महिला जासूस के तौर पर उनकी पहचान बनाने लगी थी। लेकिन जब इस बारे में उनके माता-पिता को पता लगा, तो उन्होंने रजनी को इस काम के खतरों के प्रति आगाह किया। उनकी मां ने उनका पूरा सहयोग दिया और फिर पिता की भी मंजूरी मिल गई। इसके बाद  उन्होंने दोबारा पीछे मुड़कर नहीं देखा।\

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करियर का सबसे मुश्किल केस को ऐसे किया सॉल्व

रजनी पंडित को जल्द ही करियर का एक सबसे मुश्किल केस मिला। यह एक मर्डर मिस्ट्री था, जो एक पिता और बेटे की हत्या का केस था। इसे सुलझाना बेहद पेचीदा था, क्योंकि शक की सुई उस महिला पर थी, जिसके बेटे और पति की हत्या हुई थी मगर उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं थे। रजनी उसके घर में नौकरानी बन कर काम करने लगीं। धीरे-धीरे रजनी ने महिला का विश्वास जीत लिया, मगर फिर एक दिन रजनी से गड़बड़ हो गई। दरअसल, एक दिन अचानक रजनी का टेप रिकॉर्डर चल पड़ा, जिससे महिला को उन पर शक हो गया। महिला ने इसके बाद रजनी का घर से बाहर निकल बंद कर दिया। मगर कुछ 6 महीने बाद रजनी को घर से बाहर निकलने का मौका मिला। एक शख्स उस महिला से मिलने पहुंचा। रजनी को पता चल गया कि हत्या महिला ने ही करवाई है, मगर बाहर जाए कैसे? उन्होंने अपने पैर में चोट लगने का नाटक किया। डॉक्टर को दिखाने के लिए बाहर निकलीं और फिर एसटीडी बूथ में जाकर अपने सहयोगी को पुलिस के साथ आने के लिए कह दिया।

साल 1991 में शुरू की एजेंसी

पंडित ने 1991 में अपनी एजेंसी, रजनी पंडित डिटेक्टिव सर्विसेज, जिसे रजनी इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो के नाम से भी जाना जाता है, शुरू की। उन्होंने मुंबई के माहिम में एक कार्यालय स्थापित किया और 2010 तक 30 जासूसों को निय़ुक्त किया था और उस समय एक महीने में लगभग 20 मामलों को संभाल रही थी। 

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कर चुकी हैं 80 हजार से ज्यादा केस सॉल्व

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कहते हैं कि उन्होंने अब तक 80,000 से ज्यादा केस सॉल्व किए हैं। इसके साथ ही 'फेसेस बिहाइंड फेसेस' और 'मायाजाल' नाम से उन्होंने दो किताबें भी लिखी हैं। वह अब तक कई अवॉर्ड्स जीत चुकी हैं। उनके ऊपर एक डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी है और कहा जाता है कि विद्या बालन अभिनीत फिल्म 'बॉबी जासूस' उनके जीवन पर आधारित है।

सबसे बड़ी कॉन्ट्रोवर्सी

साल 2017 में वह एक कॉन्ट्रोवर्सी का शिकार हुई थीं। रजनी पर अपने क्लाइंट के लिए गलत ढंग से  कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) प्राप्त करने, अवैध रूप से सोर्सिंग और सीडीआर बेचने का गंभीर आरोप लगा था। इस मामले में उन्हें अरेस्ट भी किया गया था।  

तो यह थी देश की पहली महिला जासूस रजनी पंडित की कहानी। आपको इनके बारे में जानकर कैसा लगा, हमें जरूर बताएं। अगर यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे लाइक और शेयर करें। इस तरह की अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।

Image Credit : rediff. com