मंजिल उन्हीं को मिलती है जो मंजिल पाने का हौसला रखते हैं। अधिकांश लोग एक निश्चित लक्ष्य से परे नहीं नहीं सोचते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी लोग है, जो पूरी दुनिया के सामने मिसाल बन जाते हैं। पिछले एक दशक में भारत के ऐसी कई महिलाएं उभर कर सामने आई, जो सिर्फ देश के सामने ही नहीं बल्कि पुरे विश्व के सामने एक मिसाल के तौर पर पहचान बनाने में कमियाबी हासिल की हैं। कहते है ना! कि, उड़ान वहीं भरते हैं जो दुनिया के सामने मिसाल बनाना चाहते हैं। खैर, आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसी ही महिलाओं के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने दुनिया के सामने एक मिसाल प्रस्तुत की हैं।

1-कुमुदिनी त्यागी और रीति सिंह

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भारतीय नौ सेना में पहली बार दो महिला अधिकारीयों को वॉर शिप पर तैनात किया जायेगा। इन महिला अधिकारी का नाम है सब-लेफ्टिनेंट कुमुदिनी त्यागी और सब-लेफ्टिनेंट रीति सिंह।  कुमुदिनी त्यागी और रीति सिंह ने देश के साथ दुनिया के सामने ये मिसाल प्रस्तुत करके साबित कर दिया की मेहनत के सामने कुछ भी मुमकिन नहीं। आज वो लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं।

2-दीपा कर्मकार

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भारतीय जिम्नास्ट दीपा कर्माकर ने महज 24 साल की उम्र में इंटरनेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल अपने नाम कर ली थी। इंटरनेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल के साथ दीपा कर्मकार ने ओलंपिक में पदक जीतकर ये साबित कर दिया की मेहनत और लगन के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं है। आज दीपा कर्मकार लाखों महिला खिलाडियों के लिए एक प्रेरणा है।

3-ऋतु करीधल और मुथैया वनिता

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अगर आपको याद होगा तो ये आपको ज़रूर मालूम होगा कि हाल में ही इसरो द्वारा चंद्रयान 2 मिशन ने उड़ान भरी थी, इस उड़ान को सफ़ल बनाने में ऋतु करीधल और मुथैया वनिता का महत्वपूर्ण योगदान था। ऋतु करीधल के साथ मुथैया वनिता ऐसी दो महिला वैज्ञानिक थी जिन्होंने पुरे विश्व के सामने एक मिसाल साबित कर दिया। हिंदुस्तान में पहली बार हुआ था जब कि किसी स्पेस मिशन को कोई महिला वैज्ञानिक लीड कर रही थी।

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4-दुती चंद

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खेल के मैदान में भारत के साथ दुनिया के सामने कई भारतीय महिला खिलाडियों ने इस दशक देश का नाम रौशन किया है। इन्हीं महिला खिलाड़ी में से एक  है दुति चंद। विश्व विश्वविद्यालय खेल में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। वहीं जकार्ता में हुए 2018 एशियाई खेलों में उनके दो पदक भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां रहीं।

5-गीतांजलि राव

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भारतीय-अमरीकी मूल की 15 वर्षीय गीतांजलि राव कुछ दिन पहले ही सबसे चर्चित महिला थी। गीतांजलि राव को प्रतिष्ठित मैगज़ीन यानि टाइम मैगज़ीन ने उन्हें  "किड ऑफ़ द ईयर"  के खिताब से नवाज़ा। आपकी जानकरी के लिए बता दें कि गीतांजलि राव एक वैज्ञानिक और आविष्कारक हैं।

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6-अवनी चतुर्वेदी

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देश की रक्षा के लिए भी भारतीय महिलाएं किसी से कम नहीं है। अवनि चतुर्वेदी फाइटर जेट उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला पायलट बनकर ये साबित कर दिया की फाइटर जेट एक महिला अधिकारी भी उड़ा सकती हैं। अकेले मिग-21 बाइसन विमान उड़ा कर भी अवनी चतुर्वेदी ने कीर्तिमान अपने नाम किया है।

7-मैरी कॉम

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मैरी कॉम आज किसी पहचान की मोहताज नहीं है। पांच बार की वर्ल्ड चैंपियन और तीन बच्चों की मां भारतीय महिला मुक्केबाज मैरी कॉम पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं। 2012 के लंदन ओलम्पिक में वो अपने नाम कांस्य पदक भी कर चुकी हैं।

8-अरूणिमा सिन्हा

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अरूणिमा सिन्हा आज लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं। अरूणिमा सिन्हा राष्ट्रीय स्तर की पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी तथा एवरेस्ट शिखर पर चढ़ने वाली पहली भारतीय दिव्यांग महिला हैं।  उन्होंने वर्ष 2013 में एवरेस्ट शिखर पर चढ़कर ये साबित कर दिया कि दिव्यांग होने से कुछ नहीं होता, बस आपके अंदर हिम्मत और लगन होना चाहिए किसी भी काम को लेकर।

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9-हिमा दास

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हिमा दास एक भारतीय धावक है। हिमा ने लगातार पांच गोल्ड मेडल जीतकर ये साबित कर दिया कि एक गरीब और ग्रामीण इलाके से आने वाली लड़की देश के लिए कुछ भी कर सकती हैं। हिमा ने जब पांचवीं बार गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा था, तब प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने भी बधाई दी थी।

10-शिवांगी शिंह 

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वराणसी की शिवांगी शिंह राफेल स्क्वाड्रन की पहली महिला फाइटर बनने की उपलब्धि अपने की हैं। इससे पहले शिवांगी ने फाइटर जेट मिग-21 भी उड़ा चुकी हैं। कहा जाता है कि शिवांगी शिंह, विंग कमांडर अभिनंदन के साथ भी काम कर चुकी हैं। 

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