अवनि चतुर्वेदी फाइटर जेट उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला पायलट बन गई हैं। अवनि ने अकेले मिग-21 बाइसन विमान उड़ा कर यह कीर्तिमान स्थापित किया है। 

अवनि चतुर्वेदी ने इसके लिए गुजरात के जामनगर एयरबेस से उड़ान भरी और पहली बार में इसे पूरा किया। इसके बाद अवनि फाइटर एयरक्राफ्ट उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला पायलट बन गईं। 

यहां बता दें कि साल 2016 में अवनि चतुर्वेदी के साथ-साथ मोहना सिंह और भावना कांत को इस काम के लिए चुना गया था। बीते एक साल तक तीनों को फाइटर पायलट की ट्रेनिंग दी गई थी। इसके पहले 2016 के पहले भारतीय वासुसेना में महिलाओं को फाइटर प्लेन चलाने की अनुमति नहीं थी। मगर अनुमति मिलने के दो साल बाद ही अवनि ने पहली महिला फाइटर पायलट बन गईं। 

avani chaturvedi first female  fighter

अवनि चतुर्वेदी का बचपन 

अवनी चतुर्वेदी शहडोल की रहने वाली हैं और उनकी स्कूलिंग यहीं हुई है। अवनि ने राजस्थान की वनस्थली यूनिवर्सिटी से बीटेक किया था। उनके पिता दिनकर प्रसाद चतुर्वेदी इंजीनियर हैं और मां सविता हाउसवाइफ हैं। अवनि का कहना है, “जब मैं तीसरी क्लास में थी तब टीवी पर कल्पना चावला की स्पेसशिप क्रैश की खबर देखी थी। उस खबर ने मेरी मां सविता चतुर्वेदी को बहुत दुखी कर दिया था। वो टीवी स्क्रीन के सामने रो रही थीं। मैं उनके पास गई और बोली मां आंसू मत बहाओ। मैं अगली कल्पना चावला बनूंगी।“  

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साथ ही उन्होंने कहा, “मेरे मन में पायलट बनने का सपना घर कर गया। कल्पना चावला के अलावा पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम ने मुझे बहुत प्रेरणा दी। मुझे आज भी याद है वो अपने भाषणों में देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की बात कहते थे।“

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पायलट बनने का सपना

अवनी के परिवार में उनके भाई इंडियन आर्मी में हैं। बचपन में अपने भाई को आर्मी यूनिफॉर्म में देखकर अवनी की भी आर्मी ज्वाइन करने की इच्छा होती थी। पिता दिनकर प्रसाद ने एक इंटरव्यू में बताया था कि अवनी पढ़ाई में तेज थीं। बीटेक में उन्हें 88 प्रतिशत मार्क्स मिले थे। इंजीनियरिंग होते ही एक एमएनसी में अच्छे पैकेज पर जॉब मिल गई लेकिन ज्वाइनिंग के महज 6 महीने बाद एयरफोर्स एकेडमी में सिलेक्शन हो गया तो जॉब छोड़ दी।

साथ ही उन्होंने अपनी बेटी के बारे में कहा, “बचपन से अवनि बहुत शांत स्वभाव की थी। मगर उसे अनुशासन में रहना पसंद था। मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि उसे पायलट ही बनना है। अवनि ने 10वीं और 12वीं दोनों ही बोर्ड परीक्षा में अपने स्कूल में टॉप किया था। उसके बाद आगे की इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए वो वनस्थली विद्यापीठ चली गई थीं।“