जानी मानी एक्ट्रेस दिया मिर्जा की खूबसूरती और एक्टिंग के कायल तो हम हैं हीं, समाज और पर्यावरण के लिए उनकी इन्सपिरेशन सोच हममें जोश भरती है। पूर्व मिस एशिया पैसिफिक, एंट्रेप्रिन्योर, एन्वायरमेंटलिस्ट दीया मिर्जा को साल 2017 में भारत का UN Environment Goodwill Ambassador चुना गया था। 

पर्यावरण के लिए संजीदा हैं दीया

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Image Courtesy : Instagram (@diamirzaofficial)

जब भी बात आती है पर्यावरण की तो दीया हमेशा खुलकर इस पर बात करती हैं और पर्यावरण को बनाए रखने वाले कदम उठाने पर जोर देती हैं। अब उन्होंने कहा है कि हम प्रकृति से अलग नहीं हैं और हमारे पर्यावरण की सेहत जैसी होगी, वैसी ही सेहत हमारी भी होगी। दीया कहती हैं कि समाज का हिस्सा होने के नाते हम कई चीजों पर अपना अधिकार समझते हैं क्योंकि वे आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन अगर हम उनकी कीमत भी समझें तो हम अपनी प्रकृति का बेहतर तरीके से खयाल रख सकते हैं।  

दीया ने कहा है कि वह पर्यावरण की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए हर तरह से प्रयास करेंगी। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि पर्यावरण के बारे में लोगों को सजग बनाने के लिए उनके पास कई योजनाएं हैं और वह अपने रोजमर्रा की जिंदगी में भी पर्यावरण को साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए कदम उठाती हैं। प्रकृति और मनुष्य के बीच के अनूठे रिश्ते के बारे में क्या सोचती हैं दीया मिर्जा आइए जानते हैं-

अपनी जड़ों की तरफ लौटने की जरूरत

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हम अपनी सेहत को दांव पर लगाकर तरक्की की बात नहीं कर सकते, यह बात बहुत आसानी से समझी जा सकती है। जैसे-जैसे शहरीकरण हो रहा है, वैसे-वैसे हमारे शहर विकसित होते जा रहे हैं। लेकिन इस बीच हमें यह समझने की जरूरत है कि हम विकास करने के साथ-साथ अपनी प्रकृति का खयाल रखने की भी जरूरत है। 

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हमें भी जिम्मेदारी उठानी होगी

दीया कहती हैं कि हर बात के लिए सरकार को कोसना सही नहीं है। सरकार अपना काम ठीक से करे, इसके लिए हमें भी अपने स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है। अगर हम अपने दायित्वों को ठीक तरीके से निभाएं तो सरकार और पॉलिसी बनाने वालों पर हम बेहतर रणनीति अपनाने के लिए दबाव डाल सकते हैं।

 

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दीया कहती हैं कि अपने रोजमर्रा की जिंदगी में वह छोटे-छोटे कदम उठाती हैं और लोगों से उम्मीद करती हैं वे भी उनसे प्रेरणा लें। मसलन दीया मिर्जा ने पैकेज्ड पानी की बोतलें लेना पूरी तरह से बंद कर दिया है। वह बताती हैं, 'जब मैं विदेश का सफर करती हूं तो भी मैं अपनी एक लीटर की मेटल वाली बोतल लेकर चलती हूं और जहां कहीं भी ठहरती हूं, वहीं से पानी भर लेती हूं। इस छोटे से कदम से मुझे खुशी होती है। 

प्लास्टिक की जगह बांस की बनी सैनिटरी नैपकिन का करें इस्तेमाल

दीया ने अपने एक इंटरव्यू में कहा है, 'मैंने रेगुलर सेनिटरी नैपकिन की जगह 100 फीसदी बायोडीग्रेडेबल नेपकिन का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। प्लास्टिक इयरबड की जगह मैं बैंबू इयरबड का इस्तेमाल करती हूं। मेरे पास टूथब्रश भी बैंबू का है। मैं प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल नहीं करती हूं, अपना कपड़े का थैला लेकर चलती हूं, जो सनग्लास से भी हल्का होता है। मैंने यह भी सुनिश्चित किया है कि मुझे डिलीवरी में मिलने वाला हर सामान जूट या कपड़े के थैले में मिले।

प्लास्टिक को कहें ना

एक चीज जिसे हम आसानी से मना कर सकते हैं, वो है प्लास्टिक की बनी थैलियां और स्ट्रॉ। जब हम कोल्ड ड्रिंक ऑर्डर करें तो हम कह सकते हैं कि स्ट्रॉ ना दिया जाए। एक स्ट्रॉ पर्यावरण में 500 सालों तक रहता है और कई जगहों पर 500 मिलियन स्ट्रॉ एक दिन में इस्तेमाल हो जाते हैं।   

 

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